इरफान खान फिल्‍मों में न होते तो….

आखिरी ट्वीट

इरफान को आखिरी बार फिल्म अंग्रेजी मीडियम में देखा गया था, जिसमें उनके साथ राधिका मदान और करीना कपूर थीं। हालांकि, लॉकडाउन के कारण ये फिल्म सिनेमाघरों में नहीं चल पाई। इरफान ने अपने निधन से करीब एक महीने पहले आखिरी ट्वीट किया था, जो इस फिल्म को लेकर ही था। फिल्म अंग्रेजी मीडियम में अपने किरदार का एक फोटो शेयर करते हुए इरफान ने लिखा था, ”मैं अंदर से बहुत इमोशनल हूं लेकिन बाहर से खुश हूं. ” उन्होंने ट्रवीट में लिखा, ”मिस्टर चंपक की मन स्थिति अंदर से प्यार करता है, जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि यह बाहर भी वैसा ही है.’ इरफान का ये आखिरी ट्वीट 12 अप्रैल 2020 का है।

सचिन के साथ खेल रहे होते इरफान!

राजस्थान के टोंक जिले के पास खजरुइया गांव में पैदा हुए इरफान खान के पिता एक जमींदार थे। उनके पास बहुत पैसा था लेकिन इसके बावजूद इरफान खान पैसों की कमी के चलते क्रिकेट में अपना करियर नहीं बना सके । इरफान खान का ख्वाब था कि वो देश के लिए क्रिकेट खेलें लेकिन उनका यह सपना पिता की वजह से पूरा नहीं हो पाया।

इरफान खान का चयन अंडर 23 सीके नायडू ट्रॉफी के लिए हो गया था लेकिन पैसों की कमी के चलते वो इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सके। इरफान खान के पिता चाहते थे कि वो उनका खानदानी बिजनेस करें। उनके पिता का टायर का बिजनेस था। जब सीके नायडू ट्रॉफी में खेलने का मौका उनके हाथ से चला गया तो उन्होंने क्रिकेटर बनने का ख्वाब भी छोड़ दिया। अगर इरफान खान को उस वक्त पैसे मिल जाते और वो अंडर 23 सीके नायडू ट्रॉफी खेलते तो हो सकता है कि वो टीम इंडिया में सचिन के साथ खेल रहे होते।

स्टार बनने के बाद क्रिकेट देखना छोड़ा

बता दें जिस क्रिकेट से इरफान खान बहुत प्यार करते थे, उसे उन्होंने फिल्म देखने के बाद छोड़ दिया था. इरफान खान ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि क्रिकेट अब उन्हें इसलिए पसंद नहीं क्योंकि उसमें बहुत ज्यादा लड़ाइयां होती हैं. इरफान खान ने कहा था कि क्रिकेट का मैदान अब WWF का मैदान बन चुका है.

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32 साल के करियर में इरफान ने कुछ ऐसी फिल्में की हैं जो मील का पत्थर साबित हुईं। खास बात है कि इरफान को ‘पान सिंह तोमर’ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अभिनय की कला के महारथी कहे जाने वाले इरफान खान की आज हम आपको 10 उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताएंगे जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

मकबूल (2003)

विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इरफान ने मकबूल का मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी में मकबूल एक अंडरवर्ल्ड डॉन अब्बा जी (पंकज कपूर) का भरोसेमंद आदमी है। वह अब्बा जी के यहां काम करने वाली एक नौकरानी निम्मी (तब्बू) से चुपचाप प्यार करता है। वह मकबूल को अब्बा जी खिलाफ भड़काती है और मकबूल अब्बा जी का कत्ल कर देता है। इरफान के किरदार में अकस्मात बदलाव फिल्म की गति के हिसाब से अद्वितीय लगता है।

पान सिंह तोमर (2012)

भारतीय राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाला पान सिंह तोमर चम्बल का मशहूर डाकू कैसे बन जाता है? यह फिल्म उस डाकू की आदि से अंत तक की पूरी सच्चाई को बयां करती है। तिग्मांशु धूलिया ने पान सिंह तोमर के किरदार में पर्दे पर इरफान को पेश किया। मध्य प्रदेश की भाषा और बोली को फिल्म में जब इरफान बोलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे इरफान उसी परिवेश में पले बढ़े हैं। इस फिल्म के लिए इरफान को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है।

लाइफ ऑफ पाई (2012)

