निर्देशक श्याम रामसे ‘सामरी’ का निधन, फिल्म जगत में शोक

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मुंबई : ‘पुरानी हवेली’ और ‘तहखाना’ जैसी हॉरर फिल्मों के लिए चर्चित सात ‘रामसे ब्रदर्स’ में से एक निर्देशक श्याम रामसे के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है। 67 वर्षीय श्याम ने बुधवार को मुंबई के एक अस्पताल में तड़के 5 बजे आखिरी सांस ली। वह न्यूमोनिया से पीड़ित थे।

भय पैदा करने वाले रामसे बंधु काफी विनम्र : रजा मुराद

दिग्गज अभिनेताओं रजा मुराद और पुनीत इस्सर समेत कई कलाकारों ने श्याम के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें एक ‘विनम्र’ व्यक्ति करार दिया। रामसे बंधुओं के साथ 2006 में फिल्म ‘फैमिली: टाइस ऑफ ब्लड’ में काम करने वाले मुराद ने कहा कि दर्शकों के दिलों में भय पैदा करने वाले रामसे बंधु काफी विनम्र हैं।

क्षमतावान तकनीशियन थे श्याम : पुनीत इस्सर

रामसे बंधुओं की फिल्म ‘पुराना मंदिर’ में काम कर चुके इस्सर ने श्याम को ‘क्षमतावान तकनीशियन’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘पुराना मंदिर उस समय की सबसे कामयाब हॉरर फिल्मों में से एक थी। श्याम जी यह कला बहुत अच्छी तरह से जानते थे। रामसे बंधु बहुत पहले हॉरर फिल्में बनाना शुरु कर चुके थे और मैंने 80 के दशक में उनके साथ ‘पुराना मंदिर’ में काम किया।’ उन्होंने कहा कि ”श्यामजी बहुत मृदुभाषी और कम बोलने वाले व्यक्ति थे। वह और तुलसी साथ में निर्देशन किया करते थे। उनमें गजब की स्पष्टता थी। मेरे उनसे बहुत अच्छे संबंध थे। यह सच में बहुत बड़ी क्षति है।’

कम बजट में बनाते थे हॉरर फिल्में

श्याम रामसे के परिवार में उनकी दो बेटियां साशा और नम्रता हैं। श्याम भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों की वजह से लंबे समय तक एक खास जगह रखने वाले रामसे ब्रदर्स में से एक थे। रामसे ब्रदर्स ने साल 1970 और साल 1980 के दशक में कम बजट में हॉरर फिल्में बनाईं जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।

कराची रेडियो दुकान से शुरू हुआ था इनका सफर

माना जाता है कि इन हॉरर फिल्मों के पीछे असली सोच श्याम रामसे की होती थी। उन्होंने ‘दरवाजा’, ‘पुराना मंदिर’, ‘वीराना’ और ‘द जी हॉरर शो’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया था। रामसे बंधुओं के यहां तक पहुंचने की कहानी अविभाजित भारत के कराची में रेडियो की एक छोटी सी दुकान से शुरू होती है। विभाजन के बाद दुकान के मालिक फतेहचंद यू रामसिंघानी मुंबई आ गए और फिल्म निर्माण में हाथ आजमाने का फैसला किया।

ऐसे बने रामसिंघानी से ‘रामसे ब्रदर्स’

रामसिंघानी ने ही अपने नाम के आगे ‘रामसे’ लगाया और इसके बाद उन्होंने ”शहीद-ए-आजम भगत सिंह” (1954) और ”रुस्तम सोहराब” (1963) का निर्माण किया जिसमें पृथ्वीराज कपूर और सुरैया ने अभिनय किया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर खूब जादू बिखेरा और रामसिंघानी एक-एक करके अपने सातों बेटों कुमार, तुलसी, श्याम, केशु, किरन, गांगुली और अर्जुन को फिल्म निर्माण में ले आए और फिर उनकी पहचान ‘रामसे ब्रदर्स’ के रूप में हुई। हालांकि उन्हें पृथ्वीराज कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा अभिनीत ‘एक नन्ही मुन्नी सी लड़की’ (1970) की असफलता से नुकसान उठाना पड़ा।

भूत बनकर मशहूर हुए सामरी

इस असफलता के बाद सभी भाईयों ने मिलकर हॉरर फिल्म ‘दो गज जमीन के नीचे’ (1972) का निर्माण किया। फिल्म खूब चली जिससे सभी भाइयों के अलावा भारतीय हॉरर फिल्म उद्योग को भी फायदा हुआ। बॉलीवुड में विलेन और भूत के किरदार से मशहूर हुए ‘सामरी’ ने 70 और 80 के दशक में रामसे ब्रदर्स की हर भूतिया फिल्मों में भूत बनकर बहुत जलवे बिखेरे।

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