मधुमक्खी पालन क्षेत्र को है बजट से कई उम्मीदें, सरकार से की बी कॉलोनी की मांग

नई दिल्ली : 5 जुलाई को संसद में आम बजट पेश किया जाएगा। इस बजट से किसानों को भी काफी उम्मीदें हैं, खासकर खेतीबाड़ी से जुड़ी उन योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने की उम्मीद हैं, जिनसे किसानों की आमदानी में इजाफा होगा। कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला सेक्टर है शहद उत्पादन का। मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन को बढ़ावा देकर सरकार इस उद्योग से जुड़े लोगों के हित में कई फैसले ले सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक के कार्यकाल में किसानों की आय दोगुनी करने में मधुमक्खी पालन का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। शहद की घरेलू और निर्यात बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन विकास समिति के सदस्य देवव्रत शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के समक्ष मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिए जाने के बारे में समिति ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया है। देवव्रत शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री की वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने और वर्ष 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 5,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

शहद उत्पादन से जुड़ें हैं 10 लाख लोग

देश में 32 लाख मधुमक्खी कॉलोनी हैं, यह श्रम आधारित उद्योग है। फिलहाल इस उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 लाख लोग जुड़े हैं। देश में लगभग दो करोड़ ‘बी-कॉलोनी’ लगाने की जरूरत है। इससे भारी संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और किसानों की आय बढ़ेगी। कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी मधुमक्खीपालन काफी महत्वपूर्ण है जो उत्पादन में अहम माने जाने वाले ‘पर परागण’ का बड़ा स्रोत है। इसके अलावा मधुमक्खीपालन के दौरान कई कीमती और अच्छी मांग वाले औषधीय उत्पाद भी तैयार होते हैं जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। देश के घरेलू बाजार में होने वाले शहद कारोबार के अलावा पिछले वित्त वर्ष में देश से करीब 500 करोड़ रुपये का 61 हजार टन शहद निर्यात किया गया। चालू वित्त वर्ष के दौरान यह आंकड़ा तेजी से बढ़ने का अनुमान है। इस वर्ष लगभग 90 हजार टन शहद निर्यात की उम्मीद की जा रही है।

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