भारत जलवायु प्रतिबद्धताओं पर खरे उतरने वाले देशों में शामिल है: प्रकाश जावडेकर

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नई दिल्ली : केवल 4% वर्षा जल संसाधनों और पूरी दुनिया के कुल भू भाग के 2.5 प्रतिशत वाले भारत का वैश्विक जैव विविधता में कुल योगदान 8 प्रतिशत है। भारत का आचार-व्यवहार प्रकृति के अनुकूल है और इससे प्रकृति के साथ तालमेल बैठाते हुए टिकाऊ जीवनशैली अपनाने में मदद मिलती है। यह बात पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने ऑनलाइन संवाद एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट ने ‘कॉमन फ्यूचर: सेफ एंड सिक्योर एनवायरनमेंट फॉर ऑल’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम को बतौर विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) 2021 के प्री-इवेंट के रूप में आयोजित किया गया। टेरी के प्रमुख कार्यक्रम डब्ल्यूएसडीएस का आयोजन अगले साल 10-12 फरवरी को नई दिल्ली में किया जाएगा।

जावडेकर ने कहा कि भारत अपनी कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (सीबीडी) के तहत लाभों को साझा और उन तक पहुंच सुनिश्चित करने के मामले में नागोया प्रोटोकॉल को स्वीकार कर चुका है और हम इसे जैविक विविधता कानून 2002 के तहत लागू भी कर रहे हैं। हम उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ काम करने के लिए राष्ट्रीय निर्धारित लक्ष्यों (एनडीसी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत ने स्वेच्छा से एनडीसी के जरिए ऊर्जा और उत्सर्जन की मात्रा को कम करने और साथ-साथ 2.5-3 मीट्रिक टन कार्बन को अलग-थलग करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से तैयार की गई जलवायु नीतियां आर्थिक सुधार में योगदान कर सकती हैं। समय अक्षय ऊर्जा में तेजी लाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता क्षेत्रों में हरित रोजगार सृजित करने का है। वहीँ इस मौके पर टेरी के महानिदेशक डॉ अजय माथुर ने कहा कि हमने एक ऐसे नए दायरे में कदम रखा है, जहाँ हमारे लिए यह पूरी तरह से महत्वपूर्ण है कि जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता हमारे सतत विकास के एजेंडे में सबसे ऊपर हो। कोविड-19 संकट ने सरकारों और व्यवसायों के लिए एक ऐसा अवसर पैदा किया है, जहां से ग्रीन रिकवरी योजना की तरफ रुख किया जा सकता है और यह जलवायु परिवर्तन खिलाफ प्रगति का एक महत्वपूर्ण बिंदु है। आर्थिक सुधार की राह पर अब जलवायु प्राथमिकताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

इस ऑनलाइन संवाद में भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत महामहिम यूगो एस्टुटो ने कहा कि हम इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस को एक निर्णायक क्षण में मना रहे हैं। कोविड-19 संकट बताता है कि एक बेहतर और स्वस्थ दुनिया में निवेश करने की जरूरत है।

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