दिव्यांगों के विकास और रोजगार के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने आयोजित किया दो दिवसीय सम्मलेन

नई दिल्ली : माइक्रोसॉफ्ट इंडिया 15 और 16 फरवरी, 2019 को देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय बधिर संघ तथा राष्ट्रीय दिव्यांग रोजगार संवर्धन केंद्र के सहयोग से एक सम्मेलन करने जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन प्रौद्योगिकी के समावेशन पर विचार-विमर्श को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाता है।

इस आयोजन के उद्घाटन के मौके पर शकुंतला डोले गैमलिन ( सचिव, दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में सभी क्षमता के लोगों को शामिल करना किसी राष्ट्र की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारा दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि हम सभी लोगों को समान पहुंच व अवसर के साथ सशक्त करें। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका बेहद अहम होगी। इस वर्ष सभी क्षमताओं के लोगों को मुख्यधारा में लाने में एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस प्रदर्शनी में गैर-लाभकारी संगठनों, प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विकसित सहायक तकनीक के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट के भागीदार एवं माइक्रोसॉफ्ट सॉल्यूशंस की प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाएं भी होंगी। इसमें डीक्यू सिस्टम्स के अभिगम्यता परीक्षण उपकरणय दस्तावेजों तक सुलभ पहुंच के लिए एडोब एक्रोबैटय डॉ. फिलिप रे हार्पर द्वारा बधिरों के लिए वीडियो रिले सेवाएं तथा आसानी से पहुंच के लिए माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 365. शामिल हैं।

इस अवसर पर डॉ. श्रीराम राजमणि ( वैज्ञानिक एवं प्रबंध निदेशक, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया) ने कहा कि समाधान असीम संभावनाओं के द्वार खोलते हैं तथा दिव्यांगों को ऐसे उपकरणों के साथ सशक्त बनाते हैं जो उन्हें आत्मनिर्भर एवं उत्पादक बनाए। राष्ट्रीय बधिर संघ के अध्यक्ष ए. एस. नारायणन ने कहा कि डिजिटल अभिगम्यता पर विचार-विमर्श के दायरे का विस्तार हुआ है तथा इसमें दिव्यांगों की श्रेणी को भी शामिल किया जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी टेलीविजन चैनलों से सभी कार्यक्रमों में सांकेतिक भाषा को शामिल करने का अनुरोध किया है, जो वास्तव में सही दिशा में उठाया गया एक स्वागत योग्य कदम है। वहीं राष्ट्रीय दिव्यांग रोजगार संवर्धन केंद्र के कार्यकारी निदेशक, अरमान अली ने कहा कि जिस तरह सभी प्रकार की विकलांगता एक जैसी नहीं होती है, ठीक उसी तरह अभिगम्यता समाधान भी समरूप नहीं हो सकते हैं। हमें विभिन्न श्रेणियों की विकलांगता तथा उनकी अलग-अलग जरूरतों को समझना चाहिए तथा प्रौद्योगिकियों से अपेक्षाओं को स्वीकार करना चाहिए।

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