तेल का मेल

बाल कहानी
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श्रेयांश अपने पापा के स्कूटर के पीछे बैठकर बाजार जा रहा था। रास्ते में उसके पापा को पेट्रोल पंप नजर आया तो स्कूटर को उधर मोड़ दिया और पेट्रोल पंप पर स्कूटर खड़ा कर दिया।

‘दो लिटर।‘ उन्होंने आदेश दिया।

पेट्रोल पंप के कर्मचारी ने स्कूटर में दो लिटर पेट्रोल डाल दिया।

घर लौटने पर श्रेयांश ने पापा से पूछा, ‘पापा, स्कूटर में पेट्रोल क्यों डाला जाता है?‘

पापा ने बताया, ‘बेटे, वाहन को चलाने के लिए किसी शक्ति या ताकत की जरूरत होती है। इस शक्ति को ऊर्जा कहते हैं। घोड़ागाड़ी, बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी, भैंसागाड़ी में पशु जुते होते हैं, जो अपनी ताकत से उन्हें खींचकर चलाते हैं। इन सभी वाहनों में पशु ऊर्जा काम में आती है।‘

‘और पापा साइकिल में ?‘ श्रेयांश ने पूछा।

‘साइकिल में आदमी की ताकत काम में आती है। आदमी साइकिल या रिक्शा चलाता है।‘ पापा ने बताया।

श्रेयांश पापा की बात को ध्यान से सुन रहा था।

पापा ने आगे कहा, ‘पर आजकल तो स्वचालित वाहनों का जमाना है। इनमें इंजन लगे होते हैं, जिन में अनेक कलपुर्जे होते हैं। इन वाहनों में पेट्रोल या डीजल ऊर्जा का काम करता है यानी ये वाहन पेट्रोल या डीजल से चलते हैं।‘

‘पापा, पेट्रोल या डीजल के साथ तेल क्यों डाला जाता है?‘ श्रेयांश ने पूछा।

पापा ने बताया, ‘इंजन में कई कलपुर्जे लगे होते हैं। ये कलपुर्जे वाहन के चलते समय घूमते और सरकते हैं। घूमने और सरकने में आपस में टकराते रहते हैं। इस रगड़ से पुर्जे टूटते हैं। अब अगर पेट्रोल में तेल मिला हो तो वह तेल उनके बीच फैलकर बफर का काम करता है।‘

‘पापा, यह बफर क्या होता है?‘ श्रेयांश ने पूछा।

‘बेटे, बफर दो के बीच फैला भाग होता है, जो दो सीमाओं को आपस में मिलने से रोकता है। तुमने बफर स्टेट का नाम सुना ही होगा। बफर स्टेट वह होता है जो दो से अधिक राज्यों के बीच फैला होता है और उन राज्यों की सीमाओं को आपस में मिलने से रोकता है।‘ पापा ने बताया।

‘पापा, तेल डालने से और भी कोई फायदा है?‘ श्रेयांश ने पूछा।

‘है क्यों नहीं, तेल इंजन में घूमने और सरकने वाले पुर्जों पर से अवांछित धूल कणों को हटाता है

जिससे इंजन की जिंदगी बढ़ती है।‘ पापा ने समझाया।

पापा द्वारा दी गई जानकारी श्रेयांश की समझ में आ गई और इसी जानकारी को उसने अपने स्कूल के सभी दोस्तों को भी बताया। नरेन्द्र देवांगन(उर्वशी)

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