बजट में इस तरह रखती है सरकार आय और व्यय का हिसाब

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट पेश करने जा रही हैं, बजट में साल भर के लिए आय और व्यय की गणना की जाती है। बजट दो चीजें होती है सार्वजनिक आय और दूसरा सार्वजनिक व्यय।

सार्वजनिक आय
सार्वजनिक आय में राजस्व आय और पूंजीगत आय दोनों होती है। कर राजस्व देश का सबसे बड़ा आय का स्रोत है। कर राजस्व, राजस्व आय का एक हिस्सा होता है। यह दो प्रकार का होता है। पहला डायरेक्ट टैक्स और दूसरा इनडायरेक्ट टैक्स। राजस्व आय का दूसरा हिस्सा गैर-कर आय होती है।

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प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर गैर-कर राजस्व
सरकार को सीधे प्राप्त होने वाले कर को प्रत्यक्ष कर कहते हैं, जिसमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, वेल्थ टैक्स आदि शामिल हैं। अप्रत्यक्ष कर में जीएसटी, सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स, कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी आदी कर शामिल हैं। राजस्व आय के दूसरे हिस्से यानी गैर-कर राजस्व में करों के अलावा अन्य मदों से प्राप्त होने वाली आय शामिल होती है, जिसमें ऋण से प्राप्त ब्याज, फीस, विदेशों से प्राप्त आय और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय शामिल होती है। राजस्व आय का सरकार को भविष्य में भुगतान नहीं करना होता है।

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पूंजीगत आय
सार्वजनिक आय का दूसरा हिस्सा पूंजीगत आय होती है, जिसमें सरकार की परिसंपत्तियों में कमी आती है और उसका उत्तरदायित्व बढ़ जाता है। इस तरह की आय का भविष्य में भुगतान करना होता है, जिसमें रिजर्व बैंक से लिया जाने वाला टैक्स, शुद्ध विदेशी ऋण और शुद्ध घरेलू ऋण शामिल होता है।

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