13000 फर्जी एनजीओ हुए बंद, विदेशी चंदा भी 40% घटा

नई दिल्ली : मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को विदेश से मिलने वाले चंदे में पिछले चार साल में 40% की कमी आई है. विदेशी कंसलटेंसी फर्म बेन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चार सालों में 13 हजार से अधिक एनजीओ के लाइसेंस गृह मंत्रालय द्वारा रद्द किए गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में करीब 4,800 एनजीओ के लाइसेंस रद्द हुए.

इस रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी चंदे में करीब 40 प्रतिशत कमी आई है. विदेशी चंदे को अधिनियमित करने वाले कानून एफसीआरए अधिनियम के उल्लंघन को लेकर सरकार की ओर से एनजीओ इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई के बीच विदेशी चंदे में यह गिरावट दिखी है. कार्रवाई में कई संगठन विभिन्न संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के काम के लिए खड़े किए गए थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच द्वारा रिजर्व बैंक के बोर्ड के सदस्य नचिकेत मोर के खिलाफ अभियान चलाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने पिछले साल मोर का कार्यकाल कम कर दिया था. मोर भारत में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के निदेशक हैं. फोर्ड फाउंडेशन और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे बड़े एनजीओ पर भी सरकार ने कार्रवाई की.

वहीं इस सरकार के कार्यकाल में निजी समाजसेवियों का योगदान बढ़ा है. कुल निजी वित्तपोषण वित्तवर्ष 2014-15 में 60 हजार करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इस अवधी में भारतीय उद्योग जगत ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत 13 हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसमें कि 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसके अलावा व्यक्तिगत दानकर्ताओं ने 43,000 करोड़ रुपये रहा जो 21 प्रतिशत वृद्ध दर्शाता है.

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