वस्तुओं की कीमत-आपूर्ति पर पैनी नजर

जीएसटी पर सरकार की समीक्षा शुरू, सहायता को तैयार, ग​ड़बड़ी पर सख्ती

नयी दिल्लीः केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि सरकार वस्तुओं, खासकर जरूरी और दैनिक उपयोग वाले सामान की आपूर्ति और कीमत पर नजर रख रही है ताकि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद इसमें कोई समस्या नहीं हो। उन्होंने कहा कि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद किसी प्रकार की बाधा की कोई रिपोर्ट नहीं है। राजस्व सचिव ने कहा कि केंद्रीय निगरानी समिति में 15 प्रमुख सचिव शामिल हैं। समिति की स्थिति का जायजा लेने के लिये हर मंगलवार को बैठक होगी। इसके अलावा, संयुक्त सचिव(अतिरिक्त सचिव स्तर) के 175 अधिकारियों में प्रत्येक को जीएसटी क्रियान्वयन की निगरानी के लिये 4-5 जिले दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने के बाद करीब दो लाख नये पंजीकरण हुए। इनमें से 39000 को मंजूरी दी जा चुकी है।
आशंकाओं को किया दूर
उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों को बिल जारी करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे एकमुश्त योजना के अंतर्गत आते हैं। उन्हें एक तय कर का भुगतान करने की आवश्यकता है।75 लाख रुपये से अधिक कारोबार वाले बड़े व्यापारियों को बिल जारी करने की आवश्यकता है लेकिन कंप्यूटर जनित बिल देने की आवश्यकता नहीं है। ‘इनवायस ‘ संख्या के साथ हाथ से लिखा बिल काफी है और उसे रिटर्न में भरा जा सकता है। सरकार ने कंपनियों को तीन महीने के लिये संशोधित कीमत दिखाने के लिये अतिरिक्त स्टिकर के उपयोग की अनुमति दी है। जीएसटी लागू होने के बाद पहले से डिब्बाबंद वस्तुओं की कीमतों में संशोधन के बारे में कम-से-कम दो अखबारों में विज्ञापन देकर जानकारी दी जानी है।
क्या शामिल नहीं
पथकर, मंडी शुल्क और वाहनों के राज्यों में प्रवेश पर लगने वाला शुल्क जीएसटी में शामिल नहीं हैं और स्थानीय निकाय या राज्य सरकारें इसकी वसूली करती रहेंगी। वस्तुओं के प्रवेश से संबद्ध अन्य सभी शुल्क जीएसटी में समाहित हो गया है। इसके कारण 22 राज्यों में प्रवेश बाधा को समाप्त कर दिया गया है।

संशोधित एमआरपी छापें या कार्रवाई को तैयार रहेंः पासवान

नयी दिल्लीः सरकार ने विनिर्माताओं को चेताते हुए कहा कि वे माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद किसी समान के पैक पर संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआरपी) छापें या फिर कानूनी कार्वाई को तैयार रहें। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि सरकार ने संशोधित एमआरपी को दोबारा छापने के लिए तीन महीने तक सितंबर तक का समय दिया है। पासवान ने कई ट्वीट के जरिये कहा कि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद कुछ वस्तुओं के दाम घटे हैं और कुछ के बढ़े हैं। कम जीएसटी दर की वजह से कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाना चाहिए। सरकार ऐसे वेंडरों के खिलाफ कानूनी कार्वाई करेगी जो जीएसटी के बाद संशोधित एमआरपी की घोषणा नहीं करेंगे। जिंसों के पैक पर संशोधित दाम छापने होंगे जिससे उपभोक्ताओं को पता रहे कि जीएसटी के बाद किसी वस्तु की कीमत क्या है। पासवान ने कहा, ‘सरकार ने पैकेज्ड जिंस नियम के तहत संशोधित एमआरपी को छापने के लिए सितंबर तक का समय दिया है। ‘

