सेवा जून में, बिल जुलाई में बना तो लगेगा जीएसटी

नई दिल्लीः क्रेडिट कार्ड, टेलीफोन या कोई अन्य सेवा जिसका उपयोग जून के महीने में किया गया हो और जुलाई में उनकी इनवॉयस बने और भुगतान हो तो उस पर जीएसटी लागू होगा। 1 जुलाई से जीएसटी लागू हुआ है और इसमें अधिकांश सेवाओं पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत कर दी गयी है, जो पहले सर्विस टैक्स क रूप में 15 प्रतिशत थीं। एक अधिकारी ने कहा कि जुलाई 1 से जो भी बिल तैयार होगी इस पर जीएसटी लगेगा। उसकी सेवा भले ही पिछले महीने ली गयी हो। उपभोक्ता द्वारा पिछले महीने ही उसका एडवांस भुगतान कर दिए जाने की स्थिति में यह लागू नहीं होगा। अधिकारी ने कहा कि यदि आपकी बिलिंग सायकिल 25 जून को समाप्त होती है और उसका इनवॉयस 10 जुलाई को तैयार होता है, तो उसका एडवांस भुगतान नहीं किया गया है तो उस पर जीएसटी लागू होगा, क्योंकि इस कानून के तहत सर्विस प्रदान करने की सेवा प्रदान करने की तिथि उसके इनवॉस जारी करने की तिथि को माना जाएगा। सेवा देने के 30 दिनों के भीतर इनवॉयस तैयार करनी होती है। यदि उपभोक्ता बिल का एडवांस भुगतान करता है तो नियमों के अनुसार टैक्स दायित्व उस दिन का होता है। माल (गुड्स) के मामले में जिस दिन इनवॉयस जारी की जाएगी उसी दिन उसकी बिक्री मानी जाएगी और उस पर कर लिया जाएगा।

जीएसटी के बाद दाम में गड़बड़ी तो पहले जुर्माना, फिर जेल होगी

केंद्रीय खाद्य मंत्री ने कहा – नई कीमतें लिखनी ही होंगी

नई दिल्लीः उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि जीएसटी में कंज्यूमर से धोखाधड़ी करने पर जेल और जुर्माना का प्रावधान किया गया है। जीएसटी से भ्रष्टाचार को लगाम लगेगी। भ्रष्टाचार के कारण सरकार को राजस्व की कम आता था। पासवान ने कहा कि जीएसटी के बाद कुछ उत्पादों के रेट घटे हैं और कुछ के रेट बढ़े हैं। जिन चीजों पर टैक्स कम हुआ है, नियमों के मुताबिक उनकी कीमत कम होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर सारी शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत 10 हजार रुपये या सामान बिकने के अनुपात में जुर्माना लगाया जायेगा और जेल जाने का भी प्रावधान होगा। नियमों का अनुपालन नहीं करने पर पहली बार 25 हजार रुपये, दूसरी बार 50 हजार रुपये और तीसरी बार 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
नये मूल्य का स्टीकर जरूरी ः कंपनियों और दुकानदारों को जीएसटी के बाद कीमतों में जो बदलाव हुआ है, उसके लिए नये मूल्य का स्टीकर लगाना जरूरी है। उपभोक्ता मंत्रालय ने नई मूल्य के बारे में निर्देश दिए हैं कि अगर किसी भी चीज पर जीएसटी कम या ज्यादा हुआ है तो नई कीमत के साथ एमआरपी का दूसरा स्टीकर चिपकाया जाए ताकि ग्राहकों को साफ-साफ पता चल सके की कीमतें कम या ज्यादा हुई हैं। सरकार ने परिवर्तित खुदरा बिक्री मूल्य की घोषणा, मोहर लगा कर या स्टीकर चिपका कर या ऑनलाइन करने के लिए कहा है। कंपनियों को पुराना माल बेचने के लिए स्टीकर लगाने की छूट 1 सितंबर तक मिलेगी। उसके बाद सभी सामानों पर जीएसटी के हिसाब से नई कीमत की एमआरपी छापनी होगी।
अलग-अलग मूल्य नहींः उपभोक्ता मंत्रालय ने एक ही चीज के लिए अलग-अलग मूल्य पूरी तरह बंद करने को कहा है। पासवान ने कहा कि ऐसी शिकायतें मिलती हैं कि एयरपोर्ट, सिनेमाघर और मॉल जैसी जगह पर खासतौर पर ज्यादा मूल्य पर चीजें बेची जाती हैं। इसको लेकर मंत्रालय ने स्पष्ट नियम बना दिए हैं, जिसे अगले साल लागू कर दिया जाएगा। मंत्रालय इस बात की निगरानी कर रहा है कि जिन चीजों पर टैक्स कम हुआ है, उसकी कीमत कम हो और फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचे। जल्द ही एक हेल्प लाइन शुरू किया जायेगा, जहां ग्राहक इस बात की शिकायत कर सकते हैं कि जीएसटी कम होने के बाद किसी भी चीज पर कीमत कम नहीं की गई। कोई भी व्यक्ति जैसा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में परिभाषित किया गया है, पहले से पैकबंद एकसमान वस्तुओं के लिए अलग-अलग मूल्य घोषित नहीं करेगा।

