टोनी की तरकीब

बहुत समय पहले की एक समुद्र के किनारे कुछ पक्षियों का झुण्ड रहता था जो समुद्री कीड़े -मकोड़े और मछलियां खाकर अपना जीवन निर्वाह करते थे। ये पक्षी समुद्र के किनारे वृक्षों बैठे रहते थे और उसकी (समुद्र की) लहरों के आने का इंतजार करते रहते थे, जब लहरें आकर वापस चली जातीं, वैसे ही वे अपने-अपने घोंसले से निकलकर फुर्ती से उड़कर समुद्र तट पर जाते और अपने और अपने परिवार के लिए भोजन की तलाश करते, यदि उस समय उन्हें भोजन मिल गया तो उसे खा लेते और यदि नहीं मिलता तो लहर के दुबारा आने तक का इंतजार करने के लिए फिर से अपने घोंसले में आ जाते और लहर के आने तक इंतजार करते। यही उनकी दिनचर्या थी, और इसी तरह वे अपने दाने-पानी का जुगाड़ करते थे।
कुछ समय बाद एक पक्षी ने अंडा दिया, उसमें से चूजा निकला, जब चूजा थोड़ा बड़ा हुआ तो वह भी अपने माता-पिता के साथ भोजन के लिए जाने लगा और वह भी यही प्रक्रिया अपनाने लगा। लहर आने के बाद, खाने के लिए उड़कर पहुंचना है और नहीं मिले तो फिर लहर आने तक अपने घोंसले में वापस आकर लहरों का इंतजार करना। सभी पक्षियों की यही जीवन शैली चल ही रही थी कि एक दिन अचानक से लहर आ गई और चिड़िया का बच्चा भागने में नाकाम रहा, जिससे वह समुद्र की लहर की चपेट में आ गया और जब लहर वापस गई तो वह बालू-रेत, मिट्टी में दब गया। इसके बाद जैसे -तैसे वह बाहर निकला और उड़कर अपने घोंसले में जा बैठा।
दुबारा फिर लहर जाने के बाद पक्षियों द्वारा भोजन खोजने जाना हुआ तब वह बच्चा ( टोनी ) भोजन ढूंढ़ने के लिए नहीं गया क्योंकि लहर से दबने के कारण वह इतना डर गया था कि अपने घोंसले से निकल ही नहीं रहा था, लेकिन वह अपने घोंसले से एक दूसरे समुद्री जीव को देख रहा था कि वह जीव कैसे लहर के साथ अपने भोजन की तलाश कर रहा था। लहर आने के पहले से ही वह मिट्टी में दबकर बैठ जाता था और लहर जाने के बाद वह तुरंत निकल कर अपना शिकार करने लगता था। यह देखकर टोनी को भी उम्मीद जगी कि ‘हम भी ऐसे ही अपना शिकार करके भोजन करेंगे और जब लहर आएगी तो हम नीचे मिट्टी में बैठ जाएंगे और जब लहर वापस जाएगी तब निकलकर हम अपने भोजन का इंतजाम कर लेंगे।’
हिम्मत कर टोनी गया और उसने वैसे ही किया, जैसे ही लहरें आई और उसके ऊपर से निकल गई तो वह समुद्र में देख रहा था कि कितना भोजन है जो वह खा सकता है और उस बच्चे ने यही प्रक्रिया अपनानी शुरू कर दी। अब जब भी लहर आती तब वह मिट्टी में दबकर बैठ जाता और लहर के वापस जाते ही, वैसे ही तुरंत अपने भोजन की तलाश करना शुरू कर देता। देखते-देखते टोनी ने इतना भोजन तलाश करके इकट्ठा कर लिया कि अपने पूरे झुंड को एकत्र करके उनको खिलाने लगा। अब उसको तथा उसके झुंड को भोजन की कोई समस्या नहीं रह गयी थी। अब होशियार टोनी अपने झुंड को भी यह तरकीब बताने लगा कि ‘भोजन की तलाश कैसे करें ? जिससे कि हम सब कभी भूखे नहीं रहेंगे।’
धीरे-धीरे नन्हें टोनी से सभी पक्षियों ने वो तरकीब सीखी और उस आधार पर शिकार करना शुरू कर दिया। ऐसा करने से पक्षियों को भोजन ढूंढने में अब कोई दिक्कत नहीं हो रही थी और सब अपना-अपना भोजन बड़ी सरलता से खोज ले रहे थे। जबकि पहले जब तक वे अपने-अपने घोंसले से आते-जाते तब तक सभी शिकार खत्म हो जाते थे और वे सब भूखे ही रह जाते थे। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी परिस्थिति में अपना साहस, धैर्य नहीं खोना चाहिए। कुछ अच्छा करने के लिए निरंतर मेहनत, लगन, दृढ़ निश्चय और साहस की जरूरत होती है यदि उस बच्चे के पास साहस नहीं होता तो वह दुबारा शिकार करने नहीं जाता और अपने भोजन को तलाशने में नाकामयाब हो जाता। इसलिए सच कहा गया है कि हार मानने वाले कभी मंजिल तक नहीं पहुंचते। बल्कि दृढ़-निश्चय और हिम्मत के बल पर ही मन में आत्मविश्वास जगाकर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।

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