इरफान ने जितनी पहचान हिंदी सिनेमा में बनाई है, उससे ज्यादा इज्जत उन्होंने हॉलीवुड में कमाई है। ताईवान के निर्देशक आंग ली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इरफान एक लेखक को अपनी जीवनी सुनाते हुए नजर आते हैं। इरफान अपनी कहानी बचपन से शुरू करते हैं, और किशोरावस्था की उस घटना का विस्तार से वर्णन करते हैं, जिसमें उन्होंने एक नाव पर लंबा समय एक शेर के साथ बिताया। खुद भूखे पेट रहकर एक भूखे शेर के साथ एक नाव पर रहना स्थितिक तौर पर आत्महत्या जैसा आभास कराता है।

साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स (2013)

तिग्मांशु की बेहतरीन फिल्मों में से एक इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इरफान ने इस फिल्म में उजड़ी हुई रियासत के लुटे हुए सुल्तान इंद्रजीत सिंह का किरदार निभाया है। वह अपनी खोई हुई विरासत को वापस पाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है, जिसको आदित्य प्रताप (जिमी शेरगिल) के पुरखों ने बर्बाद कर दिया है। यह फिल्म नफरत, प्यार, धोखा, वासना आदि का भरपूर डोज देती है।

लंच बॉक्स (2013)

लंच बॉक्स यानी दोपहर के खाने का डब्बा। एक डब्बे की अदला बदली से प्यार पनपने की कहानी सुनने में अजीब लगेगी, लेकिन विस्तार से देखने पर आप भी भावनाओं में बह जाएंगे। इरफान की फिल्में कमाई कम करती हैं, तारीफें ज्यादा पाती हैं। जब तक हिंदी मीडियम नहीं रिलीज हुई थी, तब तक यही फिल्म उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।

तलवार (2015)

देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में हुए आरुषि तलवार और उनके नौकर हेमराज के मर्डर केस की चर्चाएं तो अभी तक होती हैं। इस केस को पर्दे पर ‘राजी’ और ‘छपाक’ जैसी चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर फिल्में बनाने वाली निर्देशक मेघना गुलजार ने उतारा। इरफान ने इस फिल्म में केस की छानबीन करने वाले सीबीआई अफसर अश्विन कुमार का किरदार निभाया है।

मदारी (2016)

निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी इस फिल्म के मदारी कोई और नहीं बल्कि खुद इरफान खान हैं। वह भारतीय सेना और सीबीआई को अपने डमरू की धुन पर ऐसा नचाते हैं कि उनका छोटा सा संदेश पूरे भारत में खुद ब खुद फैल जाता है। एक पुल के ढह जाने पर निर्मल कुमार (इरफान खान) के बेटे अपू की जान चली जाती है। अपने बेटे की मौत पर निर्मल अपना आप खो देता है। सिस्टम को सबक सिखाने के लिए वह गृहमंत्री के बेटे का अपहरण करता है।

हिंदी मीडियम (2017)

इरफान की अब तक की सबसे सफल फिल्म यही है। साकेत चौधरी के निर्देशन में बनी यह फिल्म कॉमेडी से भरपूर है, लेकिन एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश देती है। एक पैसे वाला इंसान अपने पैसे के दम पर अनजाने में न जाने कितने गरीबों का हक छीन लेता है। यह इस फिल्म में बहुत सादगी से बताया गया है। फिल्म के सारे सीन आपको अपने जैसे ही लगेंगे।

करीब करीब सिंगल (2017)

हिंदी मीडियम में स्कूलों की खराब व्यवस्था के साथ एक कहानी और समानांतर चलती दिखती है, जिसमें पति-पत्नी की एक प्रेम कहानी होती है। इस कहानी को विस्तार से देखने के लिए ये फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए। तनुजा चंद्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म की प्रेम कहानी किसी भी बेहतरीन प्रेम कहानी वाली फिल्म को बौना साबित करने की ताकत रखती है।

कारवां (2018)

दो लाशों की अदला बदली से शुरू हुई इस फिल्म की कहानी कब नए रिश्ते जोड़ देती है, किसी को कुछ पता ही नहीं चलता। शौकत के किरदार में एक ड्राइवर बनकर इरफान बहुत हंसाते और ज्ञान देते हैं। वैसे तो हर फिल्म में उनका एक नया ही रूप दिखाई देता है। उनका ये रूप एकदम अलग ही था। पूरी फिल्म रोड पर एक तेज गाड़ी के जैसे ही दौड़ती है।

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