1 सितंबर से चुकानी पड़ेगी ईएमआई !

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक ने 6% से ऊपर निकल चुकी महंगाई पर अंकुश रखने के लिये नीतिगत ब्याज दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया। कर्ज की ​किस्त चुकाने पर दी गई समय की छूट भी नहीं बढ़ाई, जो 31 अगस्त को खत्म हो रही है। तब तक बैंक कोई घोषणा नहीं करता तो 1 सितंबर से कर्जदाता कर्ज की ईएमआई वसूलना शुरू कर देंगे। मार्च में कर्ज की ईएमआई 3 महीने के लिए टालने की सुविधा दी गई थी, जो बाद में 3 महीने और यानी 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई थी। बैंक नहीं चाहते थे कि यह मियाद और बढ़े।हालांकि धीमी पड़ी आर्थिक गतिविधियों को देखते हुये केन्द्रीय बैंक ने कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के कर्ज पुनर्गठन की मंजूरी दे दी है। दूसरी तरफ घर-परिवारों को सोने के जेवर तथा आभूषणों के बदले मिलने वाले ऋण की सीमा 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दी है। यह राहत 31 मार्च 2021 तक उपलब्ध होगी। जो एमएसएमई दिवालिया हो चुके हैं, लेकिन 1 जनवरी 2020 तक उनका ऋण खाता ‘स्टैडर्ड’ है, उनके लिए पुनर्गठन की योजना पहले से ही है और इससे बड़े पैमाने पर एमएसएमई को राहत मिली है। अब समिति ने ऐसे एमएसएमई के ऋण पुनर्गठन को मंजूरी प्रदान कर दी है जिनका खाता 1 मार्च 2020 तक ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में था। पर्सनल लोन की भी रिस्ट्रक्चरिंग कराई जा सकेगी।10 हजार करोड़ रुपये : हाउसिंग क्षेत्र और छोटे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के तनाव को कम करने के उद्देश्य से 10 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त विशेष तरलता की सुविधा दी जायेगी। 5000 करोड़ रुपये राष्ट्रीय आवास बैंक को और 5000 करोड़ रुपये नाबार्ड को दिये जायेंगे।
दो महीने और तेज रहेगी महंगाई
मार्च 2020 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई की दर 5.8 प्रतिशत पर थी जो जून में बढकर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गयी, हालांकि जुलाई में इसमें कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में महंगाई के लक्षित दायरे से बाहर रहने का अनुमान है जबकि दूसरी छमाही में इसमें कुछ नरमी आ सकती है। बंपर खरीफ फसल होने के बाद अनाजों की कीमतों में कमी आ सकती है, लेकिन उसके बाद भी खाद्य महंगाई में तेजी की आशंका बनी हुयी है।
सब्जियों और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रहने का अनुमान है। मुद्रास्फीति को तय दायरे में रखने पर भी ध्यान रहेगा। मुद्रास्फीति को सामान्यत: चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ही यह ऊंचे में छह प्रतिशत और नीचे में दो प्रतिशत तक भी जा सकती है। जून 2020 में खुदरा मुद्रास्फीति इस दायरे को पार करती हुई 6.09 प्रतिशत पर पहुंच गई।

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