भारत ने अंतरिक्ष में दिखाया अपना दम, चीन ने दी बधाई

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नई दिल्ली: भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि अंतरिक्ष की ऊचाईयों को छूने में वो किसी से कम नहीं। सोमवार को चंद्रयान-2 के सफल लॉन्च के बाद अंतरिक्ष में दुनिया ने भारत का दम देखा। यान के प्रक्षेपण के बाद चीन ने भारत को इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी। चीन के चंद्रमा अन्वेषण कार्यक्रम के प्रमुख वू वेइरेन ने भारत को बताया कि चीन अपने चंद्र मिशन पर आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि वह अपने अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम की योजना किसी अन्य देश की प्रतिस्पर्धा में नहीं बना रहा है। मालूम हो कि भारत के सबसे बेहतरीन रॉकेट जीएसएलवी-एमके 3 एम जिसे बाहुबली भी बोला जाता ने 1 ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) के साथ आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। इसका कुल वजन 3850 किलो बताया जा रहा है। लॉन्च के 16 मिनट बाद ही ये पृथ्वी की कक्षा में जा पहुंचा। चीन के एक समाचार पत्र के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार भारत, इजराइल और अमेरिका के अंतरिक्ष यात्रियों को पांच वर्ष के भीतर चंद्रमा तक भेजने के लिए किए जा रहे प्रयासों को देखकर चीन को और प्रेरणा मिल रही है।

दक्षिणी ध्रुव के नजदीक सुरक्षित लैंडिंग सबसे जटिल

प्रक्षेपण के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने बताया कि 15 जुलाई को लॉन्च के 56 मिनट पहले आई तकनीकी खराबी को टीम के सारे लोगों ने ‌दिन रात मेहनत करके जल्‍द से जल्द ठीक कर लिया और एक हफ्ते के भीतर ही सफलतापूर्वक प्रक्षेपण भी किया। उन्होंने बताया कि इस चंद्र मिशन का सबसे जटिल भाग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सुरक्षित लैंडिंग करना है। भारत पहला देश होगा जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि ये भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरूआत है। उन्होंने कहा अगले डेढ़ महीने हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, इस दौरान चंद्रयान को चांद की कक्षा में प्रवेश करने से पहले अभियान के 15 चरणों से होकर गुजरना होगा। इस अभियान से कई रहस्यों पर से पर्दा उठेगा जिसका लाभ मानव सभ्‍यता को होगा।

978 करोड़ रुपये की लागत से बना ‘चंद्रयान-2’

भारत से पहले जिन देशों ने भी चांद पर मिशन भेजे हैं उनकी लागत कई लाख करोड़ रुपयों में रही है, लेकिन भारत ने इस संबंध में क्रांतिकारी काम किया है। चंद्रयान-2 के निर्माण से लेकर प्रक्षेपण तक की कुल लागत मात्र 978 करोड़ रुपये अाई है और इसी के साथ ये मिशन पूरी तरह से स्वदेशी है। इसरो का सबसे जटिल और अब तक का सबसे प्रतिष्ठित मिशन माने जाने वाले ‘चंद्रयान-2’ के साथ रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

चंद्रयान में कुल 13 पेलोड

चंद्रयान-2′ में कुल 13 पेलोड हैं जिनमें से आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। रोवर का वजन 27 किलो है और इसका नाम ‘प्रज्ञान’ का मतलब संस्कृत में ‘बुद्धिमता’ होता है। वही लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। ऑर्बिटर का काम चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करना होगा साथ ही वो पृृथ्‍वी और लैंडर के बीच संपर्क स्‍थापित करेगा। लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा और रोवर उसमें से निकलकर सतह की रासायनिक जांच करेगा।

बता दें कि सोमवार को यान के प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के सभी वैज्ञानिकों को ट्वीट करके बधाई दी थी। उन्होंने लिखा कि ‘चंद्रयान-2 अपने आप में विशिष्ट है क्योंकि यह चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में खोज और अध्ययन करेगा जो किसी विगत मिशन में नहीं हुआ है। मिशन, चंद्रमा के बारे में नई जानकारी उपलब्ध कराएगा।’

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