भारत में बीमा को लेकर बदल रही है सोच : रिपोर्ट

नई दिल्ली : भारत में लंबे समय से बीमाधारकों की संख्या बेहद कम रही है और बीमा को लेकर जागरुकता तो उससे भी कम रही है। ग्राहकों में बीमा को लेकर गलतफहमियां और जागरुकता में कमी के चलते बीमा खरीदने को लेकर उनकी सोच भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। पॉलिसीबाज़ार डॉट कॉम पर 5,600 मौजूदा बीमा ग्राहकों का सर्वेक्षण किया और बीमा के प्रति उनके दृष्टिकोण, धारणा और व्यवहार को जानने की कोशिश की। सर्वे के कुल परिणाम यह दिखाते हैं कि भारत के लोग अभी भी ‘टैक्सि बचाने’ और ‘निवेश’ के लिए बीमा खरीदते हैं, हालांकि लोग अब धीरे-धीरे इस बात को भी मानने लगे हैं कि बीमा का मतलब ‘सुरक्षा’ होता है।

इसलिए लेते हैं लोग स्वास्थ बीमा
सर्वेक्षण में शामिल 98% लोगों ने मेडिकल खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा हासिल करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदा। 24% ग्राहकों ने टैक्सं बचाने और जीवन में आए बड़े निजी बदलाव जैसे कि विवाह और बच्चों का जन्मो जैसे विभिन्न‍ कारकों को अधिक महत्वन दिया। 45% प्रतिभागी इस बात से सहमत नजर आए कि उनकी नियोक्ता कंपनी द्वारा प्रदान किया गया हेल्थ इंश्योरेंस उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरी तरह से कवर करने के लिए काफी नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 40% लोग मानते हैं कि एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी चुनते वक्त उसका क्लेम सेटलमेंट रेश्यो सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद हॉस्पिपटल का नेटवर्क, ब्रांड,रिश्तेदारों और मित्रों की सलाह की भूमिका अहम होती है। एक चौथाई उत्तरदाताओं ने कवर राशि चुनते वक्त महंगे होते इलाज को सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना है। इसके बाद पॉलिसी के अंतर्गत कवर लोगों की संख्याे (19%) और उनके परिवार में पहले हुई बीमारी (9%) को महत्वमपूर्ण कारक माना गया। लगभग 44% प्रतिभागियों ने बीमा राशि का चयन करने के लिए इन तीन कारणों के मेल पर ध्यान दिया।

10 में से 6 प्रतिभागियों ने टर्म लाइफ इंश्योरेंस को ‘वित्तीय सुरक्षा’ के लिए खरीदा है। लगभग 38% प्रतिभागियों ने विभिन्नम कारणों के चलते कवर खरीदा, जिसमें खुद को और अपने परिवार को वित्तीय रूप से सुरक्षित करना और टैक्स बचाने जैसे कारण शामिल थे। सर्वेक्षण में शामिल एक तिहाई लोगों का मानना था कि सम एश्योर्ड राशि उनकी वार्षिक आय के 10-20 गुना के बीच होनी चाहिए। 10 में से लगभग 5 प्रतिभागियों को पता था कि यदि कोई व्यक्ति पूरी बीमा अवधि तक जीवित रहता है तो टर्म इंश्योरेंस का कोई भी भुगतान नहीं होता है, वहीं 30% इस बात को लेकर अनजान थे कि भुगतान होगा या नहीं। 10 में से 4 उत्तरदाताओं ने एक ऐसा टर्म कवर खरीदा, जिसने उन्हें रिटायर होने तक वित्तीय सुरक्षा प्रदान की या फिर वे अपने वित्तीय जिम्मेदारियों / देनदारियों से पूरी तरह मुक्त रहे। लगभग एक तिहाई उपभोक्ताओं ने उतनी अवधि के लिए टर्म इंश्योरेंस खरीदा है, जितनी कि उनकी कमाई करने की अवधि है।

मोटर बीमा को लेकर जागरूकता कम
10 में से 7 मोटर इंश्योरेंस ग्राहकों ने इसलिए बीमा खरीदा क्योंकि यह वाहन मालिकों के लिए अनिवार्य है और यह वाहन के नुकसान या चोरी के चलते होने वाले वित्तीय नुकसान के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। एक तिहाई उत्तरदाताओं ने थर्ड पार्टी दायित्व को ध्यान में रखते हुए मोटर बीमा खरीदा था। 10 में से 6 उत्तरदाताओं को पता था कि लैप्सन हो चुके मोटर इंश्योरेंस का रिन्युअल ऑनलाइन किया जा सकता है। वहीं 10 में से 4 को यह पता नहीं था कि लैप्सअ इंश्योरेंस का रिन्युअल ऑनलाइन किया जा सकता है या फिर वे इसके बारे में अनजान थे। 10 में से 5 उपभोक्ताओं को यह पता था कि थर्ड पार्टी कवर कानूनी रूप से अनिवार्य है। 4% उपभोक्ताओं ने बताया कि कार बीमा के लिए ओन डैमेज कवर अनिवार्य है, जबकि ऐसा नहीं है। 45% का मानना था कि थर्ड-पार्टी और ओन डैमेज कवर अनिवार्य है। 10 में से 6 या फिर 3/5 उपभोक्ताओं को उन लाभों के बारे में पता था कि जो कि उन्हेंं एक थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस कवर से मिल सकता है। एक तिहाई उपभोक्ता यह मानते हैं कि थर्ड पार्टी दायित्व् को कवर करने के अलावा, यह स्वपयं के वाहन के नुकसान और चोरी के प्रति भी सुरक्षा प्रदान करती है। 10 में से 5 मोटर इंश्योरेंस ग्राहकों का यह मानना था कि जीरो डेप कवर में बिना किसी कटौती के मरम्मत, थर्ड पार्टी का नुकसान और वाहन की चोरी के चलते हुआ नुकसान भी शामिल होता है। 10 में से 4 उपभोक्ता जीरो डेप कवर को एक ऐसा जरिया मानते हैं जो वाहन की मरम्मत की स्थिति में वित्तीय नुकसान को कम कर सकता है।

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