भारतीय बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ घटकर दो साल के निचले स्तर पर आया : आरबीआई

नई दिल्ली : आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ घटकर लगभग दो साल के निचले स्तर पर आ गया है, क्योंकि घरेलू खपत घटने से मांग में कमी आई है। इकॉनोमिस्ट का कहना है कि क्रेडिट ग्रोथ में सुस्ती मांग और आपूर्ति दोनों के कम होने का नतीजा है। बैंकों का लेंडिंग ग्रोथ साल की शुरुआत से सितंबर के अंत तक लगभग आधा घट गया और यह 8.8 फीसद रहा है।

आरबीआई के आंकड़ों में बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे सरकारी बैंक और एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई जैसे प्राइवेट बैंक भी शामिल हैं। खुदरा कर्ज से ग्रोथ बढ़ी है तो वहीं दूसरी तरफ बैंक कुछ कंज्यूमर लोन्स को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। कुछ खास खुदरा लोन के मामले में यह देखने को मिल रहा है कि ग्राहक नियत तिथि के कुछ दिनों बाद भुगतान कर रहे हैं।

हाल ही में इंडिया रेटिंग्स् की एक रिपोर्ट आई थी, जिसके मुताबिक हाउसिंग और ऑटो सहित विभिन्न सेगमेंट में आई खपत में गिरावट को देखते हुए खुदरा कर्ज में 2020 के दौरान और कमी आ सकती है। वहीं क्रेडिट कार्ड्स, एजुकेशन लोन और दूसरे पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योिर्ड लोन की ग्रोथ में कमी आई है। देश में कर्ज की समस्या आईएल एंड एफएस के धराशायी होने के बाद बढ़ी है और कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीाय कंपनियां काफी सोच-समझ कर लोन दे रही हैं और वहीं अन्य कंपनियों ने लोन देना पूरी तरह बंद ही कर दिया है।

एनबीएफसी ने पिछले साल के अंत तक 30 फीसद ऑटो लोन और 40 फीसद से अधिक होम लोन दिया था। कर्ज में कमजोर ग्रोथ तब देखी जा रही है, जब बैंक लगातार ब्या ज दरों में कटौती कर रहे हैं। इस साल अब तक आरबीआई ने रेपो रेट में 135 आधार अंकों की कटौती की है, लेकिन बैंकों ने इसके बराबर ब्या ज दरों में कटौती नहीं की। हालाँकि आरबीआई के निर्देश के बाद पिछले कुछ महीनों से बैंकों द्वारा ब्याबज दर घटाने में तेजी आई है।

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