मोदी सरकार शीशम की खेती करने वालों की इस तरह करेगी सहायता

नई दिल्ली : शीशम की लकड़ी को फर्नीचर के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन शीशम की लकड़ी से बने सामनों के इंटरनेशनल ट्रेड पर रोक के चलते भारतीय किसानों को शीशम की खेती का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। अब मोदी सरकार शीशम की खेती करने वालों की सहायता करने लिए प्रस्ताव लाई है, जिससे उनकी आमदानी कई गुना बढ़ सकती है। इसमें शीशम की लकड़ी से बने सामान के कारोबार पर लगे बैन को हटाने की बात की गई है।

दरअसल इंटरनेशनल ट्रेड एग्रीमेंट (साइट्स) के तहत दुर्लभ जानवरों और पेड़-पौधों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिसमें शीशम की लकड़ी से बने सामान पर भी बैन है। सरकार का कहना है कि देश में अधिक संख्या में शीशम के पेड़ हैं, इसलिए उस पर लगे बैन को हटा देना चाहिए।  हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसीएच) का कहना है कि पर्यावरण, जंगल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने साइट्स को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें डालबर्गिया सिसो या शीशम पर बैन हटाने की बात कही गई है। साइट्स के परिशिष्ट- II के तहत शीशम की लकड़ी से बने सामानों के इंटरनेशनल ट्रेड पर बैन है।

वहीं जिनेवा में कॉप 18 की बैठक में शीशम के व्यापार के महत्व पर चर्चा की गई थी। इस बारे में फैसला कर शीशम पर बैन हटा देना चाहिए। शीशम के कारोबार पर 2016 में बैन लगाया गया था। ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि शीशम के पेड़ों पर अस्तित्व का खतरा नहीं है और यह देश के हर हिस्से में बहुतायत में उपलब्ध है। इसलिए शीशम को परिशिष्ट- II से हटाने का प्रस्ताव साइट्स के पास भेजा गया है।

ईपीसीएच ने कहा कि यह प्रस्ताव नेपाल, भूटान और बांग्लादेश सहित पूरे साउथ एशिया के कारीगरों और किसानों के लिए फायदेमंद है।  जेनेवा में चल रही साइट्स बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। यह बैठक 17 अगस्त को शुरू हुई और 28 अगस्त तक चलेगी। भारत से लकड़ी की कलात्मक वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2018-19 के दौरान 5,424. 91 करोड़ रुपये का रहा जो एक साल पहले से 27.13 प्रतिशत अधिक है।

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