रियल स्टेट की बढेंगी मुश्किलें, छह बड़ी कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर : रिपोर्ट

नई दिल्ली : देश के रियल एस्टेट की स्थिति फ़िलहाल अच्छी नहीं है और इस क्षेत्र में की कम से कम छह बड़ी कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर हैं। देशभर में रियल स्टेट में लाखों फ्लैट्स पड़े हैं, लेकिन खरीदार नहीं हैं।बैंकों व वित्तीय संस्थानों ने कंपनियों को कर्ज देना बंद कर दिया है और ऐसे में रियल स्टेट की कीमतों में लगातार कमी हो रही है। इस सेक्टर के बारे में लगातार रिपोर्ट देने वाली एजेंसी नाइट फ्रैंक ने उद्योग संगठन फिक्की और रियल एस्टेट सेक्टर के संगठन नारेडको के साथ जो नया अध्ययन जारी किया है, वह भविष्य में हालात के और बिगड़ने की तरफ इशारा कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक मांग में कमी, अनबिके मकानों की बढ़ती संख्या और एनबीएफसी की समस्या का समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी क्षेत्र में मंदी के बाद रियल एस्टेट सेक्टर की मुश्किलें भी और बढती दिख रही हैं। इस क्षेत्र में परियोजनाओं की बढ़ती लागत को फिलहाल सबसे बड़ी समस्या बताया गया है। इस समस्या के लिए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से वित्त सुविधा के बंद होने को सबसे अहम वजह बताया गया है।

एनबीएफसी से कर्ज नहीं मिलने के कारण कंपनियों को बाहर से महंगा कर्ज लेना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि इस सेक्टर में गंभीरता से काम कर रही कंपनियों के लिए भी बैंकों व वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेना आसान नहीं रह गया है। वैसे तो देश भर में मंदी है, लेकिन उत्तरी भारत में सबसे ज्यादा मंदी है। सर्वे में हिस्सा लेने वाली कंपनियों ने सबसे ज्यादा उत्तर भारत के रियल एस्टेट बाजार को लेकर निराशा जताई है।सर्वे में शामिल वित्तीय संस्थानों की भी निराशा सामने आ रही है और इस सेक्टर की कंपनियों की भी सर्वे में शामिल 74 फीसद उत्तरदाताओं ने कहा है कि अगले छह महीनों के दौरान आर्थिक स्थिति अभी जैसी है, वैसी ही रहेगी, या और खराब होगी। यह समूचे रिएल एस्टेट से जुड़े तंत्र के भय को उजागर करता है।

आवासीय इकाइयों की लांचिंग और उनकी बिक्री भी ख़राब हुई है। 69 फीसद का कहना है कि आवासीय इकाइयों की बिक्री में और गिरावट आने के आसार हैं। आरबीआइ की तरफ से रेपो रेट में कटौती किए जाने के बावजूद बिक्री में कोई खास सुधार आने की गुंजाइश नहीं है। नाइट फ्रैंक के चेयरमैन व एमडी शिशिर बैजल ने कहा कि यह सर्वे साफ करता है कि क्यों रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी है। ऑटो, एफएमसीजी जैसे सेक्टर भी मंदी के चपेट में हैं, जिससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था में मंदी रियल एस्टेट सेक्टर से काफी आगे जा चुका है। इसी तरह से नारेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदनी का मानना है कि, ‘दुनियाभर में रियल एस्टेट सेक्टर को आर्थिक गतिविधियों को एक साथ बढ़ाने वाला माना जाता है।

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