सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बढ़ेगी अनिल अंबानी की मुश्किलें

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बैड लोन पर शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाया है। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र की उस अधिसूचना की वैधता को बरकरार रखा, जिसमें बैंकों को दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत ऋण वसूली के लिए व्यक्तिगत गारंटरों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी गई थी।

कोर्ट के इस फैसले से अनिल अंबानी, कपिल वधावन और संजय सिंघल जैसे कारोबारियों को मुश्किलें बढ़ जाएंगी। दरअसल पर्सनल बैंकरप्सी को लेकर सरकार ने एक कानून बनाया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद बैंक अब उन कंपनियों के प्रमोटरों के खिलाफ पर्सनल बैंकरप्सी का केस दायर कर सकते हैं जिनकी कंपनियां कर्ज समाधान के लिए एनसीएलटी को भेजी गई हैं। इस लिस्ट में अनिल अंबानी, कपिल वधावन और संजय सिंघल जैसे कारोबारियों का नाम शामिल है।

पर्सनल गारंटर चुकाएगा बैकों का पैसा

अब तक कपंनियां आईबीसी कोड के तहत कंपनी को दिवालिया घोषित करके बैंक का कर्ज न चुकाने का बहाना बनाती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बैंक पर्सनल गारंटर से अपने बकाये की वसूली कर सकेंगे। कोर्ट के इस फैसले से बैंक अपने बैड लोन बुक को क्लियर कर सकेंगे। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि आईबीसी के तहत समाधान योजना की मंजूरी से बैंकों के प्रति व्यक्तिगत गारंटरों की देनदारी खत्म नहीं हो जाती।

 

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