चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर सही सलामत मिला – इसरो

Vikram_landing_ISRO

नई दिल्‍ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के बाद चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम पलट गया, उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वह सही सलामत अपने पूर्व निर्धारित जगह के करीब गिरा पड़ा है। साथ ही उन्होंने बताया कि विक्रम का कोई भी भाग टूटा-फूटा नहीं हैं। इसरो के वैज्ञानिक लैंडर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

मालूम हो कि इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवन ने रविवार को बताया था कि चंद्रमा पर विक्रम लैंडर का पता लग चुका है। लैंडर विक्रम चांद की सतह पर अपनी निर्धारित जगह से पांच सौ मीटर की दूरी पर दिखाई दिया है।

एक लूनर डे धरती के 14 दिनों के बराबर
दरअसल, चांद पर अभी लूनर डे चल रहा है। एक लूनर डे धरती के 14 दिनों का होता है। मतलब यह है कि चांद पर अगले 14 दिनों तक दिन रहेगा, उसके बाद रात हो जाएगी, जिसमें पहले ही दो दिन निकल चुका है। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने शनिवार को कहा था कि हम अगले 14 दिन तक लैंडर और रोवर से संपर्क साधने की कोशिशें जारी रखेंगे। वहीं रविवार को चांद का चक्कर काट रहे ऑर्बिटर ने लैंडर की थर्मल तस्वीर भेजी थी।

लैंडर से संपर्क करना आसान नहीं

इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लैंडर से दोबारा संपर्क करना आसान नहीं है और इसकी संभावना भी कम है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की भी कुछ सीमाएं है। हमें भूस्थिर कक्षा में अंतरिक्ष यान, जिनका संपर्क टूट गया हो की बहाली का अनुभव है, लेकिन यहां विक्रम के मामले में बहुत अधिक गुंजाइश नहीं है। वह पहले ही चंद्रमा की सतह पर पलटा पड़ा है और हम उसे फिर से ठीक नहीं कर सकते। इसका एंटीना भी ग्राउंड स्टेशन और ऑर्बिटर की ओर नहीं हैं। ऐसे में इससे संपर्क कर पाना बेहद मुश्किल है।

सात साल तक काम करेगा ऑर्बिटर

इसरो के अधिकारी का कहना है कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम है। इसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में टिके रहेने के हिसाब से बनाया गया है और इसका ईंधन सुरक्षित है। ऐसे में ऑर्बिटर 7 साल तक अंतरिक्ष में काम करेगा।

महज 69 सेकंड पहले संपर्क टूटा था
बता दें‌ कि शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय पृथ्वी से लैंडर विक्रम का महज 69 सेकंड पहले संपर्क टूट गया था। इसके बाद सिवन ने कहा कि भारतीय मिशन लगभग 95 प्रतिशत सफल रहा। आपको चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया।

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