1500 बाढ़ पी‌ड़ित हाइवे पर रहने को मजबूर, मंत्री बोले- कुछ नहीं कर सकते

1500 people in on highway dividers

मुजफ्फरपुरः बिहार में 1500 लोग 14 जुलाई से एनएच-57 के डिवाइडर पर रहने को मजबूर हैं । इन पीड़ित लोगों के मुसीबत को नजरअंदाज करते हुए आपदा मंत्री ने कहा कि हम कुछ नहीं कर सकते हैं। दरअसल, बिहार के उत्तरी हिस्सों और नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे राज्य के कम से कम छह जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कमला नदी में आयी बाढ़ से बचने के लिए 1500 लोगों को राष्ट्रीय हाइवे (एनएच) पर आकर रहना पड़ रहा है।
एक से बचकर दूसरी मुसिबत में फंसे
बाढ़ पीड़ित लोगों ने करीब 5 किमी के दायरे में झुग्गी बनाकर ठिकाना बना लिया है। सभी लोग झंझारपुर अनुमंडल के हैं। इस नेशनल फोरलेन हाइवे पर रोज हजारों छोटी-बड़ी गाड़ियां दौड़ती हैं। हालां‌कि, ये परिवार बाढ़ से तो बच गए हैं, लेकिन पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले एनएच-57 पर गुजरने वाले तेज रफ्तार वाहनों के बीच आकर फंस गए हैं। थोड़ी-सी चूक बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है। इसके बावजूद प्रशासन ने चुप्पी साध ली है और इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बता दें कि शनिवार को पिकअप वैन की टक्कर से एक पीड़ित बच्चे की जान भी चली गई।
यह किसी और की जिम्मेदारी है-आपदा मंत्री
बाढ़ पीड़ितों के हाइवे डिवाइडर पर रहने के संबंध में आपदा मंत्री लक्ष्मण राय ने कहा- यह एनएच अथॉरिटी की जिम्मेवारी है कि सड़क किनारे थोड़ी-थोड़ी दूरी पर सूचनात्मक पट्टी लगाए। एनएच (नेशनल हाइवे) केंद्र के अधीन है। हम किसी भी प्रकार का निर्देश नहीं दे सकते। इस संबध में कलेक्टर शीर्षत कपिल अशोक ने भी बताया कि राजमार्ग पर बाढ़ पीड़ितों के आने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को स्टॉपर लगाने का निर्देश दिया गया था। साथ ही कलेक्टर ने कहा कि शनिवार को फुलपरास इलाके से आने के दौरान मुझे कहीं भी स्टॉपर नहीं दिखा।
तेजी से लोग कर रहे हैं पलायन
मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। 500 से अधिक घरों में पानी घुस चुका है। इससे नदी किनारे और आसपास के शहरी क्षेत्र समेत कांटी, मुशहरी और बोचहां इलाके में दहशत फैल जाने से लोग तेजी से पलायन कर रहे हैं। प्रशासन ने शहर के शेखपुर ढाब और अहियापुर इलाके से निकलने के लिए 4 नावों की व्यवस्था की है, जो नाकाफी है। कई इलाकों के लोगों ने एक स्कूल परिसर में शरण ले रखी है।

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