विज्ञापन बाजार बनाने के लिए जुकरबर्ग व पिचाई में बड़ी डील का आरोप

वाशिंगटन: अमेरिका में एक गंभीर एंटी-ट्रस्ट शिकायत से पता चला है कि मेटा (फेसबुक) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई कथित तौर पर एक विज्ञापन की मिलीभगत की साजिश में शामिल थे। हालांकि, दोनों तकनीकी दिग्गजों ने इस आरोप से इनकार किया है। टेक्सास और अन्य राज्यों के वकीलों ने आरोप लगाया है कि जुकरबर्ग और पिचाई ने व्यक्तिगत रूप से एक गुप्त सौदे को मंजूरी दी, जिसने सोशल नेटवर्क को गूगल की ऑनलाइन विज्ञापन नीलामी में टांग अड़ाई। टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन के नेतृत्व में राज्य अटॉर्नी जनरल के समूह ने गूगल के खिलाफ एक नयी शिकायत जारी की, जिसमें प्रोग्रामेटिक विज्ञापन बाजारों में कंपनी की फेसबुक के साथ कथित मिलीभगत के बारे में यह जानकारी दी गयी। राज्यों ने दिसंबर 2020 में गूगल के खिलाफ मुकदमा दायर किया था और पिछले साल नवंबर में एक संशोधित वर्जन के साथ अपडेट किया। प्रारंभिक शिकायत में जुकरबर्ग और पिचाई के बीच विशेष रूप से जेडी ब्लू नामक एक परियोजना में मिलीभगत का आरोप लगाया गया।
मुकदमे के अनुसार, फेसबुक की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग ने 2018 में सिलसिलेवार ईमेल के जरिए बातचीत में स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक रूप से एक बड़ा सौदा है। इस सौदे में फेसबुक के सीईओ भी शामिल थे। जब दोनों पक्षों ने समझौते की शर्तों पर सहमति बना ली, तब टीम ने सीधे सीईओ जुकरबर्ग को संबोधित कर एक ईमेल भेजा- ‘हस्ताक्षर करने के लिए लगभग तैयार हैं और आगे बढ़ने के लिए आपकी स्वीकृति की आवश्यकता है।’ जुकरबर्ग निर्णय लेने से पहले सैंडबर्ग और उनके अन्य अधिकारियों से मिलना चाहते थे। 2018 के सौदे से सोशल नेटवर्क के गूगल के विज्ञापन एक्सचेंज के इस्तेमाल से फेसबुक को संभवत: गैरकानूनी फायदे मिले। कभी गूगल के विज्ञापन व्यवसाय की प्रमुख रहीं सैंडबर्ग और पिचाई ने सितंबर 2018 व्यक्तिगत रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किये। वहीं, गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम हर साल सैकड़ों समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं जिनके लिए सीईओ की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है और यह अलग नहीं था। समझौता कभी भी गोपनीय नहीं था। व्यवस्था अवैध नहीं थी।

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