रिजर्व बैंक की सबसे बड़ी छूट : तीन महीने ईएमआई देने से छूट, 15 साल में सबसे सस्ता हुआ लोन

मुंबई : चीनी वायरस कोरोना से बचने के लिए देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन का आम आदमी पर असर कम से कम हो, इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी मैदान में उतर आया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गरीबों के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज घोषित करने के 20 घंटे बाद ही आरबीआई ने आम आदमी और बैंकों जैसे कर्जदाताओं को सबसे बड़ी छूट दी है। आरबीआई ने ब्याज दरों में अब तक की सबसे बड़ी कटौती करते हुए रेपो रेट को 75 आधार अंक घटा दिया और किसी भी टर्म लोन के लिए ईएमआई भुगतान में 3 महीने की छूट देने की घोषणा कर दी। इस कदम के बाद सभी तरह का लोन 15 साल में सबसे सस्ता हो गया है। आइए विस्तार से समझें रिजर्व बैंक के फैसलों को असर –

1. जिन्हें लोन चुकाना है, उनको 3 महीने ईएमआई देने की जरूरत नहीं  

आरबीआई ने सभी सरकारी, प्राइवेट, सहकारी, ग्रामीण बैंकों और एनबीएफसी तथा स्मॉल फाइनेंस बैंकों को कह दिया है कि टर्म लोन की किश्त चुकाने में तीन महीने की छूट दी जाए। इनको सभी तरह के मियादी कर्ज यानी किसी खास अवधि के लिए उधार लिए कर्ज की ईएमआई वसूलने से रोक दिया है। अब यह ग्राहकों पर है कि वे इन तीन महीनों के दौरान भुगतान करेंगे या नहीं, लेकिन इन बैंकों और संस्थाओं में से कोई भी दबाव नहीं डालेगा। ध्यान रखने की जरूरत है कि इसका आधार 1 मार्च, 2020 माना गया है, यानी 1 मार्च से जिनके लोन की किस्त बकाया है, उन्हें इससे छूट मिली है।

इसका मतलब क्या हुआ : तीन महीने के लिए आपके खाते से कर्ज की किश्त नहीं कटेगी। इसे किश्त डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा इसलिए इसका क्रेडिट स्कोर पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। तीन महीने के बाद आपके कर्ज की ईएमआई दोबारा शुरू हो जाएंगी। ऐसा नहीं है कि इन तीन महीनों की ईएमआई माफ की गई है, बल्कि सिर्फ तीन महीने की छूट दी गई है। तीन महीने के लिए ईएमआई टाल सकते हैं, बाद में इनका भुगतान करना ही होगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लॉकडाउन के कारण  जिनके पास वाकई नकदी की कमी होती है तो उन्हें कर्ज के भुगतान में कुछ समय मिल जाए।

2. ब्याज दरें घटाकर कर्ज सस्ता किया 

कर्ज को सस्ता करने के लिए आरबीआई ने ब्याज दरों में अब तक की सबसे बड़ी कटौती की है। उसने रेपो रेट को 5.15% से  0.75% घटाकर 4.40% कर दिया गया है। ऐसा 15 साल में पहली बार हुआ है कि ब्याज दरें इतनी कम हो गई हैं। 0.75% की कटौती 11 साल में सबसे ज्यादा है। बताते चलें कि रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई से बैंक कर्ज लेते हैं। जब बैंकों को सस्ता कर्ज मिलेगा तो वे ग्राहकों के लिए भी ब्याज दरें घटाएंगे। नए ग्राहक लोन ना भी लें, लेकिन मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई जरूर कम हो जाएगी।

3. कंपनियों के कर्ज पर भी बड़ी छूट 

आम आदमी के अलावा रिजर्व बैंक ने मंदी का असर घटाने के लिए कंपनियों को भी बड़ी राहत दी है। उसने बैंकों को अनुमति दे दी है कि अगले तीन महीने यानी जून 2020 तक कंपनियों के वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज न वसूलें। वर्किंग कैपिटल लोन वह कर्ज होता है, जिसे कंपनियां या कारोबारी अपने दिन-प्रतिदिन के लिए खर्च के लिए लेते हैं।

4. बैंकों को आरबीआई में पैसे रखने पर कम ब्याज मिलेगा

लॉकडाउन और दुनियाभर में मंदी को देखते हुए बाजार में नकदी बढ़ाने के लिए आरबीआई ने उस ब्याज दर में भी कमी कर दी है, जो बैंकों को रिजर्व बैंक के पास धन रखने पर मिलता है। इसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। इसमें 0.90 प्रतिशत की कमी की गई है।

5. बैंकों को नकदी आरक्षित रखने में छूट दी

इसी तरह बैंकों को नकदी रखने के अनुपात में भारी छूट दी गई है। इसे सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेश्यो कहा जाता है। इसमें आरबीआई ने 1 प्रतिशत की भारी कमी कर दी है। इससे बैंकों के पास नकदी अधिक रहेगी और वे बाजार में ज्यादा पैसा देंगे। पहले उन्हें 4 प्रतिशत धन आरक्षित रखना पड़ता था, अब 3 प्रतिशत ही रखना होगा। आरबीआई का कहना है कि उसके इन फैसलों से बाजार में 3.74 लाख करोड़ रुपए की नकदी बढ़ने की उम्मीद है।

6. बैंकों के शेयरों में गिरावट, पर पैसा सुरक्षित है

जैसे ही रिजर्व बैंक ने इन कदमों की घोषणा की, शेयर बाजारों में भारतीय बैंकों के शेयर बुरी तरह टूट गए, लेकिन इसका असर केवल निवेशकों पर पड़ेगा, आम आदमी या बैंकों के खाता धारकों पर इसका कोई असर नहीं आएगा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास  ने साफ किया कि बैंकों में लोगों का पैसा सुरक्षित है। देश का फाइनेंशियल सिस्टम मजबूत है, किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।

7. और भी राहत देने की तैयारी

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास  ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगे भी इसी तरह की राहतें जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि मंदी और लॉकडाउन का असर कम करने के लिए जो भी जरूरी कदम हैं, उन पर विचार किया जा रहा है।

8. भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास दर पर आरबीआई की क्या राय है?

मंदी : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास  ने कहा कि वैश्विक मंदी बढ़ सकती है, और अगर ऐसा हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर होगा।

भारत की विकास दर :  कोरोनावायरस और लॉकडाउन के कारण विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ और महंगाई दर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, यानी इन पर अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिए आने वाले वित्त वर्ष के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने आउटलुक जारी नहीं किया।

बाजार में नकदी: आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास  ने कहा कि देश में आर्थिक गतिविधियां और फाइनेंशियल मार्केट बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन रिजर्व बैंक का इन पर पूरी नजर है और नकदी की कमी नहीं होने दी जाएगी।

महंगाई : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास  ने कहा कि वैश्विक स्तर पर  कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से भारत को फायदा होगा। साथ ही देश में फसलों के  रिकॉर्ड उत्पादन होने की वजह से अनाज भी सस्ता हो सकता है।

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