दीपिका के सफल दांव

पदमावती’ के साथ उन्होंने फिर एक बार सबको चमत्कृत कर दिया है। उनके प्रिय डायरेक्टर संजय लीला भंसाली कहते हैं कि वह अद्वितीय है…इसकी एकमात्र वजह है कि अन्य दूसरी हीरोइन की तुलना में उन्होंने अपने स्टारडम को बहुत सचेतन होकर थाम रखा है…उनकी कार्यशैली ने उनकी समकालीन कई नायिकाओं को उनके नजदीक तक भी पहुंचने नहीं दिया है…दमावती’ के साथ उन्होंने फिर एक बार सबको चमत्कृत कर दिया है। उनके प्रिय डायरेक्टर संजय लीला भंसाली कहते हैं कि वह अद्वितीय है…इसकी एकमात्र वजह है कि अन्य दूसरी हीरोइन की तुलना में उन्होंने अपने स्टारडम को बहुत सचेतन होकर थाम रखा है…उनकी कार्यशैली ने उनकी समकालीन कई नायिकाओं को उनके नजदीक तक भी पहुंचने नहीं दिया है…

 सिर्फ आईकैण्डी नहीं थी – हम ऐसा हरगिज नहीं कहना चाहते हैं कि वह अपने अकेले दम पर फिल्म इंडस्ट्री की रक्षा कर रही हैं। पर हमारे पास यह मानने के अलावा कोई उपाय नहीं है कि दीपिका पादुकोण इस वक्त बाॅलीवुड की वह अभिनेत्री बन चुकी हैं, जिसके हाथ में फिल्म का लगाम देकर निर्माता बाॅक्स आफिस नामक वैतरणी को पार करना चाहते हैं। उनके दोस्त शाहरुख कहते हैं,  ‘असल में दीपिका ने एकदम उल्कागति से अपनी श्रेष्ठता को प्रमाणित किया है। ओम शांति ओम में उन्होंने मेरे विपरीत अपना डेब्यू किया था, तब वह मात्र एक आईकैण्डी थी। लेकिन बहुत जल्द उन्होंने यह समझा दिया कि वह यहां  सिर्फ आईकैंडी नहीं बनने आई हैं।’ और यह बात गलत भी नहीं थीं, यह उन्होंने अगले कुछ साल में प्रमाणित भी कर दिया। कार्तिक काॅलिंग कार्तिक, लफंगे परिंदे, काॅकेटल जैसी दीपिका की कुछ बकवास फिल्में सफल नहीं हुई, पर इन फिल्मों में दीपिका के अभिनय ने उन्हें एक सख्त नींव पर खड़ा कर दिया था। फलतः तारिकाओं की दौड़ में पहली श्रेणी में उठ आने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगा।

पारिवारिक खेल से दूर कर लिया – लेकिन यहां बात हो रही है दीपिका के अद्वितीय होने की सत्ता को लेकर। क्या वास्तव में वह कभी इस सत्ता को उत्तीर्ण कर पाई है। इस विषय पर आलोचना करने के लिए हमें थोड़ पीछे लौटना पडे़गा। असल जीवन में किसी विषय में सफल होने के लिए कुछ अहम सिद्धांतों पर भरोसा करना उचित है। चूंकि पापा प्रकाश पाडुकोण दिग्गज बैटमिंटन खिलाड़ी थे इसलिए मान लिया गया था कि छोटी दीपिका भविष्य में बैटमिंटन का चुनाव ही पेशे के तौर पर करेंगी। उनके स्कूल में वैसा कोई दोस्त नहीं था, इसलिए दीपिका ने शुरू-शुरू में इस खेल को अपना संगी बना लिया। उनका नेशनल चैंपियनशिप तक खेलना हो गया था। यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उस समय नौंवे दशक में भारतीय महिला बैटमिंटन की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। साइना, सिंधु तब बैटमिंटन मानचित्र में आईं भी नहीं थीं। फलतः दीपिका उस जगह को हासिल करने में सक्षम थी। लेकिन इस निर्णय की बात शुरू नहीं हुई। शायद यह वह समझ गई थी कि बैटमिंटन एक नंबर का सिंहासन ठीक उनके लिए प्रतीक्षा नहीं कर रहा है। इसलिए वह परिवार के उस खेल से धीरे-धीरे निकल कर ग्लैमर वर्ल्ड में आ गईं। उनका निर्णय सही था, यह ओम शांति ओम के प्रदर्शन के कुछ साल बाद खुद-ब-खुद प्रूव हो गया।

एक्टिंग की बात – बहरहाल अब मूल बात पर आते हैं। इस विशेषण के लायक दीपिका के पास कई उदाहरण है, कुछेक घटनाओं का जिक्र करने पर यह बात बिल्कुल साफ हो जाती हैं। इनके एक निर्देशक इम्तियाज अली बताते हैं, ‘उनके एक्टिंग रेंज या स्टारडम को लेकर अलग से बात करने का कोई मायने नहीं है, क्योंकि पीकू, बाजीराव मस्तानी, ये जवानी है दीवानी, रामलीला जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने यह प्रमाणित कर दिया है कि वह किस मानक की अभिनेत्री हैं।’ इसमें कोई प्रश्नचिह्न नहीं है, क्योंकि यहां तक कि हाॅलीवुड के कुछ अभिनेताओं ने भी उनके एक्टिंग की सिर्फ न तारीफ की है, बल्कि उनका फोन नंबर तक पाने की इच्छा व्यक्त की है। इसके बाद तो कहने को कुछ बचा नहीं रह जाता है।

