अमित शाह की मौजूदगी में असम में हुआ बोडो समझौता, सुलझा बोडोलैंड विवाद

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नई दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को असम में बोडो संगठनों के साथ शांति के समझौते पर हस्ताक्षर किए । इस समझौते के साथ ही पूर्वोत्तर में एक अलग राज्य बोडोलैंड की लंबे समय से जारी मांग अब थम गई है। दरअसल, नेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन आफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) और अन्य गुटों द्वारा कई दिनों से अलग बोडोलैंड की मांग की जा रही थी लेकिन सोमवार को गृहमंत्री की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत इन संगठनों द्वारा अब बोडोलैंड की मांग नहीं की जाएगी। इसके बदले में सरकार की ओर से कुछ आर्थिक सहायता और अधिकारों का ऐलान किया गया है। इस दौरान एनडीएफबी संगठन के रंजन दैमिरी, गोविंदा बासुमैत्री, धीरेन बोरे और बी. सारोगैरा समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

शाह ने समझौते को बताया सुनहरे भविष्य का दस्तावेज

इस समझौते के तहत बोडो गुटों की मांग को मानते हुए सरकार की ओर से एक अलग विश्वविद्यालय, कुछ राजनीतिक आधार, बोडो भाषा के विस्तार पर विचार किया जा सकता है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज भारत सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के चार समूहों के बीच शांति समझौता हुआ है। यह समझौता सुनहरे भविष्य का दस्तावेज है। यह आंदोलन वर्ष 1987 से जारी है, इस दौरान हुई हिंसा में 2823 नागरिकों की जान चली गई। वहीं, बोडो काडर के 949 लोगों के साथ ही 239 सुरक्षाबल भी मारे गए हैं।

644 उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष किया था आत्म समर्पण

बता दें कि असम के आठ प्रतिबंधित संगठनों से ताल्लुक रखने वाले कुल 644 उग्रवादियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सबार्नंद सोनोवाल के समक्ष गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया था। उसी समय केंद्रीय गृह मंत्रालय और बोडो संगठनों के बीच इस समझौते को लेकर विचार किया गया था। समर्पण करने वाले उग्रवादियों का संबंध उल्फा (I), एनडीएफबी, आरएनएलएफ, केएलओ, सीपीआई (माओवादी), एनएसएलए, एडीएफ और एनएलएफबी से था।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर असम में हुए 5 बम धमाके

गौरतलब है कि इस बड़े समझौते के एक दिन पहले यानि गणतंत्र दिवस के अवसर पर असम में 5 बम धमाके हुए थे। असम के डिब्रूगढ़, चराईदेव और तिनसुकिया में ये धमाके हुए जिनकी जिम्मेदारी उल्फा (I) ने ली थी। हालांकि इन धमाकों में किसी बड़े नुकसान की सूचना अब तक नहीं मिली है। मालूम हो कि लंबे समय से असम में कई संगठनों द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे से ऊपरी हिस्से पर एक अलग राज्य के साथ ही भाषा, संस्कृति और अन्य अधिकारों को लेकर मांग की जा रही थी।

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