जीएसटी कर स्लैब में असमानता को दूर करेंःकैट

नयी दिल्लीः जीएसटी परिषद से व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आग्रह किया है कि नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की विभिन्न दरों में असमानता, विसंगति और विरोधाभासों को दूर किया जाए और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि इसके स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिल सके। कैट ने सरकार से 28% के कर स्लैब में रखी गई सेवाओं और उत्पादों पर फिर से विचार करने का भी सुझाव दिया है। दिल्ली में शुक्रवार को कैट की बैठक में 23 राज्यों के व्यापारी नेता शामिल हुए और उन्होंने जीएसटी कर व्यवस्था को अपनाए जाने का स्वागत किया। इसकी विसंगतियों को दूर करने का आग्रह भी किया। संगठन ने इसके लिए जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए जीएसटी समन्वय समिति बनाने का सुझाव दिया है। कैट ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को दोनों स्तर पर व्यापारियों के साथ ‘जीएसटी मूल्यांकन बैठक ‘ कर जमीनी मुद्दों को समझना चाहिए और उन्हें तर्कसंगत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
प्रोत्साहन की सिफारिश
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी. भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हम छोटे शहरों में जीएसटी कराधान प्रणाली में संक्रमण के लिए व्यापारियों को सब्सिडी या प्रोत्साहन दिए जाने के प्रावधानों की सिफारिश करते हैं क्योंकि उनके द्वारा प्रौद्योगिकी संचालित व्यापार प्रक्रियाओं को तेजी से अपनाया जाना आवश्यक है। इसके लिए उन्हें अपना समय और पैसा दोनों ही का निवेश करना आवश्यक है। इसी तरह देशभर में 9 महीने को अंतरिम अवधि का प्रावधान, व्यापारियों के बीच दंड के डर को कम करने और नयी प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं को सीखने पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में बेहद प्रेरणादायक साबित होगा और साथ ही भारतीय अर्थव्यव्स्था में उनकी कड़ी मेहनत के योगदान को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा।

जीएसटी से शिक्षा नहीं होगी महंगी

नयी दिल्लीः सरकार ने शुक्रवार को कहा कि जीएसटी के कारण शिक्षा महंगी नहीं होगी। इसका कारण उच्च माध्यमिक तक की स्कूली शिक्षा तथा शिक्षण संस्थानों से संबद्ध अधिकतर सेवाओं को दी गयी कर छूट है। शिक्षा महंगी होने की रिपोर्ट खारिज करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उच्च माध्यमिक तक शिक्षण संस्थानों में मध्याहन भोजन योजना के साथ-साथ सुरक्षा, साफ-सफाई सेवाओं को भी जीएसटी से छूट दी गयी है। साथ ही उच्च माध्यमिक तक दाखिला और परीक्षा से संबद्ध सेवाओं को भी जीएसटी से छूट दी गयी है। वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘जीएसटी के अंतर्गत शिक्षा से संबद्ध किसी भी विषय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके उलट स्कूल बस्ता जैसी शिक्षा से संबद्ध चीजों पर कर की दरें कम की गयी हैं।’

