गांव और कस्बों तक उड़ने वाले मोबाइल टावर पहुंचाएंगे इंटरनेट कनेक्टिविटी

नई दिल्ली : तकनीकी जगत में रोज नए इनोवेशन की वजह से हर चीज मुमकिन होती जा रही है। गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियां करोड़ों लोगों को इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं, यूजर्स इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए दुनिया से संपर्क में रहे।

आपको बता दें कि इंटरनेट कनेक्टिविटी को गावों और कस्बों तक पहुंचाने के लिए लून जैस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अमेरिकी स्टार्ट-अप कंपनी ने उड़ने वाले मोबाइल टावर बनाने की कोशिश की है और इस उड़ने वाले मोबाइल टावर में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है जो कि एक डायनिंग टेबल की साइज का है। इसे एक लंबे वायर के साथ जोड़ा गया है और यह ड्रोन एक महीने तक हवा में उड़ सकता है और इसके जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी दूर-दराज या दुर्गम इलाकों में पहुंचाई जा सकती है।

ड्रोन बेस इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने की कोशिश सेल्युलर ऑन व्हील्स के जरिए भी जा रही है और स्कुपी एक्शन इस तरह की टेलीलिफ्ट तकनीक के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी दुर्गम इलाकों में पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। इस तकनीक से टेलीलिफ्ट कई सप्ताह तक हवा में रहकर इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचा सकती है और ये तकनीक सेल्युलर ऑन व्हील्स के मुकाबले सस्ती है और टेलिकम्युनिकेशन के लिए एक सहज माध्यम बनकर सामने आ रहा है।

जीएसएमए की रिपोर्ट के अनुसार इस समय दुनियाभर में 4 अरब से ज्यादा लोग इंटरनेट से कनेक्टेड नहीं हैं और इन लोगों तक इन्टरनेट  पहुंचाने के लिए नए-नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र में 2017 से ही इस तरह के उड़ने वाले मोबाइल टावर का इस्तेमाल करके इंटरनेट सेवा मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है और  टेलीलिफ्ट में इस्तेमाल होने वाले हर ड्रोन की मदद से 20 से 30 मील के रेडियस में इंटरनेट सेवा पहुंचाई जा सकती है।

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