निजी पेशेवर संभालेंगे रेलवे के प्रचार अभियान की जिम्मेदारी

नई दिल्ली : भारतीय रेल यात्रियों की सुविधाओं में लगातार इजाफा कर रही है, साथ ही अपने प्रचार पर भी जोर दे रही है। रेलवे ने मौजूदा अभियान की जगह अब इसे नया रूप देने का फैसला लिया है। इसके तहत वह जल्द ही निजी पेशेवरों की सहायता लेने जा रही है। ये पेशेवर रेलवे की सुविधाओं और योजनाओं का बेहतर तरीके से प्रचार प्रसार करेंगे।

निजी पेशेवरों को नियुक्त करने का फैसला लिया

रेलवे ने नए तरीके से अपने प्रचार के लिए 17 निजी पेशेवरों को नियुक्त करने का फैसला लिया है। हर जोन के लिए अलग पेशेवरों की टीम होगी। साथ ही हर टीम के को निर्देश देने के लिए एक टीम लीडर भी होगा। प्रत्येक टीम में सोशल मीडिया मैनेजर, कंटेंट एनालिस्ट, कंटेंट राइटर और वीडियो एडिटर के अलावा तकनीकी विशेषज्ञ भी होंगे। टीम का काम रेलवे के प्रमोशन के लिए छोटी वीडियो क्लिप तैयार करना, आकर्षक पोस्ट तैयार करना, उसे अलग-अलग माध्यमों से अपने लक्षित यात्रियों तक पहुंचाना होगा। रेलवे का अनुमान है कि हर साल प्रत्येक टीम पर दो करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

नई टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संभालेंगी
इस संबंध में रेलवे के एक अधिकारी की मानें तो फिलहाल रेलवे अपने प्रचार अभियान को निजी एजेंसियों के जरिए संचालित कर रही है। उनका कहना है कि निजी पेशेवरों की नियुक्ति हो जाने के बाद नई टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार अभियान को संभाल लेंगी। साथ ही टीमें रेलवे की खबरों के कवरेज में मीडिया की सहायता भी करेंगी और मीडिया में आई रिपोर्ट्स का भाा आकलन करेंगी।

हर महीने और तिमाही में देनी होगी रिपोर्ट

रेलवे अधिकारी ने बताया कि टीम को यदि सोशल मीडिया के जरिए यात्रियों से रेलवे से जुड़ी किसी तरह की शिकायत मिलती है तो ये उसको भी दूर करने में मदद करेंगी। उन्होंने बताया कि इन टीमों को हर महीने और तिमाही पर अपने कामकाज की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को देनी होगी।

प्रचार सामग्री पेश करने की रणनीति भी तय करेंगे

रेलवे अधिकारी के अनुसार फिलहाल प्रचार का काम रेलवे से जुड़े अधिकारी देख रहे हैं। इन अधिकारियों के पास सोशल मीडिया से जुड़े विशेष अनुभव नहीं होते हैं। उनके मुताबिक निजी पेशेवर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि पर प्रचार सामग्री को पेश किए जाने की रणनीति भी तैयार करेंगे।

हर जोन में एक डैशबोर्ड भी लगया जाएगा

हर जोन में एक डैशबोर्ड भी लगया जाएगा ताकि रेलवे से जुड़ी खबरें, लेख, और टेलीविजन पर चलने वाली वीडियो क्लिप ऑनलाइन माजूद होंगी। रेलवे अधिकारी के अनुसार इन डैश बोर्ड्स का निर्माण भी जोन की टीम को ही करवाना होगा। एक डैशबोर्ड के निर्माण में हर टीम को तीन से पांच लाख रुपए तक का खर्च आने की संभावना है।

गौरतलब है कि रेलवे के प्रचार अभियान 18 जोन में संचालित किए जा रहे हैं जिसके तहत 70अधिकारी काम कर रहे हैं। पूरे अभियान को लेकर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी  (सीपीआरओ) दिशानिर्देश जारी करते हैं। निजी पेशेवरों की नियुक्ति के बाद वे अपने-अपने जोन की रिपोर्ट सीपीआरओ को देंगे।

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