भारतीय उपभोक्ता ऑनलाइन सुरक्षा को जरूरी मानते हैं : रिपोर्ट

नई दिल्ली : आंकड़ों का विश्लेषण करने और बिजनेस डिसीजन मैनेजमेंट की प्रमुख कंपनियों में से एक एक्सपिरियन ने 2019 एक्सपिरियन आईडेंटिटी एंड फ्रॉड रिपोर्ट एशिया पैसिफिक एडिशन रिलीज की है। यह रिपोर्ट मुख्य रूप से बताती है कि भारतीय उपभोक्ता सुरक्षा को ऑनलाइन अनुभव का सबसे विश्वसनीय तत्व मानते हैं। विश्वसनीय ऑनलाइन रिलेशनशिप उऩ कारोबारियों से ही बनती है, जो उपभोक्ताओं को सुरक्षित वातावरण और ऑनलाइन रहने के समय उन्हें शानदार अनुभव मुहैया कराते हैं।

सर्वे में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 6 हजार उपभोक्ताओं ने भाग लिया है, जिसके मुताबिक इसमें से 71 फीसदी उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन रहते हुए सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया। 15 फीसदी उपभोक्ताओं ने नेट सर्फिंग के वक्त ज्यादा सुविधाओं और 14 फीसदी उपभोक्ताओं ने निजीकरण को महत्व दिया। एशिया प्रशांत क्षेत्र के 590 कारोबारियों पर किए गए सर्वे के मुताबिक 65 फीसदी व्यापारियों ने पिछले 12 महीने में ऑनलाइन फ्रॉड होने से नुकसान के मामलों में बढ़ोतरी का अनुभव किया है। इसमें अकाउंट को हैक कर रुपये निकालने और जाली खाते खुलवाने के मामले शामिल है।

एक्सपिरियन इंडिया के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर सत्या कल्याणसुंदरम ने कहा कि एक्सपिरियन आईडेंटिटी और फ्रॉड 2019 की एशिया-पैसिफिक एडिशन की रिपोर्ट बिजनेस में ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरत को उभारती है। आज कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को शानदार अनुभव दिलाने के लिए नए-नए समाधान पेश कर रही है, लेकिन उपभोक्ताओं के आंकड़ों और सूचना को सुरक्षित कर उन्हें नुकसान पहुंचाने के खतरे पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। रिपोर्ट के नतीजों के अनुसार 64 फीसदी भारतीय नई तकनीक और समाधान के आधुनिक तरीके पसंद करते हैं। भारत में 40 फीसदी से ज्यादा जिन उपभोक्ताओं पर सर्वे किया गया, वह नियमित रूप से सिक्युरिटी के आधुनिक तरीकों से अपनी सुरक्षा को पुख्ता बनाने की कोशिश में जुटे रहते हैं। एशिया प्रशांत क्षेत्र में यह ट्रेंड ज्यादा देखा जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक 65 फीसदी से ज्यादा भारतीय उपभोक्ता व्यापारिक संस्थान से पूरी पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं। इसी की तर्ज पर भारत में सरकारी एजेंसियां जैसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) उपभोक्ताओं की ऑनलाइन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सक्रियता से काम कर रही है। आरबीआई अपनी ओर से लगातार कठोर प्रयास कर रहा है कि भारत में होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन नो योर कस्टमर (केवाईसी) पर अमल के माध्यम से पूरी तरह सुरक्षित रहे। नियामक संस्थाएं भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा को बरकरार रखने में भी काफी मदद कर रही है। पर्सनल डेटा के अवैध इस्तेमाल के लिए नियामक संस्थाओं ने इंडस्ट्री की कई दिग्गज कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है।

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