मैं वही करती हूँ जिसमें मुझे विश्वास भी होता है-कृतिका कामरा

कृतिका कामरा ,’तांडव ” शो में हाल ही में अमेज़न प्राइम में नजर आयी। इस शो में ढेर सारे कलाकार हैं। सैफ अलीखान और डिंपल कपाड़िया जो इस पोलिटिकल ड्रामा शो से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपना डेब्यू कर रही हैं। शो में कृतिका कामरा स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स कर रही हैं लेकिन उनका किरदार कैसे ट्विस्ट लेता है यह सब उन्होंने बहुत ही बेहतरीन तरह से निभाया है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के मुख्य अंश-
अमेज़न प्राइम पर हाल ही में रिलीज़ शो ‘तांडव’ के बारे मेंआपको क्या कहना है ?
आपने यदि शो देखा है तो आप जान गए होंगे कि तांडव एक बेहतरीन पोलिटिकल ड्रामा है। जैसा कि शो में दिखाया गया है यह नेशनल पॉलिटिकस एवं स्टूडेंट्स पॉलिटक्स को दर्शाता हुआ बहुत ही इंटेस शो है। सना मीर मेरा किरदार मुझे करने में, जाहिर सी बात है अलग किरदार था, तो बहुत ही मजा आया। उसका कैरेक्टर थोड़ा कॉम्प्लेक्स था। उसकी जानकारी हासिल करना उसका कनफ्लिक्ट और फिर जब अंत में वह किस तरह अपने कैरेक्टर में नजर आती है यह सब करने में थोड़ा बहुत काम करना पड़ा लेकिन मुझे इस किरदार कुछ सीखने को भी मिला। इस किरदार में बहुत सारी परतें देखने को मिलती हैं, उस तरह से किरदार को निभाना भी था मुझे।
पोलिटिकल ड्रामा किया, अनुभव कैसा रहा और पॉलिटिक्स को कैसे देखती हैं आप?
मैं राजनीति में क्या कुछ रहा होता है, उससे अवगत रहना चाहती हूँ, सो देश की पॉलिटिक्स के बारे में जानकारी तो जरूर रखती हूँ। राजनीति का विषय मेरे लिए कुछ नया नहीं है। वैसे भी हम भारतीय राजनीति से जुड़े रहते हैं। बस इस शो से मालूम होता है पावर की चाहत लोगों में भरपूर होती है और उस चाहत को साकार करने में किस तरह के पोलिटिकल गेम्स खेलने होते हैं, यह सब इस शो में दिखाया गया है और लोगों को पसंद भी आ रहा है यह शो। इस बात की हम सभी को खुशी भी है।
रियल लाइफ में आपके अंदर पावर की भूख कितनी तीव्र है ?
ना तो शो में मेरे मन में ऐसा कुछ है। और रियल लाइफ में भी भी मै कभी किसी सीट या चेयर की लाड़याई नहीं लड़ना चाहती हूँ। सो मुझे पावर हंगरी बोलना गलत होगा।
ग्लिट्ज़ और ग्लैमर की दुनिया में भी आप स्लो एंड स्टैडी अपने काम में निपुणता दिखाती रही हैं ?
जी हाँ, मैंने कभी किसी भी कॉम्पिटीशन में विश्वास नहीं किया है। और न ही किसी प्रेशर में काम करना पसंद किया है। बस सर नीचे रख कर अपना काम ही किया है। मैं संतुष्ट हूँ मुझे जो कुछ काम मिला है।
आपका टेलीविजन शो,” कुछ तो लोग कहेंगे ‘ बहुत चला था और फेमस भी हुआ था क्या कहना चाहेंगी ?
जी हाँ कुछ तो लोग कहेंगे एक आइकोनिक शो रहा। आज भी मेरे फैंस उस शो को लेकर मुझे सोशल मीडिया पर रहते हैं। यह शो पुरुषों भी बेहद पसंद आया था जबकि लोगों का ऐसा मानना है की पुरुष लोग टेलीविजन शव नहीं देखते। यह बात मुझे तब पता चली जब में रास्ते पर चला करती थी तब कई पुरुष मेरी ओर देखे बोलते देखो यह निधि डॉ. का रोल करती है ,”कुछ तो लोग कहेंगे में.बस ख़ुशी होती है कि लोगों को मेरा शो अच्छा लगा। यह शो मेरे लिए और मेरे चाहने वालों के लिए स्पेशल शो है।
सभी लोगों को लग रहा है स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स जेएनयू से जुड़ी हुई राजनीति है?
जी नहीं, यह एक काल्पनिक कहानी है। क्योंकि यह शो नेचुरल पॉलिटिक्स और यूनिवर्सिटी कॉलेज पॉलिटिक्स को दर्शा रहा है। सो लोगों को जे एन यू से जुड़ाव लग रहा है। पर ऐसा कुछ नहीं है। मेरे बहुत सीन्स ज़ीशान और डिनो (मोरियो) के साथ हैं मेरे कुछ उलझे हुए समीकरण हैं शो में किंतु वे बहुत ही साधारण और सुलझे हुए एक्टर हैं, सो सब सीन्स बहुत ही अच्छी तरह शूट हो गए। उनके साथ काम करने में बहुत मजा भी आया।
क्या आगे चलकर आप कभी राजनीति ज्वाइन करना चाहेंगी?
मुझे नहीं लगता मुझे राजनीति ज्वाइन करने की आवश्यकता भी है। हमें जो कुछ भी अपने देश की लिए करना होगा, हम अपने साधारण ढंग से कर सकते हैं। राजनीति में कि कुछ चल रहा है उस के बारे में मुझे सारी जानकारी रहती है। हम सभी इस स्वतंत्र भारत में अपने ढंग से जी सकते हैं। मैं अपने सोशल मीडिया पर जो कुछ भी लिखना चाहती हूँ लिखती भी रहती हूँ। अपने विचार समय समय पर जाहिर करती हूँ सोशल मीडिया पर। किंतु सक्रिय रूप से पॉलिटिक्स से नहीं जुड़ना चाहती हूँ। बतौर अभिनेत्री काम करते हुए बहुत खुश हूँ। एक्टर होने की वजह से मैं अलग-अलग किरदार कर बहुत आनन्दमय फील करती हूँ। मैं वही करती हूँ जिस में मुझे विश्वास भी होता है।-लिपिका वर्मा

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