कोरोना के कारण खुदरा व्यापार तबाह होने के कगार पर, सरकारी मदद की है जरूरत

नई दिल्ली : कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने देश में लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा है कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरकार की ओर से अनेक कदम उठाये गए हैं, फिर भी भारतीय व्यापारियों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बेहद असाधारण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा और समय रहते यदि कदम नहीं उठाये गए तो इस कठिन समय और वित्तीय संकट के कारण भारत का व्यापार अपनी मौत के मरने के कगार पर खड़ा होगा ।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि भारत में सात करोड़ छोटे मध्यम व्यापारियों में से लगभग एक करोड़ प्रतिष्ठान व्यवसायिक आवश्यक वस्तुओं के व्यापार से जुड़े हुए हैं, इनमें से लगभग 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत ही वर्तमान समय में अपने व्यापार को चालू रख पा सकें हैं और ऐसे समय में भारत के स्थानीय किराना स्टोरों ने इन कठिन समय में राष्ट्र के साथ खड़े हैं, जबकि तथाकथित बहुराष्ट्रीय ईकॉमर्स दिग्गज जो अपने तकनीकी विकास के बारे में बड़ी बात करते हैं।  कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि लगभग 6.5 करोड़ से अधिक व्यापारियों ने राष्ट्रीय तालाबंदी के मद्देनजर अपने शटर पूरी तरह से बंद कर दिए हैं और उनके पास राजस्व का कोई साधन नहीं है और वे लंबे समय तक आय के बिना बने रहेंगे। भले ही सरकार ने विभिन्न विनियामक अनुपालन को स्थगित करने और ऋण की किस्तों आदि में कटौती जैसे कुछ उपायों की घोषणा की हो, लेकिन ये उपाय अल्पावधि पैकेज के बिना अल्पावधि में कुछ कार्यशील पूंजी दबाव को कम कर देंगे और ये उपाय अत्यधिक अपर्याप्त होंगे।

कैट ने सरकार से इस मुद्दे पर आग्रह किया है कि सभी प्रकार के ऋणों पर प्रभावी लॉकडाउन अवधि के लिए बैंक ब्याज शुल्क की छूट आगे बड़ाई जाए, कार्यशील पूंजी और तरलता को कम करने के लिए तीन महीने के लिए सभी कर भुगतानों को स्थगित करना, किराये की कैपिंग 25% -35% तक करना ताकि मकान मालिक और किरायेदार दोनों इस कठिन समय से बच सकें, लॉकडाउन अवधि के लिए व्यापारियों पर कर्मचारियों को वेतन देने के बोझ में सरकार की सहायता बेहद जरूरी है। सरकार ने कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने का निर्देश जारी किया है, जबकि छोटे व्यापारी को बिना किसी राहत के अपने सभी नियमित खर्चों को वहन करना है। हमने सरकार से एक फार्मूला तैयार करने का अनुरोध किया है, जहाँ कुछ प्रतिशत सरकार दे एवं कुछ प्रतिशत व्यापारी तथा कुछ प्रतिशत कर्मचारी भुगते के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाए ताकि कर्मचारी और व्यापारी दोनों बच सकें।

कैट ने आगे आग्रह किया है कि पहले से ही उतारे गए माल के जोखिम को कवर करने के लिए बंदरगाहों, रेलवे और अन्य स्थानों पर लगाए जाने के लिए पेनल्टी शुल्क आदि से बचाने के लिए इन सभी को फाॅर्स मैज्योर क्लॉज़ में शामिल किया जाए। व्यापारियों और अन्य लोगों को सभी सरकारी भुगतान 45 दिनों के मानक के अनुसार किये जाएँ। जीएसटी और आयकर के तहत व्यापारियों को रिफंड तुरंत दिया जाना चाहिए जो व्यापारियों के लिए एक वित्तीय राहत हो सकती है। कैट ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि सरकार थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं और उनके कर्मचारियों जो आवश्यक सुविधाओं के लिए काम कर रहे हैं, उन्हे 50 लाख स्वास्थ्य बीमा दिया जाए। देश की चिकित्सा क्षेत्र पैरा मेडिकल फाॅर्स, सफाई कर्मचारी की भांति व्यापारियों को भी कोरोना योद्धा माना जाए।

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