अलग होना ही आपकी खासियत है : सिद्धांत चतुर्वेदी

एक्सक्लूसिव इंटरव्यू : प्यार, असुरक्षाएँ, नई उम्र का रोमांस और फिल्म “सहर” में संजय लीला भंसाली के साथ काम करने का अनुभव और आगे की तैयारी के बारे में अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी से बातचीत
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अलग होना ही आपकी खासियत है : सिद्धांत चतुर्वेदीफोटो इंटरनेट से साभार
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### आपने अपनी असुरक्षाओं के बारे में बात की। बचपन में किन संघर्षों और झिझकों का सामना करना पड़ा?

सिद्धांत : बचपन में मुझे मेरे घुंघराले बालों की वजह से बहुत चिढ़ाया जाता था। लोग मुझे “मैगी” और “नूडल्स” कहकर बुलाते थे। मेरी छोटी आंखों और भोजपुरी लहजे का भी मज़ाक उड़ाया जाता था। ऐसी बातें आपके आत्मविश्वास को अंदर तक हिला देती हैं। आप सही जवाब जानते हुए भी बोलने से डरते हैं, खुद के लिए खड़े होने में हिचकिचाते हैं। लेकिन समय के साथ मैंने इन असुरक्षाओं को अपनी ताकत बना लिया। आज मुझे अपने घुंघराले बालों और अपनी जड़ों पर गर्व है। अलग होना ही आपकी खासियत है—जब अलग होना खूबसूरत है तो भीड़ में खोने की क्या ज़रूरत ?

### : क्या फिल्म इंडस्ट्री ने भी इन असुरक्षाओं को बढ़ाया?

सिद्धांत : हाँ, कई ऑडिशन के दौरान मुझे कहा गया कि घुंघराले बालों और छोटी आंखों के साथ हीरो बनना मुश्किल है। कुछ लोगों ने तो यह तक कहा कि सिनेमैटोग्राफर छोटी आंखों को पसंद नहीं करते । ऐसी बातें चुभती हैं, लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं खुद को बदलूंगा नहीं । अगर जगह बनानी है तो अपने असली रूप में बनानी है।

### : आपकी फिल्म “सहर” का शीर्षक बहुत दिलचस्प है। इसके बारे में बताइए।

सिद्धांत : “सहर” का मतलब है भोर, सुबह की पहली किरण। आज के समय में जहां हिंसा और टॉक्सिक लव स्टोरीज़ ज़्यादा दिखती हैं, यह फिल्म एक नई सुबह जैसी है। यह मीठी, सादगीभरी और उम्मीद से भरी प्रेम कहानी है। हमने इसे एक फ्रेश नज़रिए से शूट किया है—जैसे सूरज की पहली किरण उम्मीद लेकर आती है, वैसे ही यह फिल्म भी दर्शकों को ताजगी और सकारात्मकता देगी।

### : आजकल कई फिल्ममेकर रोमांस को फिर से जीवित कर रहे हैं। आपकी फिल्म उनमें अलग कैसे है?

सिद्धांत : बहुत सी रोमांटिक फिल्में खूबसूरत होती हैं, लेकिन उनमें ड्रामा और बाहरी संघर्ष ज़्यादा होता है। “सहर” हल्की, अंतरंग और दिल के करीब है। यह मुझे अमोल पालेकर के दौर की सादगीभरी कहानियों की याद दिलाती है—दो अपूर्ण लोग, जो एक-दूसरे में पूर्णता ढूंढते हैं। लेकिन इसे हमने आज की जेन-ज़ी के नजरिए से दिखाया है । आज के युवाओं पर इंस्टाग्राम फिल्टर्स, सुंदरता के मानक, सफलता की तुलना, आर्थिक दबाव और बड़े शहरों में पहचान बनाए रखने का संघर्ष—इन सबका असर है। फिल्म इन्हीं असुरक्षाओं को दिखाती है और बताती है कि कैसे दो अधूरे लोग एक-दूसरे की ताकत बन सकते हैं।

