आधे घंटे पढ़ने के बाद भी नहीं समझ में आया क्या है याचिका में-चीफ जस्टिस

नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। जनहित याचिका दायर करने पर वकील मनोहर लाल शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि मैंने आधे घंटे याचिका पढ़ी। इसके बावजूद समझ नहीं आया कि आप कहना क्या चाहते हैं। ये किस तरह की याचिका है?

आपकी याचिका कुछ समझ नहीं पाया

सीजेआई ने याचिकाकर्ता वकील को कहा- जनहित याचिका के साथ कोई एनेक्‍सचर नहीं लगाया गया है। मैं आपकी याचिका आधे घंटे से पढ़ने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन कुछ समझ नहीं पा रहा। आपकी प्रेयर क्या है, कुछ पता नहीं। आप कहना क्या चाहते हैं, कुछ पता नहीं? इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि आपकी याचिका ऐसी नहीं है जिस पर सुनवाई की जा सके। आपकी याचिका हम खरिज कर देते, लेकिन ऐसा करने से इस मामले में दायर कई और याचिकाओं पर असर पड़ेगा।

सभी माध्यम दोबारा बहाल करने की अपील

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एसए नजीर की विशेष बेंच याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा के अलावा कश्मीर टाइम्स की एग्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन की याचिका पर भी सुनवाई करेगी। भसीन ने कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट और लैंडलाइन सेवा समेत संचार के सभी माध्यम दोबारा बहाल करने की अपील की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई की थी। पूनावाला ने भी जम्मू-कश्मीर से कर्फ्यू हटाने, फोन-इंटरनेट और न्यूज चैनल पर लगे प्रतिबंध हटाने की भी मांग की थी।

वहां हालात बेहद संवेदनशील

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि राज्य में प्रतिबंध कब तक जारी रहेंगे? सरकार ने कहा कि वहां हालात बेहद संवेदनशील हैं और प्रतिबंध सभी के हित में हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘सुरक्षा एजेंसियां रोज कश्मीर के हालात की समीक्षा कर रही हैं। हमें जमीनी हकीकत के बारे में पता है।’’

राज्य के हालात की हर दिन समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध हटाने के बारे में तत्काल कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया। सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि हम राज्य के हालात की हर दिन समीक्षा कर रहे हैं। वहां खून की एक भी बूंद नहीं गिरी, किसी की जान नहीं गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो हफ्ते के लिए यह कहते हुए टाल दी कि हम देखते हैं वहां क्या होता है? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 2016 में इसी तरह की स्थिति को सामान्य होने में 3 महीने का समय लगा था। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द स्थिति पर काबू पाया जा सके।

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