बीसीसीएल में निवेश को लेकर कंपनियों में रुझान कम

नई दिल्ली : सरकारी क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के विनिवेश की को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। घरेलू पेट्रोलियम कंपनी के रणनीतिक साझेदारों के तौर पर जिन विदेशी कंपनियों की चर्चा चल रही है, उनके इस कंपनी में निवेश को लेकर निवेशक आश्वस्त नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय संस्था मैक्वायरी का कहना है कि दरअसल संभावित खरीदार फ़िलहाल निवेश करने की स्थिति में नहीं हैं।

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मैक्वायरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निवेशकों के हाल के वित्तीय फैसलों के आधार पर यह बात पता चली है। हाल ही में अडानी गैस के साथ हाथ मिलाने वाली अमेरिकी तेल कंपनी टोटल के बारे में मैक्वायरी ने कहा कि कंपनी ने हाल ही में अफ्रीका में 9 अरब डालर का निवेश किया है। ऐसे में फिर से बड़ा निवेश को लेकर असमंजस है। वहीँ बीपीसीएल के सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही शेल ने भी शेयर बायबैक भी एक अन्य फंडिंग में लगी है, वहीं बीपी भी रिलायंस के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के घरेलू रिटेल क्षेत्र में उतरने के लिए गठबंधन कर चुकी है।

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ऐसे में बीपीसीएल में निवेश की कोई संभावना नहीं दिखती। रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम सेक्टर की एक अन्य बड़ी कंपनी शेवरॉन पहले भी भारत में संभावनाएं तलाश चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब बीपीसीएल में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कंपनियों के रुझान ना के बराबर दिख रहा है।

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