बुर्का विवाद पर बोले जावेद

मुंबईः मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने बुर्का विवाद पर हाल ही में खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा है कि वह बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ नहीं हैं बशर्ते कि यह रोक राजस्थान में जारी महिलाओं की घूंघट प्रथा पर भी लगनी चाहिए। हालांकि, गीतकार ने शुक्रवार को सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। गौरतलब है कि श्रीलंका में आत्मघाती हमले के बाद शिवसेना ने भारत में बुर्के पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
घूंघट प्रथा पर भी रोक की घोषणा करनी चाहिए
जावेद अख्तर ने कहा ‘यदि आप बुर्का पहनने पर रोक लगाने के लिए कानून लाना चाहते हैं तो इस पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि राजस्थान में अंतिम चरण के चुनाव से पहले सरकार को वहां घूंघट प्रथा पर भी रोक की घोषणा करनी चाहिए। घूंघट और बुर्का दोनों पर रोक लगने से मुझे खुशी होगी।’ अख्तर ने कहा ‘कुछ लोग मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने कहा है कि हो सकता है कि श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबंध सुरक्षा कारणों से लगाया गया हो लेकिन वास्तव में यह महिला सशक्तिकरण के लिए जरूरी है। चेहरे को नकाब अथवा घूंघट से ढंकने पर रोक लगनी चाहिए।’

इराक में महिलाएं नहीं ढकती अपना चेहरा
इस मामले पर अपनी बात रखते हुए गीतकार ने कहा ‘भाइयों, मुझे बुर्के के बारे में कम जानकारी है क्योंकि मेरे घर में कामकाजी महिलाएं थीं इसलिए मैंने अपने घर में बुर्के का प्रचलन नहीं देखा।’ उन्होंने आगे कहा ‘इराक एक बहुत ही कट्टर देश है लेकिन वहां महिलाएं अपना चेहरा नहीं ढंकतीं। श्रीलंका में जो नया आदेश आया है वह भी चेहरे को ढकने की मनाही करता है।’    

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