विनिवेश बढ़ाने के लिए ब्लू चिप कंपनियों में हिस्सेदारी घटाएगी सरकार

नई दिल्ली : सरकार विनिवेश बढ़ाने के लिए ब्लू चिप कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 फीसदी से कम करेगी। केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले उद्यम के लिए सरकार की न्यूनतम हिस्सेदारी 51 फीसदी होनी चाहिए। निवेशक और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाजार विनियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड जल्द ही अंतर मताधिकार यानी डिफरेंशिल वोटिंग राइट पर नीतिगत दिशानिर्देश जारी करने वाला है, जिससे प्रमोटरों को नियंत्रण कम किए बगैर धन जुटाने की अनुमति मिलेगी।

नियमों के लागू हो जाने के बाद सरकार नियंत्रण खोए या कंपनी के नाम में बदलाव किए बिना सीपीएसई में ज्यादा हिस्सेदारी के विनिवेश पर विचार कर सकती है। वर्तमान में दो दर्जन से ज्यादा सीपीएसई है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 60 फीसदी से कम या तकरीबन 60 फीसदी है। केंद्र सरकार के इन उद्यमों में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल-52 फीसदी), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी-52. 18 फीसदी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल-53. 29 फीसदी), गेल इंडिया (52.64 फीसदी), ऑयल एंड गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी-64.25 फीसदी), पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी-59. 05 फीसदी), पावरग्रिड कॉरपोरेशन (पीजीसीआईएल-55.37 फीसदी), एनटीपीसी, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई-63.75 फीसदी), भारत हैवी इलेक्टिकल्स (बीएचईएल-63. 17 फीसदी), एनबीसीसी (68. 18 फीसदी), कंटेनर कॉरपोरेशन (54.80 फीसदी) जैसे महारत्न और नवरत्न कंपनियां शामिल हैं।

सरकार इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचती है तो उसे बाजार से विनिवेश से आसानी से धन मिलेगा और शेयर बायबैक, नए ईटीएफ इश्यू या विशेष लाभांश की घोषणा समेत पीएसयू से उच्च लाभांश अदायगी जैसे अन्य उपकरणों की जरूरत नहीं होगी। ब्लूचिप पीएसयू के छोटे इश्यू से सरकार के शेयरों की बेहतर उगाही हो सकती है, जिनके बाजार मूल्य अच्छे हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 में 90,000 करोड़ रुपये विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार के लिए कई गैर-रणनीतिक और गैर-कोर पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए गोल्डन शेयर या डीवीआर पहला कदम हो सकता है।

सेबी ने पिछले महीने डीवीआर को लेकर सुझाव पत्र जारी किया था, जिसमें कंपनियों को उनके आर्थिक स्वामित्व की तुलना में शेयर अधिकार जारी करने की अनुमति दी गई थी। डीवीआर की संरचना औपचारिक बन जाए तो फिर वे इस संरचना का उपयोग विनिवेश के लक्ष्य को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं, अधिकांश ब्लूचिप सीपीएसई में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी के करीब है।

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