कीमत बढ़ी है तो विज्ञापन जारी करें – अधिया

नयी दिल्लीः सरकार ने व्यापारियों और कंपनियों से कहा है कि वे जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद अधिक उपभोग वाले उत्पादों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में बढ़ोतरी के बारे में जनता का सूचित करने के लिए विज्ञापन जारी करें। अधिक खपत वाले उत्पादों के संशोधित एमआरपी के बारे में दो स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देना होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी उत्पाद का काफी ज्यादा उपभोग है तो तुरंत संशोधित एमआरपी के बारे में समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया जाना चाहिए। लोगों को विज्ञापन के जरिये इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। हालांकि अधिया यह कहने से बचे कि अनुपालन न किए जाने की स्थिति में कौन से कानूनी प्रावधान लागू होंगे। जीएसटी से पहले के स्टॉक को निकालने के लिए इससे पहले सरकार ने इसी सप्ताह दो स्टीकरों जिसमें एक में नई कीमत और साथ में उत्पाद की पुरानी कीमत का उल्लेख होगा के तीन महीने के लिए इस्तेमाल की अनुमति दी थी। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि कानून के तहत प्रत्येक उत्पाद पर एमआरपी का स्पष्ट रूप से उल्लेख करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के बाद विभिन्न उत्पादों पर कर प्रभाव में बदलाव के मद्देनजर कानून के तहत नई दरों का उल्लेख करना अनिवार्य है। अधिया ने कहा कि एमआरपी में बदलाव की समस्या के हल के लिए सरकार ने नई दरों वाले स्टीकर चिपकाने की अनुमति दी है। उन्होंने यहां दूसरी जीएसटी मास्टर क्लास में कहा, ‘मैं व्यापारियों से अपील करता हूं कि स्टीकर चिपकाना मुश्किल काम नहीं है। जितना जल्दी वे ऐसा करेंगे, उतना ही उनके लिए यह अच्छा होगा। ‘

पैकेटबंद खाद्य का लेबल बड़े आकार में छापा जाए

नयी दिल्लीः उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने विनिर्माण कंपनियों के लिए लेबल का ब्योरा बड़े फोंट में छापने को अनिवार्य कर दिया है। कंपनियों को एक्सपायरी की तारीख और शुद्ध भार आदि का ब्योरा बडे़ आकार में छापना होगा। कानूनी मापतौल में संशोधन के जरिये उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ये बदलाव किए हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, ‘हमने यह उपभोक्ताओं के हित में ऐसा किया है। इससे उपभोक्ता प्री पैक्ड खाद्य पदार्थों’ पर लेबल पर लिखे ब्योरे को पढ़ सकेंगे। ‘
पांच चीजों की जानकारी अनिवार्य
लेबल पर पांच चीजों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसमें न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी), विनिर्माण आंकड़ा, मियाद की अवधि समाप्त होने की तारीख, शुद्ध भार और कंज्यूमर केयर का ब्योरा शामिल है। पासवान ने कहा कि शब्दों का आकार और अनिवार्य घोषणाओं को बढ़ा दिया गया है, ताकि उपभोक्ता इन्हें आसानी से पढ़ सकें। फिलहाल लेबल पर प्रकाशित ब्योरा इतने छोटे अक्षरों में होता है कि उपभोक्ताओं को उन्हें पढ़ने में परेशानी होती है। इस बारे में सरकार को शिकायतें मिलती रहती हैं। पासवान ने कहा कि दोहरे एमआरपी की अनुमति नहीं होगी। शुद्ध भार का परीक्षण और पैकेटबंद खाद्य पर उसकी घोषणा को उद्योगों के हित में अधिक वैज्ञानिक किया गया है।

 

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