बाइक-टैक्सियां बीस लाख से ज्यादा नौकरियां लाने में सक्षम हैं – रिपोर्ट

नई दिल्ली : ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट (ओएमआई) के रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक एवं सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करने में बाइक-टैक्सी की संभावना को उजागर करती है। रिपोर्ट ‘द पावर ऑफ टू व्हील्स- बाइक टैक्सीनजः इंडियाज न्यू शेयर्ड मोबिलिटी फ्रंटियर’ बाइक-टैक्सियों के दायरे को व्यापक बनाने के लिए एक सक्षम नीतिगत ढांचे का आह्वान तथा सिफारिश करती है और इस पर अपनी अंतर्दृष्टि डालती है।

किराये पर सवारी की बढ़ती मांग के साथ बाइक-टैक्सियों की लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि यह भारत के अनुरूप है। ओएमआई ने अपने विस्तृत अध्ययन में गुरुग्राम और जयपुर में बाइक-टैक्सी परिचालन का विश्लेषण किया है, जिसमें पाया गया है कि बाइक-टैक्सी सफर का आदर्श समाधान है, क्योंकि 70-85 प्रतिशत ग्राहक सात किलोमीटर से कम की दूरी के लिए बाइक-टैक्सी को पसंद करते हैं। गुरुग्राम में देखा गया कि हर तीन यात्रा में से एक मेट्रो स्टेशन जाने या मेट्रो स्टेशन से आने की है और ऐसी यात्राएं व्यस्ततम घंटों में होती हैं।

रिपोर्ट बाइक-टैक्सियों के लाभों को गिनाती है, यह सस्ती और सबसे अहम सुरक्षित सवारी है। जो लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुगम बनाती है, यह आमदनी बढ़ाने के साथ ही रोजगार भी पैदा करती है। भारत में राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों को कैसे सामाजिक और आर्थिक रूप से लाभान्वित किया जाए, इस बारे में ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट के प्रमुख आनंद साह ने कहा कि भारत दुनिया में सड़कों पर सबसे बड़ी संख्या में दौड़ते दोपहिया वाहन वाले देशों में से एक है। शेयर्ड मोबिलिटी और हाइपरलोकल डिलीवरी दोनों में काफी तेजी दिख रही है और ऐसे में बाइक मुसाफिर और माल परिवहन के लिए पसंदीदा विकल्प के तौर पर उभरी है।

आपको बता दें कि अगले दशक में सालाना 55-60 लाख नए रोजगार पैदा करने की जरूरत है, ऐसे में यह रिपोर्ट आना महत्वपूर्ण हो सकता है। इस लक्ष्य को पाने में बाइक-टैक्सियां महत्वपूर्ण साबित होंगी, साथ ही यह यातायात का लोकतांत्रिकरण करती हैं और समावेशी गतिशीलता तंत्र भी बनाती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बाइक-टैक्सियों से 40-50 लाख अमेरिकी डॉलर की कमाई की संभावना है और 20 लाख से ज्यादा आजीविकाएं पैदा होंगी। बाइक टैक्सियों के प्रभावी ढंग से संचालन की कुंजी सुसंगत कानूनी स्पष्टता प्रदान करने, सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के एकीकरण, ड्राइवर उद्ममियों के लिए औपचारिक क्रेडिट की पहुंच देने और सभी हितधारकों को समान सुविधा देने में है।

केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए बाइक-टैक्सियों को चलाने के लिए नीतियां बना रही है। अभी कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसके लिए नियम बनाए गये हैं। राज्य सरकारें बाइक-टैक्सियों को किफायती, सक्षम, तेज और सुरक्षित परिवहन-साधन के रूप में लाने का काम कर सकती हैं।

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