मुलायम को हटाकर सपा प्रमुख बने अखिलेश

* जवाबी कार्रवाई में ‘नेताजी’ ने राष्ट्रीय अधिवेशन को अवैध बताया

* राम गोपाल, किरणमय नंदा और नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकाला

* अखिलेश खेमे ने शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया

* अमर सिंह को भी पार्टी से निकालने का प्रस्ताव पारित

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में रविवार के समाजवादी पार्टी में जारी घमासन के बीच पार्टी न केवल औपचारिक तौर पर टूट गयी बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उनके पिता मुलायम सिंह यादव के स्थान पर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। दूसरी ओर जवाबी कार्रवाई करते हुए मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रीय अधिवेशन में लिए गये इन फैसलों को अवैध करार देते हुए पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव, उपाध्यक्ष किरणमय नंदा और वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकाल दिया।रविवार को दिन में राम गोपाल यादव द्वारा बुलाये गये राष्ट्रीय अधिवेशन में अमर सिंह को पार्टी से ‘निकाले’ जाने और शिवपाल को उत्तर प्रदेश पार्टी अध्यक्ष पद से हटाये जाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। नंदा ने जहां इस अधिवेशन की अध्यक्षता की वहीं अग्रवाल इसमें मौजूद रहे।

इस फैसले से ‘स्तब्ध’ मुलायम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक पत्र जारी कर इस आकस्मिक राष्ट्रीय अधिवेशन को असंवैधानिक करार दिया और रामगोपाल यादव को फिर 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अधिवेशन राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बुलाया जा सकता। बिना लेटर हेड वाले इस पत्र के अनुसार संसदीय बोर्ड की बैठक में सपा प्रमुख द्वारा गत 28 दिसम्बर को जारी प्रत्याशियों की सूची को अनुमोदित करते हुए बची हुई सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिये मुलायम को अधिकृत किया गया। बहरहालण, सत्ता की यह लड़ाई उस समय और जटिल हो गयी जब मुलायम ने उसी स्थान पर 5 जनवरी को पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने की घोषणा कर दी।

एक दिन पहले मुख्य मंत्री आवास पर पार्टी के 229 में से 200 विधायकों द्वारा अखिलेश के प्रति समर्थन व्यक्त करने तथा इसके बाद उन्हें ‘सर्वसम्मति’ से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने से स्पष्ट हो गया कि पार्टी का संकट फिलहाल खत्म होने वाला नहीं है। पार्टी कैडरों से खचाखच भरे जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित अधिवेशन में अखिलेश को सपा प्रमुख बनाये जाने का तालियों के बीच समर्थन मिला। राम गोपाल यादव ने पार्टी के संस्थापक मुलायम को पार्टी का संरक्षक बनाये जाने और शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव किया जिसे कैडरों ने हाथ उठाकर पारित कर दिया। मंच पर बैठे उन तमाम वरिष्ठ नेताओं ने भी हाथ उठाकर इन प्रस्तावों का समर्थन किया, जो कभी मुलायम के करीबी माने जाते थे।

अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में अखिलेश को यह भी अधिकार दिया गया कि वह सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, संसदीय बोर्ड और देश के सभी राज्यों के संगठनों को आवश्यकतानुसार गठित करें। इस प्रस्ताव की सूचना यथाशीघ्र निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा दी जाए। मुलायम द्वारा असंवैधानिक घोषित इस राष्ट्रीय अधिवेशन में मंच पर मंत्री अहमद हसन, बलवन्त सिंह रामूवालिया, अरविन्द सिंह गोप, रामगोविन्द चौधरी और राजेन्द्र चौधरी समेत ज्यादातर वे नेता मौजूद थे, जो कभी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते थे। मंच पर सपा से बर्खास्त किये गये और अखिलेश के करीबी युवा नेता भी मौजूद थे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने के बाद अखिलेश ने कहा कि वह हमेशा सपा मुखिया का सम्मान करते थे और अब पहले से ज्यादा सम्मान करते हैं। ‘कुछ लोग नेताजी (मुलायम) और पार्टी के खिलाफ साजिश कर रहे थे और बेटा होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती थी कि हम ऐसे साजिशकर्ताओं के खिलाफ खड़ा हो जाएं।’ अखिलेश ने कहा कि जब हम सरकार बनाने जा रहे थे और समाज का हर वर्ग सपा की दोबारा सरकार बनाने का मन बना चुका था, तभी कुछ ताकतें साजिशें करने लग गयीं। अब प्रदेश में जब दोबारा सपा की सरकार बनेगी तो सबसे ज्यादा खुशी नेताजी को होगी।रामगोपाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह पार्टी का आपातकालीन अधिवेशन है। ‘आप सब जानते हैं कि पार्टी और सरकार का काम बहुत ठीक तरीके से चल रहा था और उसी दौरान पार्टी के दो व्यक्तियों ने साजिश करके अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवा दिया और पार्टी में एक संकट पैदा हो गया।’ रामगोपाल ने कहा कि पानी जब सिर से ऊपर निकल गया तब पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग लिखकर दी थी। हमने दो महीने तक सुधार का इंतजार किया। तब यह निर्णय लिया गया कि पार्टी का विशेष आपातकालीन अधिवेशन बुलाया जाए। एजेंसियां

मुलायम की तबीयत बिगड़ी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव द्वारा सपा प्रमुख पद पर कब्जा किये जाने के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में रविवार को देर रात मिली खबरों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव की तबीयत खराब हो गयी है और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। इससे पहले खबर थी कि वे अपने भाई शिवपाल यादव के साथ सोमवार को नयी दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग में याचिका दायर करने जाने वाले हैं। दूसरी ओर यह भी खबर है कि अखिलेश खेमे के रणनीतिकार राम गोपाल यादव भी सोमवार को किरणमय नंदा के साथ निर्वाचन आयोग में अपनी बात रखने जा सकते हैं।

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