 दूसरी हीरोइन का स्टारडम- अब यह कहने में भी कोई संकोच नहीं होगा कि कंगना, अलिया, अनुष्का जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के बीच भी दीपिका ने हमेशा अपनी स्वीकार्यता को बनाए रखा है। वरना क्यों कोई हर तरह के दर्शकों के बीच पहुंचने के लिए फाइंडिंग फेनी जैसी बिल्कुल अलग धारा की फिल्म करेगी। सिनेमा की बात बहुत हुई। अब कुछ अलग बात करें। ध्यान देने की बात यह है कि दीपिका ने अपने आने के बाद किसी दूसरी हीरोइन के स्टारडम को अपने नजदीक भी आने नहीं दिया हैं। अब अनुष्का विराट कोहली की गर्लफ्रेंड बनकर भारतीय क्रिकेट की फर्स्ट लेडी जरूर हैं पर क्रिकेट के क्षेत्र में कभी उनका राज नहीं था। उन्होंने विराट कोहली के साथ कभी डेट नहीं किया है। लेकिन भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह के साथ उनका नाम कभी जरूर जुड़ा था। दोनों के साथ काॅफी शाॅप में उन्हें अलग-अलग जरूर देखा गया था।

विवाद में भी रहना पडे़गा – सोचकर देखिए, दीपिका हमेशा ही आलोचना के केंद्र में रही है। अब जैसे कि रणवीर सिंह के साथ उनके अफेयर की खबरों पर जिस तरह से न्यूजप्रिन्ट खर्च होता है। वह शायद आज के किसी भी सेलेब के हिस्से में नहीं आया हैं। असल में दीपिका लाइम लाइट में रहने क मंत्र बखूबी जानती हैं। वह इस बात से भी वाकिफ हैं कि सिर्फ अच्छा अभिनय करके एक नंबर आसन में टिका नहीं जा सकता। शरारत और वितर्क के मामले में भी एक नंबर पर रहना पडे़गा। वरना कौन कैटरीना कैफ की पार्सपोट देखना चाहती हूं या रणबीर कपूर को कंडोम का एड करना चाहिए जैसी बातें कहेगा। इससे जो विवाद तैयार हुआ,उससे अनुत्साहित लोगों का उत्साह भी बढ़ जाता है।

डिप्रेशन को पराजित किया – वैसे देखा जाए तो दीपिका को लेकर कम विवाद नहीं हुआ है। अब जैसे कि हाॅलीवुड की फिल्म ट्रिपल एक्स की शूटिंग के दौरान वह हाॅलीवुड के अभिनेता विन डीजेल के प्रति इतनी ज्यादा घनिष्ठ क्यों हो गई। इससे लेकर माय चाॅयस वीडियो में कहीं गई बातों पर गौर फरमाएं। इसमें उनकी गर्भवती होंगी या नहीं यह पूरी तरह से उनकी इच्छा पर निर्भर करता है, जैसी बातों पर  नारीवादी विचारधारा के लोगों को लगा था कि उन्होंने व्यक्ति स्वतंत्रता की बात कहते हुए महिलाओं के प्रति असम्मान व्यक्त किया है। ये बातें क्षुब्ध लोगों के मन को बहुत बुरी लगी थी। उन्होंने उनकी इन बातों की खूब भर्त्सना भी की लेकिन इन सब बातों को लेकर कभी भी दीपिका ने कोई रोना धोना नहीं किया। बल्कि अपने डिप्रेशन और उसे पराजित कहने की बात कह कर उन्होंने और भी ढेरों लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लिया।

हर कदम सोच-समझ कर – हम शुरू में ही उनके निर्णय लेने की क्षमता पर बात कर चुके हैं।  ऐसे में आप यदि उनके कॅरियरग्राफ पर नजर डालें तो यह बात साफ हो जाती है कि वह हमेशा बहुत सचेतन होकर हर कदम चली हैं। जिससे जनमानस पर अपना प्रभाव बहुत स्वाभाविक तौर पर डाला जा सके। इसे आप अंग्रेजी में पब्लिसिटी स्टंट भी कह सकते हैं, गलत मत सोचिएगा। रणबीर कपूर के प्यार में पड़कर अपने कंधे पर रणबीर  के नाम का इस्तेमाल करने को हम उनके किसी गलती के तौर पर नहीं ले रहे हैं। मगर विन डेजल के संतान की मां बनने की इच्छा या तमाशा के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर को गले लगानेवाली बात को हम कैसे देखें ? असल में फिल्म इंडस्ट्री बहुत निर्दयी है। यहां एक इंच जगह छोड़ देने का मतलब सिंहासन से उनके खिसकने का पतन शुरू हो चुका है, इसलिए दीपिका कोई मौका भी गंवाना नहीं चाहती हैं। इसलिए खुद के जूते ही नहीं दूसरों के जूते में भी वह पांव डाल देती है प्रियंका के साथ उनके हाॅलीवुड में टक्कर की बात को आप भूले नहीं होंगे। पद्मावती के बाद तो यह बात साबित हो चुकी है कि उन्होंने एकदम श्रेष्ठ जगह हासिल कर लिया है। उस जगह में वर्तमान में उनके अलावा किसी की बात सोची भी नहीं जा रही है। वह चाहे उनका सार्थक अभिनय हो, अफेयर हो या फिर विवाद हो।   – ए.सी.

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