अंजाम-ए-मुहब्बत

हर  साल फरवरी माह की चौदहवीं तारीख को दुनियाभर में करोड़ों प्रेमी युगल फूलों और उपहारों के साथ एक दूसरे के प्रति प्रेम का इजहार करते हैं। प्रेम के इजहार के इस दिन को ‘वैलेन्टाइन्स डे’ (वैलेन्टाइन दिवस) के नाम से जाना जाता है। क्रिसमस के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘उत्सव’ है जब लोग एक दूसरे के प्रति शुभेच्छा जताते र्है। अनुमान है कि पिछले साल दुनिया भर में 15 करोड़ से ज्यादा लोगों ने शुभेच्छा कार्ड देकर अपने प्रियतम के प्रति प्रेम का इजहार किया।
वैलेन्टाइन दिवस की शुरुआत कैसे हुई इस पर पर लोग एक मत नहीं हैं लेकिन सभी मानते हैं कि इसका उत्स प्राचीन रोमन और ईसाई परंपराओें में ही छिपा है। संत वैलेन्टाइन के नाम पर मनाये जाने वाले इस उत्सव में सबकी जिज्ञासा का मुख्य पात्र यही संत हैं। इस उत्सव की शुरुआत कैसे हुई इसको लेकर कैथोलिक ईसाइयों में वैलेन्टाइन (या फिर वैलेन्टाइनस) नाम के कम से कम तीन संतों की कहानियां प्रचलित हैं। सबसे प्रचलित कहानी है कि तीसरी सदी में रोमन सम्राट क्लाउडियस द्वितीय के मन में विचार आया कि सैनिक रणक्षेत्र में तभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है जब वह परिवार, खासतौर से पत्नी-बच्चों, के मोहपाश से मुक्त हो। और एक दिन उसने अपने राज्य में युवाओें के विवाह करने पर पाबंदी लगा दी। राज्य के एक चर्च में वैलेन्टाइन नाम के एक पुरोहित (पादरी) थे जिन्हें यह निर्णय नागवार और अमानवीय लगा। उन्होंने सम्राट के हुक्म की परवाह न करते हुए बिना किसी शोरशराबे के चुपचाप युवा प्रेमियों के विवाह कराने का काम जारी रखा। बात क्लाउडियस द्वितीय तक पहुंची और उसने वैलेन्टाइन को हुक्म अदूली के लिए सजा ए मौत सुना दी। लोगों ने वैलेन्टाइन को संत का दर्जा देते हुए उनकी याद में ‘प्रेम दिवस’ मनाना शुरू कर दिया।
एक और चर्चित कहानी के अनुसार वैलेन्टाइन रोमनों के जेलों में कैद ईसाइयों को भागने में मदद करते थे ताकि वे जेलों में उन्हें दी जा रही भारी यातना से मुक्त हा सकें और इसी प्रयास में उनकी भी जान चली गयी। इस कहानी में बताया गया है कि वैलेन्टाइन खुद भी जेल में कैद थे और एक दिन जेलर की युवा पुत्री जेल देखने आयी। वैलेन्टाइन ने उसे देखा और उस पर फिदा हो गये। उन्होंने अपने प्रेम का इजहार भी कर दिया जिसे पहला ‘ वैलेन्टाइन संदेश’ माना जाता है। बताया जाता है कि मृत्यु से पहले उन्होंने जेलर की पुत्री को पत्र लिखा जिसमें हस्ताक्षर में उन्होंने लिखा- ‘तुम्हारे वैलेन्टाइन की ओर से’ और आज भी वैलेन्टाइन शुभेच्छा कार्ड में प्रेमी/प्रेमिका से प्रेम का इजहार इन्हीं शब्दों के साथ हाेता है। हालांकि ऐसा कोई ठोस प्रमाण अब तक नहीं मिला है जिससे वैलेन्टाइन की इन कहानियों में बतायी गयी घटनाआें की सच्चाई की पुष्टि हो सके लेकिन एक बात स्पष्ट है कि संत वैलेन्टाइन का यह बलिदान महज प्रेम प्रदर्शन का प्रतीक नहीं था वरन् सनकी, कट्टरपंथी व्यवस्था के प्रति अहिंसक विरोध प्रदर्शन भी था।
जहां तक भारत में वैलेन्टाइन डे उत्सव के लोकप्रिय होने का सवाल है। इसके बारे में भारतीयों का रवैया मिलाजुला रहा है। बात सुनने में अटपटी जरूर लग सकती है लेकिन यह कटु सत्य है कि भारत के लोग चाहे जितना धर्मनिरपेक्ष, सहिष्णु होने का दावा कर लें, कथित परंपरावादी पुरुषों का महिलाआें के प्रति उन्हें अपने से कमतर आंकने का सदियों पुराना नजरिया विभिन्न रूपों में आज भी बरकरार है। धर्म, समाज और भी तरह-तरह नामों से सदियों से महिलाएं यह अतिवादिता झेलती आ रही हैं। बेशक