आईआरडीएआई ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के माननीकरण के लिए नया ड्राफ्ट एक्सपोजर जारी किया

नई दिल्ली : आईआरडीएआई ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के माननीकरण के लिए नया ड्राफ्ट एक्सपोजर जारी किया है, ताकि बीमा कंपनियों की पेशकश में समानता लाई जा सके। प्रस्तावित बदलावों के तहत बेसिक कवर के साथ एड-ऑन तथा वैकल्पिक कवर पेश करने की अनुमति नहीं होगी…
– स्टैंडर्ड प्रोडक्ट की पेशकश सिर्फ इन्डेम्निटी आधार पर होगी और इसमें कोई कटौती शामिल नहीं होगी। हालांकि, उक्त प्रोडक्ट पर 5% के एक स्टैंडर्ड को-पे पर विचार किया जा सकता है।
– ड्राफ्ट एक्सपोजर में कहा गया है कि पेश की जाने वाली बेसिक इन्डेम्निटी हेल्थ कवर पॉलिसी में न्यूनतम 50000 रूपया और अधिकतम 10 लाख रुपए सम एश्योर्ड होना चाहिए।
– स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को किसी भी क्रिटिकल इलनेस कवर या अन्य लाभ आधारित कवर के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। कोई भी स्टैंडर्ड प्रोडक्ट एक फैमली फ्लोटर प्लान के रूप में पेश किया जा सकता है और इसके अंदर 0 से 25 वर्ष तक के बच्चे भी कवर किए जा सकेंगे।
– प्रिंसिपल सम एश्योर्ड के लिए न्यूनतम प्रवेश आयु 18 वर्ष और अधिकतम प्रवेश आयु 65 वर्ष होगी और इस पॉलिसी को जीवन भर तक रिन्यु कराया जा सकेगा। इसमें कोई भी अधिकतम एक्जिट उम्र नहीं होगी।
– दिशानिर्देशों में यह प्रस्ताव है कि स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के बेस कवर के साथ कोई भी एड-ऑन और वैकल्पिक कवर देने या जोड़ने की अनुमति नहीं होगी, जैसा कि वर्तमान में कई बीमा कंपनियां अपने अलग-अलग प्रकार के बेसिक प्रोडक्ट के साथ एड-ऑन और वैकल्पिक कवर दे रही हैं। इस कारण हर बीमा कंपनी का प्रीमियम अलग होता है और किसी को भी इस बात की वास्तविक जानकारी नहीं होती कि उपभोक्ता के लिए बेसिक कवर में क्या-क्या शामिल है।
– दिशानिर्देशों में यह भी बताया गया है कि स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट में कुछ अनिवार्य कवर शामिल किए जाने चाहिए, जैसे अस्पताल भर्ती खर्च (रूम, बोर्डिंग, नर्सिंग खर्च, डेंटल उपचार आदि), आयुष उपचार, अस्पताल में भर्ती होने के पहले और बाद का खर्च, वेलनेस इन्सेंटिव।
– प्रस्तावित बदलाव हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं और इनकी मदद से बीमा उत्पादों की खरीद में 20 – 25% की वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में लगभग 36 मिलियन परिवार अपनी वार्षिक आमदनी से अधिक चिकित्सा खर्च करते हैं, जिसके कारण वो लगातार कर्ज के बोझ में दबते चले जाते हैं। अधिक किफायती इंश्योरेंस प्लान मौजूद होने से अधिक परिवार हेल्थ इंश्योरेंस की सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, इन नियमों द्वारा बीमा उत्पादों में मानकीकरण और पारदर्शिता लाए जाने से हेल्थ इंश्योरेंस में उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा। लंबी अवधि में यह बदलाव एक ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकेंगे, जहां प्रत्येक भारतीय स्वयं के लिए और अपने परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर सकेंगे। इस तरह उनका बाहरी खर्च काफी हद तक कम हो सकेगा।

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