वैश्विक अर्थव्यवस्‍था सुस्ती का सबसे ज्यादा भारत पर असर

वाशिंगटनः इस समय विश्व खराब अर्थव्यवस्‍था की दौर से गुजर रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आईएमएफ ) की प्रबंधन निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा है कि देशों के बीच व्यापार विवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। जॉर्जिवा ने कहा है कि साल 2019 में दुनिया की 90 फीसदी अर्थव्यवस्था के मंदी के चपेट में आने की आशंका है। भारत में इसका सबसे ज्यादा असर हो सकता है। उन्होंने भारत में इस साल गिरावट और ज्यादा रहने की चेतावनी दी है।
जॉर्जिवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 10 सालों के निचले स्तर पर आने की आशंका भी जाहिर की है। बता दें कि यह आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर जॉर्जिवा का पहला संबोधन था। आगामी सप्ताह में आईएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठकें शुरू हो जाएंगी। जलवायु परिवर्तन दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने एक और बड़ी चुनौती है।

सरकार नहीं मानती इस बात को

नरेंद्र मोदी की सरकार ने अब तक यह बात नहीं माना है कि भारतीय अर्थव्यवस्‍था पर मंदी का कोई प्रभाव पड़ रहा है। जॉर्जिवा ने कहा है कि वैश्विक मंदी का सबसे ज्यादा असर भारत पर दिखाई दे रहा है। क्रिस्टालिना बयान में कहा है कि इस समय पूरे विश्व की अर्थव्यवस्थाएं ‘समकालिक मंदी’ से गुजर रहा है। भारत जैसी बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्‍था पर मंदी का असर स्पष्ट रुप से नजर आ रहा है। जियॉरजीवा ने कहा कि चारों ओर फैली हुई मंदी का अर्थ है कि साल 2019-20 के दौरान बढ़ाेतरी दर इस दशक की शुरूआत से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाएगी।

विकास दर में तेजी से गिरावट

प्रबंधन निदेशक ने कहा कि ब्राजील और भारत जैसे उभरते बाजारों में इस वर्ष ज्यादा मंदी दिखेगी। अगर चीन की बात करें तो चीन का विकास दर तेजी से बढ़ने के बाद अब लगातार गिरती ही जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारी विवादों का असर काफी व्यापक है और देेशों को अर्थव्यवस्‍था को न केवल नकदी डालने पर बल्कि एकरुपता से प्रतिक्रिया देने के लिए भी डटकर तैयारी करना चाह‌िए। अमेरिका और जर्मनी के बारे मेें बात करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास में कभी बेरोजगारी की स्थिति इतनी खराब नहीं हुई। पर इसके बाद भी अमेरिका, जापान और खास तौर पर यूरो क्षेत्र की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट का अनुभव किया गया है। उन्हाेंने कहा कि पूरे विश्व के व्यापारिक वृद्वि लगभग थम गई है। इतना ही नहीं आईएमएफ ने घरेलू मांग बढ़ने की ‘उम्मीद से कम संभावना’ के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 0.3 प्रतिशत की कम कर उसे सात प्रतिशत कर दिया है।

अर्थव्यवस्‍था पर चिंता प्रकट की

मालूम हो कि क्रिस्टालिना को इसी महीने क्रिस्टीन लागार्डे के स्‍थान पर आईएमएफ का शीर्ष पद संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। अर्थव्यवस्‍था पर अपनी चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा है कि यह मुद्दे एक बार फिर से अहम हो गए हैं और यह विवाद काफी देशों तथा दूसरे जरूरी मुद्दे तक फैल गए हैं।

जियॉरजीवा ने कहा कि दुनिया के समक्ष जलवायु परिवर्तन भी एक अहम चुनौती है। इसे सुधारने के लिए उन्होंने पर्यावरण में बढ़ते कार्बन पर प्रतिबंध लगाने के लिए आह्वान भी किया। बता दें कि अगले सप्ताह से आईएमएफ-विश्वबैंक की सालाना बैठकें भी शुरू हाेगीं।

15 अक्तूबर को जारी होंगे आंकड़े
15 अक्तूबर को आईएमएफ चालू और अगले वर्ष के लिए अपने वृद्धि दर अनुमान के आधिकारिक संशोधित आंकड़े जारी करेगा। इससे पहले आईएमएफ ने साल 2019 में वृद्धि दर 3.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। साल 2020 के लिए 3.5 फीसदी का अनुमान जताया गया था।

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