राहुल ने पकड़ी जिद, नहीं रहूंगा अध्यक्ष

नई दिल्ली : राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने की जिद पकड़ ली है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद वे अध्यक्ष बने रहना नहीं चाहते। वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल के पद छोड़ने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को पार्टी के नेतृत्व की कमान दी जा सकती है।
अगला अध्यक्ष गांधी परिवार नहीं होगा
राहुल की जिद को देखते हुए कांग्रेस ने गहलोत को नई जिम्मेदारी के लिए तैयार रहने को कहा है। मौजूदा घटनाक्रम से अभी यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि गहलोत को ही सिर्फ अध्यक्ष बनाया जाएगा या फिर उनके अलावा कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर 2-3 पार्टी नेताओं को भी मौका दिया जाएगा। हालांकि यह बात तय है कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष गांधी परिवार नहीं होगा।
पार्टी अपने नए नेतृत्वकर्ता का चयन कर ले
वहीं बुधवार को राहुल गांधी के जन्मदिन पर गहलोत ने उन्हें बधाई दी। साथ ही उन्होंने उनसे देश व जनहित में पार्टी अध्यक्ष बने रहने का अनुरोध भी किया है। सूत्रों की मानें तो तमाम कोशिशों के बावजूद राहुल का कहना है कि नई शुरुआत तभी संभव है जब पार्टी अपने नए नेतृत्व का चयन कर ले।
भाजपा ने लगाया था वंशवाद का अारोप
वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रियंका के नाम का भी पार्टी प्रमुख पद के लिए विचार नहीं होगा। लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाते हुए उसे घेरा था। चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा इसलिए राहुल गांधी चाहते हैं कि गांधी परिवार से इतर पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता को अध्यक्ष पद की कमान सौंप दी जाए ताकि वंशवाद का मुद्दा हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
इसलिए गहलोत के नाम को दी जा रही है प्रमुखता
अध्यक्ष पद के लिए गहलोत के नाम को प्रमुखता देने के कई कारण हैं। पहला कारण है कि गहलोत संगठन के संचालन के पुराने अनुभवी नेता हैं। दूसरा कारण है कि कांग्र्रेस राजस्‍थान में पार्टी के अंदर हो रही गुटबाजी को खत्म करना चाहती है। यदि गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जाती है तो राजस्‍थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा जिससे पार्टी के असंतुष्ट खेमा भी शांत हो जाएगा। एक और बड़ा कारण यह है कि गहलोत पिछड़ी जाति से आते हैं ऐसे में पार्टी को अपने खोये जनाधार को फिर से वापस लाने में सफलता मिलेगी। राहुल और सोनिया से नजदीकी और अन्य पार्टी नेताओं के साथ सामंजस्य भी गहलोत के पक्ष में जाती है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों में गहलोत के कारण कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था।

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