मेरी मातृभाषा गुजराती है और हिंदी मेरी मौसी है : आरजे वशिष्ठ

कोलकाताः “कोलकाता से मेरा नाता काफी पुराना है। सिटी ऑफ जॉय कहे जाने वाले इस शहर का नाम ही इतना प्यारा है तो इस जगह से प्यार होना तय है। इतिहास और आधुनिकता से घिरे इस शहर में करने के लिए बहुत कुछ है। इस बेहतरीन तालमेल को देखने के लिए कोलकाता में कुछ समय जरूर बिताना चाहिए। इसलिए जब मैं यहां आया हूं तो जी भरके इस शहर का मजा लूंगा।” उक्त बातें कहीं सन्मार्ग से खास बातचीत के दौरान आरजे वशिष्ठ ने।
आपको वाद-संवाद का हिस्सा बनकर कैसा लग रहा है ?
यह मेरे लिए वाकई गर्व की बात है कि सन्मार्ग ने मुझे यह अवसर दिया कि मैं वाद-संवाद में हिस्सा लूं। मुझे वाद-संवाद के दौरान अपने प्रशंसकों से सीधे तौर पर रूबरू होने का अवसर मिलेगा। मैं इसके लिए शनिवार की शाम का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
आपका हर कंटेंट दिल छू जाता है, रोजाना आपको नये आइडियाज़ कहां से मिलते हैं?
दिल को आप तभी छू सकते हो जब आपके दिल ने वो टीस छुई हो, यानी यदि आपके दिल ने ऐसा महसूस किया हो तभी आप ऐसा लिख सकते हैं। मेरी जिंदगी में और मेरी कविताओं के साथ भी कुछ ऐसा ही है। मैं जो भी लिखता हूं उसमें 70 फीसदी बातें आजमाइश वाली होती हैं बाकी की 30 फीसदी बातें नजरिए वाली होती हैं।
क्या आप रियल लाइफ में भी कूल हैं?
एक इंसान के कई प्रकार के रंग होते हैं। मैं ज्यादातर समय हैप्पी गो लकी ही रहता हूं।
क्या आप ‘तो क्या हुआ’ पर विश्वास करते हैं?
जी हां, मैं ‘तो क्या हुआ’ में पूर्ण विश्वास करता हूं। दरअसल ये सोच किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है। अगर आप जीवन की हर कठिनाई को भूलकर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प लें लेते हैं तो आपको हर रास्ता आसान दिखने लगेगा।
भाषा के स्तर पर आप हिंदी को किस रूप में देखते हैं?
मेरी मातृभाषा गुजराती है और हिंदी मेरी मौसी है। हिंदी के बारे में जितना कहूं वो कम है। हिंदी के जरिये हम लाखों लोगों तक अपनी दिल की बात पहुंचा सकते हैं।
हिंदू बोले हिंदी को लेकर आप क्या कहेंगे?
जो व्यक्ति जो भाषा अच्छे से बोले वह भाषा उसकी है।
आपके हिसाब से हिंदुइज्म क्या है?
जब हमारा जन्म हुआ था, तब हमने यह नहीं सोचा था कि हम किसके घर में, किस धर्म के लोगों के घर जन्म लेने वाले हैं। किसी भी धर्म का अनुसरण करना हमारे हाथ में नहीं था। मेरे हिसाब से हिंदुइज्म का मतलब है जिंदगी जीने ‌का तरीका।
युवाओं के लिए संदेश
अंग्रेजी भले ही यूनिवर्सल भाषा बन गई है। हमें लगता है कि जो अंग्रेजी बोलता है वो बहुत कूल होता है, लेकिन हमें इस सोच से निकलना होगा। हमें हिंदी के लिए स्टैंड लेना पड़ेगा। आप जिस भाषा में भी बात करें आपको एक अपनापन सा लगना चाहिए चाहें वो कई भाषाओं में हो, आपको हिचकिचाने की जरूरत नहीं है।
कोलकाता में आपको कहां-कहां घूमने का मन है?
मैंने यहां प्रिंसेप घाट के बारे में बहुत सुना है। मैं यहां जरूर जाना चाहूंगा। मुझे हावड़ा ब्रिज पर जाने का भी काफी मन है।
सन्मार्ग के बारे कुछ कहें
सन्मार्ग मतलब सत्य की राह। सन्मार्ग अपने आप में ही एक बहुत बड़ा मंच है जहां लोगों को सच्चाई से रूबरू होने का अवसर मिलता है। मैं आशा करता हूं कि सन्मार्ग आने वाले समय भी लोगों को सत्य की राह पर ले जाएगा। सन्मार्ग मेरे लिए मैचमेकर है क्योंकि आज सन्मार्ग के वाद-संवाद के कारण ही मैं यहां आ सका हूं और अपने प्यार कोलकाता से रूबरू हो सका हूं।

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