सरकार के राहत देने के बाद भी टैरिफ बढ़ाए बिना टेलीकॉम कंपनियों का गुजारा नहीं

नई दिल्ली : लगातार घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनियों को सरकार ने राहत दिया है, लेकिन फिर भी  टैरिफ बढ़ाए बिना कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों का कहना है कि कंपनियों का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू जब तक साल 2015 के स्तर पर नहीं आएगा, सरकार की तरफ से मिलने वाले किसी राहत पैकेज का लाभ नहीं होगा।

हाल ही में केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को राहत देते हुए स्पेक्ट्रम शुल्क भुगतान को दो वर्षो तक के लिए टाल दिया है, लेकिन अभी भी एजीआर अदा करने को लेकर फैसला नहीं हुआ है और सचिवों की समिति उस पर विचार कर रही है। सेक्टर के एक्सपर्ट मानते हैं कि इस क्षेत्र के अन्य बकाया मुद्दों का हल ढूंढने के साथ-साथ टैरिफ दरों में बढ़ोत्तुरी को अब टाला नहीं जा सकता।

जानकारों का कहना है कि दरअसल टेलीकॉम सेवाओं और डाटा सस्ता करने की होड़ में कंपनियों की वित्तीय स्थिति बिगड़ती चली गई।  वहीं मॉर्गन स्टेनले के पराग गुप्ता के मुताबिक इसे वापस 2015 के स्तर पर लाना होगा। टेलीकॉम सेक्टर की तीनों बड़ी कंपनियां जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया टैरिफ दरों में वृद्धि का संकेत दे चुकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री के के जानकारों का कहना है कि अगर 200 रुपये का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू पाने के स्तर तक पहुंचना है तो कंपनियों को मौजूदा दरों से टैरिफ में 30 परसेंट की वृद्धि करनी होगी। ब्रिकवर्क रेटिंग के निदेशक (रेटिंग) विपुल शर्मा का कहना है कि टैरिफ दरों में 10 परसेंट की वृद्धि भी कंपनियों के घाटे में 30 परसेंट तक की कमी ला सकती है।

टेलीकॉम सेक्टर का रेगुलेटर ट्राई फिलहाल टैरिफ दरों में संशोधन पर विचार कर रहा है , जबकि  मुकेश अंबानी की कंपनी जियो टैरिफ दरों में बढ़ोतरी का समर्थन पहले ही कर चुकी है। क्रेडिट सुइस का कहना है कि ट्राई पर निर्भर करेगा कि कितनी वृद्धि की सिफारिश करता है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह 20 परसेंट से अधिक होनी चाहिए। सेक्टर के जानकारों का मानना है कि टैरिफ दरों में वृद्धि और सरकार के शुल्कों में कमी पूरे सेक्टर की दशा को सुधारने में मदद कर करेगी। सेक्टर करीब सात लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है। वहीं एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दोनों ने ही चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया है। एयरटेल को 23,045 करोड़ रुपये और वोडाफोन आइडिया ने 50,921.9 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। दोनों कंपनियों पर एजीआर बकाया मद में 81000 करोड़ रुपये चुकाने हैं।

टेलीकॉम कंपनियों के संगठन सीओएआइ के महानिदेशक राजन एस मैथ्यूज का इस बारे में कहना है कि भुगतान में राहत के साथ ही सेक्टर के अन्य मुद्दों को भी सुलझाना जरूरी है। वर्तमान में टेलीकॉम कंपनियां अपने राजस्व का 30 प्रतिशत हिस्सा सरकारी टैक्स और शुल्कों के भुगतान पर खर्च कर रही हैं।

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