देश का संविधान हर नागरिक को लिंग, जाति, धर्म, समुदाय, क्षेत्र के भेदभाव से रहित समान अधिकार प्रदान करता है लेकिन हाल के बरसों में अनगिनत बार यह देखा गया कि समाज और कथित परंपराआें के संरक्षण का ‘जिम्मा’ उठाने वाले ‘नैतिकतावादी’ संविधानेतर शक्ति बन गये। भारतीयों को ‘प्रेम और लिंगभेद’ के मामलों के प्रति अति संवेदनशीलता जग जाहिर है लेकिन हाल के वर्षों में इन उग्र कथित संरक्षणवादियों का युवाओें, खासतौर से किसी युवा युगत द्वारा सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे के प्रति आत्मीयता प्रदर्शित करने पर प्रतिक्रियास्वरूप कानून अपने हाथ में ले लेने की घटनाओें ने इन प्रतिक्रियाओें में निहित ‘सांस्कृतिक पाखंड’ पर बहस तेज कर दी है। इन प्रतिक्रियावादी गतिविधियों में भारतीय संस्कृति के उदार पहलू, जिसने सारी दुनिया को भारत की ओर आकर्षित किया है, को सुविधानुसार आसानी से भुला दिया जाता है। उत्तर भारत के कुछ मंदिरों, जिनमें पुरी का विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर शामिल है, में बारहवीं सदी के कृष्णभक्त कवि जयदेव के ‘गीत गोविंद’ के पद सुबह-शाम की पूजा अर्चना में शामिल होते हैं। गीत गोविंद की ख्याति कृष्ण और गोपियों की रासलीला तथा कृष्ण और राधा के प्रसंगों का अत्यंत शृंगारिक पद्यात्मक वर्णन की है। इन पदों के भक्तिभाव से गायन में किसी धर्म परायण पुरुष या महिला को कोई आपत्ति नहीं है। इसी तरह कर्नाटक में बारहवीं सदी की कवयित्री अक्का महादेवी द्वारा रचित एवं अपने आराध्य शिव को समर्पित ‘शिवम’ के पद मुक्त कंठ से गाये जाते हैं। और शायद ही कोई इन दोनों कवियों को भारत के सांस्कृतिक प्रतीक मानने से इनकार करेगा। जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क मंदिर से लेकर खजुराहो तक जगतप्रसिद्ध धरोहर हैं जो भारतीय कला, दर्शन, विवेक, सहिष्णुता और उदारता के अनुपम उदाहरण हैं। भारत के शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम, कुचिपुडि, ओडिसी, मणिपुरी से लेकर कत्थक तक कृष्ण के शृंगारिक पक्ष (लास्य) की अभिव्यक्ति के बिना अधूरे हैं, भारतीय शास्त्रीय संगीत के लोकगीत व बोल आधारित सुगम रूप ठुमरी, दादरा, चैती आदि की शृंगारिक कृतियों के बिना कल्पना नहीं की जा सकती।
लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर प्रेमी युगलों द्वारा एक दूसरे के प्रति आत्मीयता के सार्वजनिक प्रदर्शन की सीमा क्या हो? क्या उनको जबरन रोके जाने से उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होती? इन सवालों पर समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। समाज का एक बड़ा हिस्सा इस तरह के प्रदर्शन को अशालीन मानता है और समाज का दूसरा हिस्सा उन लोगों का है जो खुद भले ही इस तरह की अभिव्यक्तियों में शामिल न हों लेकिन वे इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं करते। यह धड़ा मानता है कि समाज को सुधारने का बीड़ा उठाये नैतिकता नियंत्रकों का आये दिन सार्वजनिक स्थलों पर युगलों पर ज्यादती करना किसी भी दृष्टि से वांछनीय नहीं है। आज का भारत युवाआें का भारत है। देश की आधी से ज्यादा आबादी युवाआें की है। अतः ऐसे उत्सवों पर स्थिति को नियंत्रित करने में प्रशासन से संवेदनशील होने की उम्मीद की जाती है ताकि ‘मर्यादा’ और ‘अभिव्यक्ति’ का द्वंद्व विकृत रूप न ले ले। आत्मीयता प्रदर्शन के इस सामाजिक द्वंद्व के बारे में किसी शायर की ये पंक्तियां गौरतलब हैं-
‘मुहब्बत तो तेरा मेरा मसला था।
पर ये जमाना दरमियां क्यूं आया..।’

