राजस्‍थान के रास्ते राज्यसभा जाने की तैयारी में मनमोहन, नामांकन किया

जयपुर : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजस्‍थान के रास्ते राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। उन्होंने मंगलवार को राजस्थान से राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन पत्र भरा। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट मौजूद रहे। मालूम हो कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी का निधन हो गया था इसके बाद यह सीट खाली हुई है। इस राज्यसभा सीट पर उपचुनाव कराया जाना है।  26 अगस्त को होने वाले उपचुनाव में राज्यसभा की इस सीट के लिए कांग्रेस संख्याबल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। इस संख्या बल के अनुसार मनमोहन का चुना जाना भी तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभाल

मनमोहन को राज्यसभा का सांसद चुने जाने को लेकर कोई भूल ना हो जाए, इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। पार्टी के विधायकों काे एकजुट रखने के साथ ही वे निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायकों से भी संपर्क बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि असम से राज्यसभा के सांसद मनमोहन सिंह का कार्यकाल 14 जून को खत्म हुआ ‌‌था। वहीं, भाजपा ने मंगलवार को प्रदेश पार्टी कार्यालय में विधायक दल की बैठक बुलाई है इसमें तय होगा कि भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी या नहीं।

कांग्रेस है संख्या बल में अधिक

मालूम हो कि राजस्थान विधानसभा में कुल 199 सीटें हैं। कांग्रेस के अपने 100 विधायक हैं और इसको 6 बसपा, 2 बीटीपी, 2 सीपीएम, 1 आरएलडी और 12 निर्दलीय विधायकाें का समर्थन है। इस प्रकार कांग्रेस के पास संख्या बल 123 हो रहा है। वहीं, भाजपा के पास केवल 72 विधायक हैं और आरएलपी के 2 विधायकों का समर्थन इसे हासिल हो सकता है। 1 निर्दलीय का समर्थन किसी को भी प्राप्त नहीं है इसलिए अंदाजा लगाना मुश्किल है ‌कि उसका वोट किसको मिलेगा। साथ ही यहां की दो विधानसभा सीटें खाली चल रही हैं ‌जिस पर उपचुनाव होना बाकी है।

मनमोहन जीते तो राजस्‍थान में बनेगा इतिहास

बता दें कि प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटें हैं। जिसमें से 9 सीटों पर भाजपा का कब्जा हैं। सैनी के निधन के बाद एक सीट खाली हो गई। जो भी नया प्रत्याशी इस सीट से चुना जाएगा उसका कार्यकाल 2024 तक के लिए ही होगा। यह राजस्‍थान के लिए गौरव की बात है कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब कोई पूर्व पीएम राज्यसभा के लिए यहां से नामांकन भर रहे हैं।

90 के दशक में आर्थिक सुधारों का जनक

मनमोहन प्रधानमंत्री रहते हुए असम से राज्यसभा सदस्य थे। वह लगभग तीन दशक से इस उच्च सदन के सदस्य रहे हैं। वे 1991 से 2019 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 14 जून को खत्म हुआ उसके बाद कांग्रेस के लिए कोई जगह खाली नहीं थी और सिंह को फिर से इसलिए नामित नहीं किया जा सका क्योंकि कांग्रेस असम में सत्ता में नहीं है। 1991 में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने वित्त मंत्री की कुर्सी संभाली थी। सिंह 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकाल (यूपीए-1 और यूपीए-2) के लिए प्रधानमंत्री रहे थे। जाने-माने अर्थशास्त्री मनमोहन को 90 के दशक में भारत में आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है।

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