जम्मू कश्मीर में संशोधन प्रस्ताव पेश

श्रीनगरः जम्मू कश्मीर विधानसभा ने राज्य के विशेष दर्जे को प्रभावित किये बगैर ही जीएसटी व्यवस्था लागू करने के लिए सरकार के प्रस्ताव पर मंगलवार को चर्चा शुरू की। वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने विधायकों से इस बात पर सुझाव मांगते हुए प्रस्ताव पेश किया कि कैसे कुछ संशोधनों के साथ जीएसटी से जुड़ा भारतीय संविधान का 101 वां संविधान संशोधन कैसे लागू किया जाए ताकि संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्रभावित न हो।

200 से अधिक अधिकारी करेंगे निगरानी

नयी दिल्लीः केंद्र सरकार के 200 से अधिक अधिकारियों को माल एवं सेवा कर के जिला स्तरीय क्रियान्वयन पर निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। उन्हें उन्हें आवंटित किये गये जिलों में जीएसटी के क्रियान्वयन की निगरानी करने तथा ग्राहकों के सामने आ रही दिक्कतों को दूर करने पर ध्यान देने को कहा गया है। ये अधिकारी आवंटित जिलों में जीएसटी के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे। उसके तहत व्यापारियों का पंजीकरण, दुकानों में कर दरों की प्रदर्शनी, जागरूकता शिविर, प्रचार, जीएसटीएन कामकाज, दुकानों में उपयुक्त बिलिंग आदि शामिल है। उनसे किसी भी क्षेत्र की कर दर से जुड़े मुद्दे की सूचना राजस्व विभाग को बताने को कहा गया है। वे उपभोक्ता संघों, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं, कारोबारी संघों, जिला प्रशासन से रोजाना आधार पर फीडबैक लेंगे। वे इसके लिए कॉल सेंटर, वेब पोर्टल, वीडियो कांफ्रेंस, सोशल मीडिया आदि जैसे तरीकों का इस्तेमाल करेंगे। इस दौरान ग्राहकों की मुश्किलों के हल पर ध्यान दिया जाएगा। मंगलवार को जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने देश के सभी जिलों को 166 समूह में बांट दिया गया है और उन्हें केंद्र सरकार के राजस्व विभाग के प्रशासनिक संभागों से संबद्ध कर दिया गया है। हर समूह का जिम्मा संयुक्त स्तर के सचिव या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को सौंपा गया गया है। अधिकारियों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं खुदरा मूल्य प्रवृति की निगरानी करने को कहा गया है। अधिसूचना में कहा गया है, ‘दाम में वृद्धि की खास घटनाओं की सूचना उपभोक्ता मामले एवं राजस्व विभाग को देनी होगी। ‘ इस अधिसूचना में 201 अधिकारियों की सूची दी गयी है।

वेबसाइट पर एकमुश्त योजना का लाभ

नयी दिल्लीः माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के लिए सूचना प्रौद्योगिकी तकनीक मुहैया कराने वाली कंपनी जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) की वेबसाइट पर आज से व्यापारी एकमुश्त योजना के विकल्प का लाभ उठा सकेंगे। पिछले 10 दिन में इस पोर्टल पर 3.58 लाख नये पंजीकरण भी हुए हैं। जीएसटीएन के चेयरमैन नवीन कुमार ने कहा कि लागत सेवा वितरकों के लिए पंजीकरण सुविधा बुधवार से शुरू होगी जबकि टीसीएस और टीडीएस के लिए यह सुविधा थोड़े दिन बाद 20 जुलाई से शुरू होगी। जीएसटी के ढांचे के तहत कारोबारियों को जीएसटीएन पर पंजीकरण कराना आवश्यक है। कुमार ने कहा कि 25 जून से अब तक 3.58 लाख नए पंजीकरण हुए हैं। इसके अलावा पिछले दस दिन के भीतर ही एक लाख से अधिक मौजूदा उत्पाद शुल्क, सेवाकर और वैट करदाताओं ने भी जीएसटीएन पर स्थानांतरण किया है। इस प्रकार जीएसटीएन पर पंजीकृत लोगों की कुल संख्या 68 लाख के पास पहुंच गई है। आज से व्यापारी जीएसटीएन पर एकमुश्त योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।

