वैश्विक मंदी आने के संकेत, भारत पर नहीं होगा असर : रिपोर्ट

नई दिल्ली : अमेरिका की इनवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने एक बार फिर से आर्थिक मंदी के संकेत दिए हैं। दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं मंदी के संकेत दे रही हैं और अगले 9 महीनों में ही आ जाएगी, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत इस मंदी की चपेट से दूर रहेगा।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मंदी का खतरा कम है, लेकिन, सरकार को चौकन्ना रहना होगा और जरूरी कदम उठाने होंगे। पिछले दिनों आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा था कि स्थागत या नीतिगत तौर पर भारत में सबकुछ सही दिशा में चल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका के जरिए ट्रेड वॉर फिर से भड़कता है और वह चीन से आने वाले सभी सामानों पर ड्यूटी बढ़ाकर 25 फीसदी कर देता है, तो दुनिया में तीन तिमाहियों में ही मंदी आ जाएगी। भारत में हालांकि मंदी के उतने लक्षण नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऑटो सेक्टर इस मंदी की चपेट में आ सकता है।

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ब्रेक्सिट के कारण राजनीतिक उठा-पटक की वजह से वहां दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद सिकुड़ गया है। मंदी को देखते हुए दुनिया के तमाम सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में 0. 35 फीसदी की कटौती की थी। न्यूजीलैंड ने 50 आधार अंकों और थाईलैंड ने भी 25 आधार अंकों की कटौती की है।

क्या है कारण
दरअसल अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का असर दिखाई दे रहा है। दोनों देश के बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि चीन और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड टॉक को कैंसिल किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि 2020 के अंत में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तक ट्रंप का यह रवैया रह सकता है और तब तक ट्रेड वॉर का खतरा बना रहेगा।

पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि वह 1 सितंबर से चीन से आने वाले 300 बिलियन डॉलर के सामान पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाएंगे और यह टैरिफ 250 बिलियन डॉलर के सामान पर लगने वाले 25 फीसदी के टैरिफ से अलग होगा।
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अगर 300 बिलियन डॉलर पर टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाता है तो दुनिया भर में तीन तिमाही में मंदी आ जाएगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसा हो सकता है।

वहीँ आईएमएफ ने भी चीन की विकास दर को घटाकर 6.2 फीसदी कर दिया है। अमेरिका के इस कदम से चीन का ग्रोथ रेट तेजी से गिर रही है। वैश्विक मंदी का सबसे बड़ा दूसरा कारक बांड यील्ड का उल्टा होना है। यह घटना 2008 की मंदी से पहले भी हुई थी। मंदी से पहले भी बांड यील्ड के ग्राफ का कर्व उलटा हुआ था और यह अब लगभग वैसा ही हो रहा है। वैश्विक मंदी का सबसे बड़ा संकेत है कि मांग में भारी कमी आई है।

11 साल बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स (2. 25 फीसदी से 2 फीसदी) की कटौती की है। राष्ट्रपति ट्रंप लगातार रेट कट का दबाव बना रहे हैं। न्यूजीलैंड ने 50 बेसिस प्वाइंट्स की और थाईलैंड ने 25 बेसिस प्वाइंट्स और भारत ने 35 बेसिस प्लाइंट की कटौती की है।

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