हर्ष लोढ़ा को मिली हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच से राहत

विंध्या टेली लिंक्स और बिड़ला केबल्स के डायरेक्टर नियुक्त किए गए

सन्मार्ग संवाददाता, कोलकाता : पिछले डेढ़ दशकों से चल रही कानूनी लड़ाई में एम पी बिड़ला ग्रुप के मौजूदा प्रमुख हर्ष वर्धन लोढ़ा को भारी राहत मिली है।हाई कोर्ट से मिली इस राहत के बाद वे विंध्या टेली लिंक्स और बिड़ला केबल्स के डायरेक्टर नियुक्त किए गए। हाई कोर्ट के जस्टिस संबुद्धचक्रवर्ती और जस्टिस अरिंदम मुखर्जी के डिवीजन बेंच ने जस्टिस शहीदुल्ला मुंशी के 2 अगस्त 2019 के आदेश को खारिज कर दिया है। इसके तहत लोधा को 2 कंपनियों का डायरेक्टर बनाए जाने पर स्टे लगा दिया गया था। डिवीजन बेंच के इस फैसले के बाद हर्षवर्धन लोढ़ा को विंध्या टेली लिंक्स और बिड़ला केबल्स के डायरेक्टर पद पर पुन: नियुक्त कर दिया गया। एडवोकेट परितोष सिन्हा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस मुंशी के इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई थी। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि न्यायिक अधिकार क्षेत्र का मुद्दा तय किए बगैर सिंगल बेंच ने स्टे लगा दिया था। इधर बिड़ला के एडवोकेट का दावा है कि डिवीजन बेंच ने इस मामले के मेरिट पर गौर नहीं किया है बल्कि कहा है कि इन मुद्दों पर सिंगल बेंच ही सुनवाई करेगी।

लोढ़ा परिवार और बिड़ला परिवार के कुछ सदस्यों में चल रही है कानूनी लड़ाई

यहां गौरतलब है कि लोढ़ा परिवार और बिड़ला परिवार के कुछ सदस्यों के बीच करीब डेढ़ दशक से अदालतों में मामला चल रहा है। यहां गौरतलब है कि 2019 में विंध्या टेली लिंक्स और बिड़ला केबल्स के शेयर धारकों की आम वार्षिक सभा, ए जी एम, हर्षवर्धन लोढ़ा को इन कंपनियों का डायरेक्टर निर्वाचित करने के साथ ही और कई प्रस्ताव पास किए गए थे। पर एम पी बिड़ला समूह की ये दोनों कंपनियां इस प्रस्ताव पर अमल नहीं कर पाई क्योंकि मामला हाई कोर्ट में चला गया था। जस्टिस शहीदुल्ला मुंशी ने मामले की सुनवाई के बाद इस पर स्टे लगा दिया था। जस्टिस मुंशी ने इस ए जी एम में पास किए गए प्रस्तावों के नतीजे के प्रकाशन पर भी रोक लगा दी थी।

कॉरपोरेट घरानों के लोकतंत्र का विजय बताया लोढ़ा के एडवोकेट ने

लोढ़ा के एडवोकेट ने डिवीजन बेंच के इस फैसले को कॉरपोरेट घरानों के लोकतंत्र का विजय बताया। एडवोकेट सिन्हा ने बताया कि डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि हम अन्य मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि यह सिंगल जज के न्यायिक अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी होगी। इसके साथ ही कहा है कि सिंगल जज फैसला लेते समय इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगे। सभी पक्षों के एफिडेविट और जवाबी एफिडेविट दाखिल करने के बाद सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगा। यहां गौरतलब है कि यह जस्टिस संबुद्ध चक्रवर्ती के कार्यकाल का अंतिम फैसला है क्योंकि इसके बाद वे सेवानिवृत हो जाएंगे।

शेयर करें

मुख्य समाचार

सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 300 अंक नीचे, बैंक, वित्त कंपनियों के शेयरों में गिरावट

मुंबई : वैश्वकि बाजारों में बिकवाली निकलने से बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स भी मंगलवार को कारोबार के शुरुआती दौर में 300 अंक से आगे पढ़ें »

शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये स्वयं को नामांकित करें: निशंक

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये स्वयं को नामांकित करने और अपनी उपलब्धियों आगे पढ़ें »

ऊपर