व्यापार को लेकर अमेरिका के खिलाफ भारत और चीन एक साथ आए

नई दिल्लीः एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्‍था भारत और चीन अमेरिका के खिलाफ एक साथ आ गए हैं। दरअसल, सोमवार को विश्व व्यापार संगठन के 22 विकासशील और सबसे कम विकसित सदस्य देशों की बैठक शुरू हुई। भारत ने इस दो दिवसीय बैठक में व्यापारिक मुद्दों पर सदस्य देशों की एकतरफा कार्रवाई से संबंधित कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है।
दक्षिण अफ्रीका भारत के इस कदम के समर्थन में हैं। इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख बिंदु यह है कि यह विकासशील देशों के लिए विशेष प्रावधान हैं जिसे विशेष और विभेदकारी व्यवहार (स्पेशल ऐंड डिफरेंशल ट्रीटमेंट) कहा जाता है। इसके तहत विकासशील देशों को समझौतों और वादों को लागू करने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। साथ ही, इसमें उनके व्यापारिक हितों की सुरक्षा के प्रावधान भी हैं।
अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर (करीब 395 अरब रुपये) मूल्य की आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी बेनिफिट्स हटाकर भारत को भी व्यापारिक झटका दिया है। यूएस ट्रेड सेक्रटरी विल्बर रॉस ने अपने हालिया दिल्ली दौरे में भारत पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर अन्यायपूर्ण तरीके से आयात शुल्क लगाता है। बहरहाल, अमेरिका की एकपक्षीय कार्रवाई के खिलाफ बहुपक्षीय एकजुटता से भारत और चीन फायदे में रहेंगे।

इस बैठक में चर्चा का दूसरा विषय डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की अपीलीय संस्था का पतन होना है। विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे के लिए सुनवाई करने वाली अपीलेट बॉडी इसलिए अप्रभावी हो गई है क्योंकि अमेरिका ने जजों की नियुक्ति पर रोक लगा दी।

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