सूरजमुखी कहां से आयी

बहुत समय पहले की बात है। उस दिनों  सूरज स्वर्ग में रहता था, इसलिए पृथ्वी पर बहुत ठंड होती थीं। सूरज की एक बेटी थी,जो बहुत शरारती थी। वह कभी -कभी सैर करने के बहाने पृथ्वी पर आ जाती थी।  एक दिन वह आयी तो पृथ्वी के सभी लोग कहीं  भागे जा रहे थे। … ‘क्या बात ही ?’उसने पूछा। … ‘ठंड लग रही है। भागने से ठंड कुछ कम हो जाती है’ भीड़ में से किसी ने जवाब दिया। यह सुनकर सूरज की बेटी हंस पड़ी। तब किसी ने उससे कहा –‘सूरज हमें आग नहीं देता। तुम चोरी करके थोड़ी सी आग ला दो ताकि हमारी ठंड दूर हो सके। ‘
‘नहीं मैं  चोरी नहीं कर सकती। ‘… सूरज की बेटी ने कहा और चली गयी। फिर एक दिन आयी तो एक स्त्री को अपने बच्चे को पीटते देखा ,तो उसने पूछा –‘क्या आपका बेटा शैतानी कर रहा है, जो आप पीट रही है ?’
‘नहीं इसे ठंड लग रही है। पीटने से इसके शरीर में कुछ गर्मी आ जाएगी।’ उस स्त्री ने जवाब दिया।
यह सुनकर सूरज की बेटी फिर हंस पड़ी और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गई। कुछ दूर जाने पर उसने देखा कि एक पीपल के पेड़ के नीचे एक नौजवान उदास-सा बैठा हुआ है। तो उससे पूछे बगैर रहा नहीं गया कि  –‘क्या हुआ?’…
‘ठंड लग रही है ‘-नौजवान ने रोष भरे स्वर में उत्तर दिया। फिर शिकायती लहजे में बोलने लगा –‘आदमी की आधी जिंदगी तो ठंड से बचने की कोशिश में गुजर जाती है। देवता ऊपर बैठे देखते रहते हैं, सूरज को भी तनिक न लाज आती है, न दया आती है।’
इसपर उसने पूछा –‘तुम स्वर्ग चलोगे ?’….. ‘नहीं ‘नौजवान ने कहा। —‘क्यों ‘?वहां सूरज है, वहां ठंड भी नहीं है ‘… सूरज की बेटी बोली।
नौजवान बोला -‘मेरे भाई-बहन और दूसरे लोग यहाँ रहेंगे तो  मैं अकेला वहां क्या करूंगा ?’…
‘वहां मैं रहूंगी न तुम्हारे साथ। ‘सूरज की बेटी बोली। इसपर युवक ने कहा –‘तुम ही क्यों नहीं रह जाती यहां ?’..  सूरज की बेटी सोचने लगी। दूसरे दिन सूरज सोया हुआ था तो उसकी बेटी ने थोड़ी सी आग चुरायी और पृथ्वी पर आकर उस नौजवान को दे दी। पृथ्वी पर गर्मी हुई फिर  लोग जोश में काम करने लगे। उधर जब सूरज की आँख खुली तो उसने बेटी को आवाज दी। बेटी वहां होती तो न आती !… आखिर सूरज को बेटी की चोरी का पता चल गया, वह आगबबूला हो उठा तथा बेटी को खोजने पृथ्वी पर आया। बेटी ने जब अपने पिता को आते देखा तो भय से पानी से भरे एक पोखर में छिप गयी। सूरज उसे ढूंढता ही रह गया। उसकी गरमी से चारों ओर तपन फैल गयीं। उस गरमी से जब पोखर का पानी सूख गया ,तो सूरज की बेटी भी सूखकर सूरजमुखी बन गयी।            -संजय अग्रवाल

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