एलपीजी सिलेंडर 32 रुपये महंगा

नयी दिल्लीः जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) के दाम 32 रुपये बढ़ गए हैं। यह छह साल में सबसे बड़ी मूल्यवृद्धि है। सब्सिडी या रियायती मूल्य वाले रसोई गैस सिलेंडर पर पांच प्रतिशत कर लगाया गया है। ऐसे में जिन राज्यों में वैट शून्य या पांच प्रतिशत से कम है, वहीं एलपीजी का दाम बढ़ेगा। पेट्रोलियम कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के अलावा कोलकाता में एलपीजी का दाम 31.67 रुपये बढ़कर 480.32 रुपये हो गया है। चेन्नई में यह 31.41 रुपये की वृद्धि के साथ 465.56 रुपये हो गया है। दिल्ली में जीएसटी लागू होने के बाद सब्सिडी वाले एलपीजी के दाम 446.65 रुपये से बढ़कर 477.46 रुपये (14.2 किलोग्राम के सिलेंडर) हो गए हैं। पुरानी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में अलग-अलग फैक्टरी गेट शुल्क या बिक्री कर लगता था। इस व्यवस्था में एलपीजी पर देशभर में शून्य उत्पाद शुल्क था। वैट या बिक्री कर दिल्ली के अलावा चंडीगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, तमिलनाडु, उथर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा कुछ पूर्वोत्तर के राज्यों में शून्य था। अन्य राज्यों में यह एक से पांच प्रतिशत था।

छह दिन चलेगी जीएसटी की क्लास

सरकार ने जीएसटी से जुड़े सवालों के आसानी से जवाब देने के लिए नई व्यवस्था की है। अधिया ने बताया कि दूरदर्शन के नैशनल चैनल पर 6 दिन जीएसटी पर क्लास चलेगी। यह क्लास 3 दिन हिंदी और तीन दिन अंग्रेजी में होगी। इनकी शुरुआत गुरुवार से हो रही है। गुरुवार और शुक्रवार को शाम 4:30 से 5:30 तक क्लास होगी, जबकि शनिवार को यह क्लास दोपहर 12 बजे होगी। इसके बाद सोमवार, मंगलवार और बुधवार को अंग्रेजी में क्लास होगी।

असंवेदनशीलता का तर्क खारिज किया

नयी दिल्लीःजीएसटी के दिव्यांगों के प्रति ‘असंवेदनशील ‘ होने के कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आरोप को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि दिव्यांगों के लिए काम में आने वाले उपकरणों पर 5% की रियायती दर से जीएसटी इसलिए लगाया गया है ताकि उन्हें कच्चे माल पर चुकाए गए शुल्कों के मुआवजे का लाभ मिल सके और अंततः ग्राहकों को फायदा हो। एक आधिकारिक बयान के अनुसार ब्रेल लेखन और ब्रेल कागज से लेकर व्हीलचेयर, बोलने वाली किताब, सुनने में सहायक यंत्र और कृत्रिम अंग इत्यादि पर 5% जीएसटी देय होगा। लेकिन इनके निर्माण में काम आने वाले कच्चे माल पर जीएसटी 18% की दर से लगेगा। फिर भी अंतिम ग्राहक पर कर लागत कम होगी क्यों कि घरेलू विनिर्माता कच्चे माल पर दिए गए जीएसटी के मुआवजे या रिफंड का दावा कर सकता है।

भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार प्रभावित

कोलकाताः जीएसटी सॉफ्टवेयर बुनियादी ढांचा कर की शुरुआती समस्याएं पेट्रापोल और बंगलादेश की सीमा से लगी अन्य सीमा व्यापार चौकियों पर व्यापार को प्रभावित कर रही हैं। कोलकाता कस्टम हाउस एजेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुजीत चक्रवर्ती ने कहा ‘हम समस्याओं से जूझ रहे हैं। जीएसटी का बुनियादी ढांचा पर्याप्त नहीं है तथा सुचारु ढंग से काम नहीं कर रहा है, समस्या समाधान की कोशिशें की जा रही हैं। इसके कारण सीमा पार ट्रक की आवाजाही बहुत धीमा है। ‘ उन्होंने कहा, ‘हम आयातित माल के चालान की पर्ची या प्रवेश पर्ची निकालने में ढेर सारी गलतियां हो रही हैं और क्लियरेंस में देरी हो रही है।’

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