सीलिंग पर मॉनिटरिंग कमेटी को समाप्त करना चाहती है सरकार, कैट ने किया समर्थन

नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक याचिका में सीलिंग पर बनी मॉनिटरिंग कमेटी को समाप्त करने का आग्रह किया गया हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक स्पेशल टास्क फाॅर्स बनाई गई है जो वही काम कर रही है जो मॉनिटरिंग कमेटी कर रही है। एक ही विषय पर दो कमेटियों के काम करने का कोई मतलब नहीं है। इस फैसले का स्वागत करते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार में भी 60 वर्ष की उम्र के बाद रिटायरमेंट हो जाता है, लिहाजा कोर्ट द्वारा गठित किसी भी कमेटी पर यह प्रावधान लागू होना चाहिए। मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य काफी वृद्ध हो गए हैं, इसलिए उन पर अब काम का बोझ डालना उचित नहीं है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की दिल्ली में हो रही लगातार सीलिंग से गत 13 वर्षों से दिल्ली के व्यापारी परेशान हैं और दिल्ली का पूरा व्यापार चौपट हो गया है और उधर मॉनिटरिंग कमेटी के तानाशाही रवैय्ये से दिल्ली के व्यापारी बुरी तरह त्रस्त और परेशान हैं ।

मॉनिटरिंग कमेटी ने सभी नियमों एवं कानूनों को ताक पर रख दिया है और जबरदस्ती एक अतिरिक्त संवैधानिक संस्था का ढोंग करते हुए दिल्ली में मनमाने तरीके से सीलिंग कर रही है। मास्टर प्लान में केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक संशोधन करने के बाद भी जिन व्यापारियों की दुकानों की सीलिंग खुल जानी चाहिए थी, उनकी सीलिंग मॉनिटरिंग कमेटी ने आज तक नहीं खोली है। मॉनिटरिंग कमेटी ने अपने नियम स्वयं निर्धारित किए हैं जो बेहद गैर कानूनी है। मॉनिटरिंग कमेटी विशुद्ध रूप से एक तानाशाह के रूप में काम कर रही है और केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा पारित किये गए कानून जिनका पालन सभी के लिए अनिवार्य है उनको धता बताते हुए मनमर्जी से सीलिंग के आदेश जारी कर रही है। इस मामले में सरकार हो या डीडीए या नगर निगम सब एक तरह से पंगु हो गए हैं। मॉनिटरिंग कमेटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खुले आम सीलिंग कर रही है और कोई देखने वाला नहीं है।

मॉनिटरिंग कमेटी के तीनों सदस्य लगभग 75 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और जब किसी सरकार में सेवानिवृति की आयु 60 वर्ष है, जबकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष हैं, ऐसे में यह नियम मॉनिटरिंग कमेटी पर क्यों नहीं लागू होता। यह नियम इन पर भी लागू कर मॉनिटरिंग कमेटी को तुरंत भंग कर देना चाहिए। व्यापारियों ने कहा की मॉनिटरिंग कमेटी का गठन केवल रिहायशी क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियों के लिया हुआ था, लेकिन मॉनिटरिंग कमेटी ने दिल्ली के व्यापार को बर्बाद करने का निर्णय लेते हुए अपनी अधिकार सीमा के बाहर जाकर पूरी दिल्ली में सीलिंग के तुग़लकी आदेश दिए हैं। किसी भी व्यापारी को कानून के मुताबिक अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया जो की बेहद गैर कानूनी है ।

 

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