मुख्य समाचार

भाटपाड़ा में बमबारी जारी, 1 मरा

सर्च अभियान चलाकर पुलिस ने किये 6 बम बरामद भाटपाड़ा : भाटपाड़ा थानांतर्गत 10 नं. गली के रामनगर कॉलोनी में बम विस्फोट होने से एक व्यक्ति आगे पढ़ें »

नए कोच के चयन में नहीं चलेगी विराट की मनमानी

नयी दिल्ली : टीम इंडिया का नया मुख्‍य कोच कौन होगा इस पर फैसला कुछ समय बाद लिया जाएगा। पर बीसीसीआई के एक अधिकारी ने आगे पढ़ें »

कृषि क्षेत्र में विकास के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर करना होगा काम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार को कृषि क्षेत्र में सुधार के साथ राज्यों को वित्त आयोग द्वारा किए गए अनुदान और आवंटन को जोड़ना चाहिए। यह आगे पढ़ें »

2018-19 में डिजिटल ट्रांजेक्शन 51 फीसदी बढ़ी, कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन 3,133.58 करोड़ के पार पहुंचा

नई दिल्ली : देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2018-19 में डिजिटल ट्रांजेक्शन पिछले साल की तुलना में 51 फीसदी बढ़ी आगे पढ़ें »

निजी क्षेत्र और उपक्रमों को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज करना चाहती है सरकार

नई दिल्ली : केंद्र सरकार निजी क्षेत्र और निजी उपक्रमों को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस बारे आगे पढ़ें »

सिंधू का दमदार प्रदर्शन, इंडोनेशिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची

जकार्ता : भारत की चोटी की शटलर पीवी सिंधू ने डेनमार्क की मिया बिलिचफेल्ट के खिलाफ तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मैच में जीत दर्ज आगे पढ़ें »

fire in an animation studio in japan, 24 dead

एनिमेशन स्टूडियो में लगायी आग, 24 जिंदा जले

टोक्यो : जापान के क्योटो शहर में गुरुवार सुबह एक एनिमेशन स्टूडियो में आग लगने से 24 लोग जिंदा जल गए जबकि 35 से अधिक आगे पढ़ें »

ऐसे उठा सकते हैं एनपीएस में छुट का लाभ

नई दिल्ली : नेशनल पेंशन योजना (एनपीएस) ने ईपीएफओ से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 10 साल में केंद्रीय और आगे पढ़ें »

teachers enclosing legislative assembly lathi charged by the police

विधानसभा का घेराव करने पहुंचे शिक्षकों पर पुलिस ने किया लाठीजार्च

पटना : वेतनमान समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर गुरुवार को राजधानी पटना में विधानसभा का घेराव करने पहुंचे नियोजित शिक्षकों पर पुलिस ने जमकर आगे पढ़ें »

Government told - cases of rape are increasing in trains

सरकार ने बताया – ट्रेनों मे लगातार बढ़ रहे है दुष्कर्म के मामले

नई दिल्ली : देश की सड़कों-गलियों में तो बहू-बेटियां सुरक्षित थी ही नहीं, अब यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली ट्रेनों में भी आगे पढ़ें »

ऊपर