फियो ने बनाया भारत-जापान बिजनेस ग्रुप, व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली : निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने भारत और जापान के व्यापारिक समुदायों के बीच संवाद सम्पर्क को प्रोत्साहित करने तथा आपसी व्यापार व निवेश को बढावा देने के उद्येश्य से ऑनलाइन मंच ‘‘भारत-जापान बिजनेस ग्रुप’’ शुरू किया है। सूत्रों की माने तो फियो ने भारत और जापान के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार से जुड़े तोक्यो स्थित जापान इंडिया इंडस्ट्री प्रमोशन एसोसिएशन (जेआईआईपीए) के साथ शुक्रवार शाम को एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने इस अवसर पर कहा, ”यह समझौता ज्ञापन 2 प्रमुख संस्थानों के बीच अधिक से अधिक सहयोग और बातचीत का मार्ग प्रशस्त करेगा।’’

ऑनलाइन भारत-जापान बिजनेस ग्रुप हुआ शुरू

सर्राफ ने बताया कि ऑनलाइन भारत-जापान बिजनेस ग्रुप चालू कर दिया गया है। इससे दोनों देशों के उद्यमियों और व्यापारियों को एक दूसरे के यहां साथ कारोबार के अवसरों और संभावनाओं को समझने तथा सरकार की नीतियों और निर्णयों की अद्यतन जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। इसी अवसर पर भारत और जापान के बीच व्यापार और व्यवसाय के अवसरों पर दोनों संगठनों की ओर से एक चर्चा आयोजित की गयी। जिसमें फियो अध्यक्ष सर्राफ ने कहा कि भारत और जापान के बीच 17.6 अरब डॉलर का मौजूदा व्यापार द्विपक्षीय व्यापार की सही क्षमता को नहीं दर्शाता है।

उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं : फियो

फियो का मानना है कि भारत से जापान को विनिर्मित वस्तुओं, जेनेरिक दवाओं सहित तमाम प्रकार के उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं है। पर बहुत सी संभावनाओं को अभी तक खंगाला नहीं गया है। संगठन का कहना है कि जापान को फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद चावल, मांस, टी-शर्ट, फेरो सिलिकॉन, एल्यूमीनियम, आदि क्षेत्रों के उत्पादों के निर्यात की प्रबल संभावनाएं हैं।

निर्यात के मूल्य वर्धित सेगमेंट पर ध्यान दें भारतीय निर्यातक

फियो के महानिदेशक और सीईओ डॉ. अजय सहाय ने कहा कि भारतीय निर्यातकों को निर्यात के मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) सेगमेंट पर ध्यान देना चाहिए, जो जापान में मुख्य रूप से आयात होता है। जापान में आयात होने वाले कई उत्पादों में भारत की हिस्सेदारी बेहद कम है। बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भारत की हिस्सेदारी 0.09 प्रतिशत, मशीनरी 0.36 प्रतिशत, दवा 0.24 प्रतिशत और चिकित्सा व सर्जिकल उपकरण 0.38 प्रतिशत है। जिनमें बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है क्योंकि जापान में इन उत्पादों का आयात 250 अरब डॉलर से अधिक का है। इस समारोह में जेआईआईपीए के चेयरमैन शिजेमारो यासूई, वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव संजय चढ्ढा, टेक्सटाइल्स कमेटी के सचिव अजित बी चव्हाण और फियो के उपाध्यक्ष महेश चंद्र केयाल भी उपस्थित थे।

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