बंगाल के राजनीतिक मैदान में भोजपुरी गीत का तड़का लगायेंगे खेसारी

प्रीति यादव
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभूतपूर्व होने वाला है। यह किसी भविष्यवक्ता की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि जनता की आवाज है। राजनीतिक पार्टियां पूरे जोर-शोर से मैदान में उतर रही हैं। वहीं इस चुनाव में हिन्दी भाषी मतदाताओं को रिझाने के लिए भोजपुरी तड़का भी लोगों को देखने को मिलेगा।
हम यहां बात कर हैं भोजपुरी जगत के जाने-माने अभिनेता या फिर यूं कहें ​सिंगर खेसारी लाल यादव की। खेसारी लाल यादव का इस चुनाव में अहम रोल होने वाला है। हालांकि अभी तक उन्होंने यह खुलासा नहीं किया है कि वह किस पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। सन्मार्ग कार्यालय पहुंचे खेसारी लाल यादव से सन्मार्ग ने खास बातचीत की। पेश हैं खेसारी लाल यादव से हुई बातचीत के मुख्य अंश:
बिहार के चुनाव में आपने प्रचार में हिस्सा लिया था, क्या आप राजनीतिक में भी दांव आजमाने वाले हैं ?

बिहार चुनाव में मैं जहां भी गया हूं वहां मुझे लोगों का प्यार मिला है। यह मेरी जीत नहीं बल्कि उन लोगोें की जीत है, जिन्होंने एक अच्छे इंसान को चुना है। जहां तक बात चुनाव प्रचार की है तो मैं किसी पार्टी का आदमी नहीं हूं। मेरी विचारधारा जिससे मिलती है और जिसकी विचारधारा में मैं आता हूं वही मेरे लिए सब कुछ है, उसमें मेरे अपने भी होते हैं और गैर भी।
मेरे लिए सारी पार्टियां बराबर हैं। सभी पार्टियां हमारे लिए एक परिवार की तरह हैं। एक कलाकार होने के नाते हमारे लिए पार्टी मायने नहीं रखती, वह इंसान मायने रखता है जिसके लिए हम काम करते हैं क्योंकि पार्टी आज है कल नहीं रहेगी, लेकिन जनता हमेशा आपके साथ रहेगी। वैसे भी मैं राजनीति में नहीं हूं पर मेरे पास लोगों का प्यार है।
खेसारी लाल यादव के संघर्ष पर एक नजर


खेसारी लाल यादव आज भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम है। वे भोजपुरी सिनेमा के एक ऐसे सितारे हैं जिनकी फैन फॉलोइंग भी काफी लंबी है। थियेटर से लेकर छोटे पर्दे तक पर उनकी फिल्में काफी देखी जाती हैं। इसके अलावा लोग उनके गाए गए गानों को भी खूब सुनते हैं और उनकी एक झलक पाने को बेताब रहते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि एक साधारण इंसान से भोजपुरी सिनेमा का सुपरस्टार बनने तक का उनका सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। खेसारी लाल यादव ने अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी झेली है लेकिन मेहनत करने से पीछे नहीं हटे। उन्होंने बिहार से दिल्ली आकर दूध बेचने का काम भी किया और आज वह जिस मुकाम पर हैं अपने कठोर परिश्रम के कारण ही है।
‘संघर्ष की कहानी ही इतिहास रचती है’

देखिये मेरे जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव आये हैं और बहुत सारी प्रॉब्लम भी आई हैं। मुझे लगाता है कि मेरी प्रॉब्लम ही मेरा हथियार हैं। अगर यह प्रॉब्लम नहीं आते तो आज मैं आपके सामने नहीं होता। एक समय ऐसा था जब मेरे पास बंगाल आने के लिए भी पैसे नहीं थे। मैं जनरल टिकट कटाकर आता था। यहां तक कि खुद की पढ़ाई भी अपने खर्च से करता था। मेरे संघर्ष की कहानी यहीं नहीं रुकी।
दूध बेचा और नौकरी भी की

संघर्ष काल में मैंने दूध भी बेचा और अभिनेताओं के घर में नौकर का काम भी किया है। पर इन सब से निकल आज मैं इस मुकाम पर हूं जहां आज मैं अपने बच्चों को अपनी संघर्ष की कहानी सुना सकता हूँ। शायद मैं एक संभ्रांत घर से होता तो मेरी कोई कहानी नहीं होती और मेरा यह मानना है कि जिसकी कहानी होती है वही इतिहास रचता है।
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