### : मृणाल ठाकुर के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसी रही?

सिद्धांत : हमारी केमिस्ट्री बहुत नैचुरल थी क्योंकि उसकी शुरुआत ईमानदारी से हुई। हम दोनों की संघर्ष यात्रा मिलती-जुलती है, और वही आपसी भरोसा बनाती है। मैंने मृणाल की यात्रा को टीवी से फिल्मों तक देखा है। “सुपर 30” में उनका काम शानदार था । वह बड़े पर्दे पर सचमुच चमकती हैं। मैं हमेशा उनके साथ काम करना चाहता था और यह रोम-कॉम उसके लिए बिल्कुल सही मौका था । मुझे लगता है, यह मेरी उम्र का सही पड़ाव है रोमांटिक किरदार निभाने के लिए—एक्शन तो आगे भी किया जा सकता है।

### : आज की पीढ़ी रिश्तों में ज्यादा खुली और स्पष्ट है । क्या इससे दोस्ती और परफॉर्मेंस बेहतर होती है?

सिद्धांत : मैं थोड़ा ओल्ड-स्कूल हूं, लेकिन मेरे लिए दोस्ती बहुत जरूरी है। जब दोस्ती होती है तो भरोसा होता है, और वही स्क्रीन पर ईमानदार केमिस्ट्री बनाता है। मैं किसी और की पत्नी से रात तीन बजे बात करने में सहज नहीं हूं। मेरे लिए सीमाएं और सम्मान जरूरी हैं । “गली बॉय”, “गहराइयां” और “फोन भूत” जैसी फिल्मों में सेट पर दोस्ती ने परफॉर्मेंस को और सच्चा बनाया । मेरा इरादा हमेशा साफ रहता है—हम यहां एक अच्छी फिल्म बनाने आए हैं।

### : संजय लीला भंसाली जैसे दिग्गज फिल्ममेकर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

सिद्धांत : यह बहुत खास अनुभव था। यह कहानी उनके दिल के बेहद करीब है। वह इन किरदारों में खुद का अक्स देखते हैं। शुरुआत में मैं नर्वस था कि क्या मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतर पाऊंगा। लेकिन उन्होंने हमें बहुत प्रोत्साहित किया। उन्होंने निर्देशक रवि उदयावर पर पूरा भरोसा किया और हम कलाकारों को भी आजादी दी। “गली बॉय” के बाद मैंने उनके साथ काम करने की इच्छा जताई थी। अब किसी रूप में उनके साथ जुड़ना मेरे लिए संतोष की बात है।

### : सुना है कि वह सेट पर नहीं आए, फिर भी हर चीज़ पर नजर रखे हुए थे?

सिद्धांत : जी हाँ, वह सेट पर नहीं आए, लेकिन हर छोटी-बड़ी चीज़ से वाकिफ थे—गानों की एडिट से लेकर ट्रैक की प्रतिक्रिया तक । हमारी पहली घोषणा पर उन्होंने खुद मुझे मैसेज किया । हाल ही में हम उनकी फिल्म “लव एंड वॉर” के शूट पर मिले । हमें कहा गया था कि वह एक घंटा देंगे, लेकिन उन्होंने करीब दो घंटे हमारे साथ बिताए। उनका यह समय और प्यार हमारे लिए बहुत मायने रखता है।

### : आप “कल्ट फिल्म” करने और सिनेमा में असर छोड़ने की बात करते हैं। इसे कैसे देखते हैं?

सिद्धांत : हमारी कोशिश सिर्फ हीरो बनने की नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारा काम समय की कसौटी पर खरा उतरे। “कल्ट” का दर्जा समय देता है। अगर हमारी फिल्में सिनेमा की टाइमलाइन पर एक गहरा निशान छोड़ सकें, तो वही हमारी असली सफलता होगी ।

### : आप जल्द ही वी. शांताराम की बायोपिक में नजर आएंगे। उसकी तैयारी कैसी चल रही है?

सिद्धांत : प्रमोशन्स खत्म होने के बाद तैयारी तेज होगी। साल के दूसरे हिस्से में शूटिंग शुरू होगी। हम डॉ. अभिजीत देशपांडे के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, उनके परिवार से मिल चुके हैं और उनके काम को बारीकी से देख रहे हैं।

तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। जैसे ही फिल्म फ्लोर पर जाएगी, यह मेरे लिए एक बेहद रोमांचक और जिम्मेदारीभरा अनुभव होगा। -लिपिका वर्मा (स्वतंत्र लेखिका)

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